- नियम 8 (1) के अनुसार राजस्थान सेवा नियमों के अधीन स्थायी या अस्थायी रूप से नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन का बीमा करायेगा।
- नियम 8 (2) के अनुसार बीमा उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें उक्त व्यक्ति नियुक्त हुआ है, मार्च मास से किया जायेगा।
- राज्य बीमा योजना में प्रथम व अधिक कटौती सदैव माह मार्च देय अप्रैल के वेतन से ही होती हैं अतः प्रथम अप्रैल को बीमा कटौती की जोखिम वहन तिथि कहलाती हैं।
- नियम 8(3) के अनुसार बीमा इस शर्त के अध्यधीन किया जायेगा कि कर्मचारी क्षय रोग, अस्थमा, कैंसर, मधुमेह,एड्स या सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किसी भी अन्य गम्भीर रोग से ग्रसित न हो। वह इस आशय की घोषणा अपने प्रथम घोषणा पत्र में करेगा।
- नियम-11 के उप नियम (1) (i) के अनुसार बीमा योजना के तहत बीमित व्यक्ति द्वारा देय मासिक प्रीमियम समय-समय पर सरकारी आदेश द्वारा संशोधित दर से वसूला जायेगी
- नियम-11 के उप नियम (1) (ii) के अनुसार जब भी, वेतन स्लैब में बदलाव के परिणामस्वरूप, बीमाधारक द्वारा पहले से ही देय प्रीमियम उसके द्वारा भुगतान किए जाने वाले प्रीमियम से कम रह जाता है तो वृद्धिशील प्रीमियम उसी वित्तीय वर्ष के मार्च माह से उसके वेतन से की जावेगी।
- नियम-11 के उप नियम (2) के अनुसार एक बीमित व्यक्ति अपने विकल्प पर, नियम 11 के उप नियम 1 (i) के तहत उस पर लागू प्रीमियम दर के ऊपर अगले दो स्लैब में से किसी एक का प्रीमियम योगदान कर सकता है
- नियम-11 के उप नियम (3) के अनुसार बीमाकृत व्यक्ति के 55 वर्ष की आयु पूरी कर लेने के पश्चात् नियम-11(1) और (2) के अधीन कोई अतिरिक्त कटौती नहीं की जायेगी। वित्त विभाग के आदेश दिनांक 02.03. 2009 द्वारा 50 वर्ष को 55 वर्ष में प्रतिस्थापित कर दिया गया है
- नियम-11 के उप नियम (4) के अनुसार नियम-11 (i)(ii) में यथा-विनिर्दिष्ट वृद्धिशील प्रीमियमों पर और नियम 11(2) में यथा विनिर्दिष्ट दर पर अतिरिक्त प्रीमियम के संदाय पर अतिरिक्त जौखिम बीमा स्वास्थ्य परीक्षा के बिना किया जायेगा। नियम-11 (2) के अधीन प्रत्येक अतिरिक्त बीमा प्रारूप सं.1 में यह अतिरिक्त घोषणा करने के अध्यधीन होगा कि पाॅलिसी धारक नियम 8(3) में उल्लेखित किन्हीं भी रोगों से ग्रसित नहीं था।
- नियम-(12) (1) के अनुसार नियम 43 में उपबंधित के सिवाय, विभाग द्वारा किए गए सभी बीमाओं का प्रीमियम मासिक देय होगा और बीमाधारक के वेतन से प्रतिमाह कटौती करके वसूल किया जाएगा। यदि बीमाधारक के संबंध में अपेक्षित प्रीमियम का भुगतान नहीं किया गया है, तो विभाग किसी भी वेतन बिल का भुगतान रोकने का हकदार होगा।
- नियम-13 के अनुसार वेतन स्लैब कम हो जाने पर प्रीमियम कम करने का विकल्प नहीं होगा
- नियम-14(1) के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी प्रथम प्रीमियम की वसूली के समय प्रथम घोषणा पत्र (GA165) प्रस्तुत करेगा
- नियम-15 के अनुसार प्रत्येक बीमाधारक को उसके आहरण व वितरण अधिकारी द्वारा एक बीमा रिकार्ड बुक जारी की जाएगी, जिसमें निर्धारित विवरण डीडीओ और बीमा विभाग द्वारा, जैसा भी मामला हो, सत्यापित किया जाएगा।
- नियम-16 के अनुसार घोषणा पत्र दाखिल करते समय किसी चिकित्सा परीक्षण की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि जिन कर्मचारियों पर ये नियम लागू होते हैं, उन्हें उचित चिकित्सा परीक्षण के बाद ही सेवा में नियुक्त किया जाता है।
- नियम-17 (1) के अनुसार प्रथम प्रीमियम की कटौति और पूरे भरे गये प्रारूप 1 प्राप्त होने के 60 दिन के भीतर-भीतर निदेशक विहित प्रारूप में अपने हस्ताक्षर करके एक पाॅलिसी जारी करेगा।
- नियम 18(1) के अनुसार बीमा के अंतर्गत प्रीमियम, बीमित व्यक्ति की मृत्यु तक या पहली कटौती के समय लागू पॉलिसी परिपक्वता तिथि से ठीक पहले वाले फरवरी माह तक प्रतिमाह देय होगा।
- नियम 18(2) के अनुसार ऐसे बीमित व्यक्ति के मामले में, जिसने नियम 39(2) में दिए गए विकल्प का प्रयोग किया है, प्रीमियम, परिपक्वता की विस्तारित तिथि से ठीक पहले वाले फरवरी माह तक देय होगा। ऐसा प्रीमियम, बीमित व्यक्ति की सेवानिवृत्ति तक उसके वेतन से और संचित अप्रदत्त प्रीमियम, बिना ब्याज के दावे की राशि से वसूल किया जा सकेगा।
- नियम 18(3) के अनुसार सभी बीमाओं के अंतर्गत प्रीमियम, बीमित व्यक्ति की मृत्यु तक या पहली बीमा अनुबंध पॉलिसी की परिपक्वता तिथि से तीन माह पहले तक प्रतिमाह देय होगा। शेष वसूली योग्य प्रीमियम, बिना ब्याज के बीमित राशि से वसूल किया जाएगा।
- नियम 20 (1) के अनुसार निदेशक, पाॅलिसी की परिपक्वता की तारीख से तीन मास पूर्व एक नोटिस बीमाकृत व्यक्ति को, पाॅलिसी के साथ दावा पेश करने के लिए जारी करेगा।
- नियम 20 (2) के अनुसार बीमाकृत व्यक्ति उस मास में, जिसमें प्रीमियम की वसूली बन्द होनी है, किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा सम्यक रूप से सत्यापित दावा प्रारूप अपने आहरण व वितरण अधिकारी के माध्यम से या सीधे विभाग को पाॅलिसी के साथ प्रस्तुत करेगा।
- नियम 21 के अनुसार विभाग दावे की रकम का भुगतान देय होने की तारीख से दो मास के भीतर-भीतर ऐसे भुगतान प्राधिकरण या चैक द्वारा करेगा, जो जारी किये जाने की तारीख से तीन मास के भीतर भीतर संदेय हो।
- नियम 24 के अनुसार प्रत्येक बीमा या अतिरिक्त बीमा उस मास में जिसमें से मासिक प्रीमियम की कटौती की गयी है, के ठीक बाद वाले मास के प्रथम दिन से प्रारम्भ हुआ समझा जायेगा।
- नियम-26 के अनुसार जब कोई बीमाकृत व्यक्ति, बिना वेतन के छुट्टी के सिवाय छुट्टी पर रहता है, तो प्रीमियम तब वसूल किया जायेगा जब वेतन का आहरण किया जाये। इस कालावधि के दौरान् पाॅलिसी अस्तित्व में रहेगी।
- नियम-26 के अनुसार जब किसी बीमाकृत व्यक्ति को निलम्बित कर दिया जाये तो प्रीमियम का उसके निर्वाह भत्ते से वसूल किया जाना जारी रखा जावेगा। यदि उसके निलम्बन की कालावधि के दौरान् प्रीमियम की वसूली नहीं की जाती है तो वह उसके प्रीमियम देय होने की तारीख से जमा करने की तारीख तक 12 % प्रति वर्ष की दर पर साधारण ब्याज सहित पाॅलिसी पर ऋण के रूप में वसूलीय होगी। निलम्बन कालावधि के दौरान् पाॅलिसी अस्तित्व में समझी जायेगी।
- नियम-28 के अनुसार जब किसी बीमाकृत व्यक्ति को किसी भी कालावधि की बिना वेतन की छुट्टी मंजूर की जाये तो इस अवधि के दौरान ऐसे बीमाकृत व्यक्ति द्वारा संदत्त नहीं किया गया प्रीमियम 12 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर पर साधारण ब्याज सहित पाॅलिसी पर ऋण होगा और यदि अन्यथा संदत्त नहीं किये जाये तो उसके भावी वेतन में से वसूलीय होगा। इस अवधि के दौरान् पाॅलिसी अस्तित्व में रही समझी जायेगी।
- नियम-31 के अनुसार बीमाधारक किसी ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को नामांकित करने का हकदार होगा जिसे उसके जीवन पर दिए गए सभी बीमा अनुबंधों के तहत बीमा राशि का भुगतान उसकी मृत्यु की स्थिति में किया जाना चाहिए। ऐसा नामांकन फॉर्म नंबर 2 में दिए गए एक निर्धारित फॉर्म में होगा और बीमाधारक द्वारा अपने वरिष्ठ आधिकारी की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया जाएगा और निदेशक को भेजा जाएगा जो पुस्तकों में नामांकन दर्ज करेगा और रसीद की लिखित पावती भेजेगा। परन्तु बीमाधारक के विवाह से पहले किसी व्यक्ति के पक्ष में किया गया नामांकन और उसके बाद रद्द नहीं किया गया हो, उसकी शादी के बाद उसकी पत्नी/पति के पक्ष में स्वतः रूप से रद्द माना जाएगा।
- नियम-32 के अनुसार निम्न व्यक्तियों में से नामनिर्देशिती नियुक्त किया जा सकता है:-(1) अपने पति/पत्नी,संतान/संतोनों, भ्राता (भ्राताओं ), बहिन (बहिनों), पिता या माता या सोतेली-माता,पिता,भ्राता, बहिन या संतान(2) यदि नाम निर्देशन करते समय उपर(1) में उल्लेखित कोई भी संबंधी जीवित नहीं है तो किसी भी अन्य व्यक्ति का नाम निर्देशन अकृत और शून्य समझा जावेगा। तथापि, यदि पति/पत्नी के सवाय ऐसा कोई भी सबंध नाम निर्देशन फाईल करने के पश्चात् अर्जित किया गया है तो नाम निर्देशन अविधिमान्य नहीं होगा।
- नियम-33 के अनुसार एक बार नाम निर्देशन फाईल करने के उपरान्त बीमाकृत व्यक्ति उसे, प्रथम बार फाईल किये गये नाम निर्देशन का प्रतिस्थापन करते हुए दूसरा नाम निर्देशन फाईल करने के सिवाय, रद्द करने का हकदार नहीं होगा। बीमाकृत व्यक्ति को नाम निर्देशनों में परिर्वतान करते समय नियम-32 में अधिकथित शर्त का पालना करना होगा।
- नियम-34 के अनुसार पाॅलिसीधारक द्वारा अपने जीवन काल में किये गये किसी भी नये नाम निर्देशन या किसी भी अन्य व्यक्ति के पक्ष में पूर्व के नाम निर्देशन के परिवर्तन को बीमा विभाग द्वारा स्वीकार किया जायेगा, चाहे ऐसा नामनिर्देशन राज्य बीमा द्वारा पाॅलिसीधारक की मृत्यु के पश्चात प्राप्त किया जावे। ऐसे मामलों में, उस कार्यालयाध्यक्ष से, जिसके अधीन पाॅलिसीधारक उसकी मृत्यु से ठीक पहले सेवा कर रहा था, एक प्रमाण-पत्र अभिप्राप्त किया जायेगा, जिसमें यह कथन किया गया हो कि विभाग में नामनिर्देशन प्रारूप पाॅलिसीधारक की मृत्यु से पूर्व प्राप्त हो गया था और वह असली है।
- नियम-37 के अनुसार जहां बीमित व्यक्ति की मृत्यु के कारण बीमित राशि देय हो जाती है, वहां बीमित राशि नामिती को भुगतान की जाएगी। यदि एक से अधिक नामिती हैं, तो बीमित राशि उन्हें बीमित व्यक्ति द्वारा निर्दिष्ट अनुपात में अलग-अलग और यदि ऐसा कोई अनुपात निर्दिष्ट नहीं है, तो समान अनुपात में भुगतान की जाएगी।
- नियम-38 के अनुसार नामांकन के अभाव में, दावे की राशि बीमाधारक के कानूनी उत्तराधिकारियों को बीमाधारक पर लागू उत्तराधिकार/व्यक्तिगत कानून के अनुसार भुगतान की जाएगी। हालाँकि, यदि कोई विवाद हो और विभाग उत्तराधिकारियों का निर्णय लेने की स्थिति में न हो, तो दावा उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को देय होगा।नियम-39 (2) (i) के अनुसार बीमाकृत व्यक्ति को उसकी सेवानिवृति के ठीक पश्चात् आने वाले 31 मार्च तक बीमे को जारी रखने की अपनी इच्छा व्यक्त करने का विकल्प होगा। ऐसी स्थिति में बीमाकृत राशि, विस्तारित अवधि के बोनस सहित, उसकी सेवानिवृति के ठीक पश्चात् आने वाले प्रथम अप्रैल को संदेय होगी।
- नियम-39 (2) (ii) के अनुसार उपर्युक्त नियम 39 (2) (i) में उल्लिखित विकल्प का प्रयोग बीमाधारक द्वारा किया जाना चाहिए तथा उसे उसके आहरण एवं संवितरण अधिकारी द्वारा परिपक्वता की मूल तिथि से 15 दिन पूर्व भेजा जाना चाहिए।
- नियम-40 के अनुसार विभाग द्वारा जारी की गयी किसी भी पाॅलिसी के अधीन ऋण, प्रीमियम, ऋण ब्याज, प्रीमियम ऋण या परिपक्वता को तारीख के पश्चात् के प्रीमियम आदि के मद की संदत्त की जाने वाली किसी भी रकम की कटौती दावे की रकम में से करने का हकदार होगा।
- नियम-44 (1) के अनुसार बीमाकृत व्यक्ति, प्रारूप जी.ए. 203 में आवेदन प्रस्तुत करने पर, उसके द्वारा कराये गये बीमों की प्रत्याभूति पर, ऐसे बीमों के कुल अध्यर्पण (surrender) मूल्य के 90 प्रतिशत की सीमा तक ऋण प्राप्त करने का अधिकार होगा।
- नियम-44(2) के अनुसार ऋण की कटौती 36 समान मासिक किस्तों या कम किस्तों में की जाएगी कटौती ऋण मंजूरी के पश्चात प्रथम वेतन से की जाएगी वित्त विभाग के आदेश दिनांक 22/11/2007 द्वारा 36 को 60 से प्रतिस्थापित कर दिया गया है
- नियम-44(3) के अनुसार 12 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर पर साधारण ब्याज प्रभावित किया जावेगा जो ऋण की मूल रकम के पूर्ण प्रतिसंदाय के पश्चात् सवितरक अधिकारी द्वारा दस समान किस्तों में वूसल किया जायेगा। यदि ब्याज पूर्णतः या अंशतः इस प्रकार वसूल नहीं किया जाता है तो वसूल नहीं किया गया ब्याज, उसके बकाया रहने की अवधि के लिए 12 प्रतिशत साधारण ब्याज सहित दावे की रकम से या अगले ऋण की रकम से वसूल किया जायेगा।
- नियम-44(5) के अनुसार पाॅलिसी पर अगला ऋण तब तक मंजूर नहीं किया जावेगा, जब तक कि पिछले ऋण की मंजूरी और आवेदित ऋण के बीच दोे वर्ष की अवधि व्यतीत न हो गयी हो और ब्याज सहित ऋण पूर्णतः संदत्त न कर दिया गया हो
- नियम-44(6) के अनुसार कोई बीमाकृत व्यक्ति, जिसने नियम 39 (2) में यथा उपबंधित विकल्प दिया है, विस्तारित अवधि के दौरान् ऋण प्राप्त करने का हकदार नहीं होगा।
- नियम-45(1) के अनुसार जहाँ बीमाधारक अपनी बीमा राशि के भुगतान हेतु परिपक्व होने की तिथि से पहले सेवानिवृत्त हो जाता है और पॉलिसी जारी रखने का विकल्प चुनता है, वहाँ वह, यदि चाहे, तो उसे देय पेंशन से प्रीमियम की कटौती करवा सकता है।
- नियम-47 के अनुसार यदि इस बात का समाधान हो जाये कि पाॅलिसी धारक व्यक्ति ने पाॅलिसी खो दी है और उसने उसे खोजने के हर सम्भव प्रयत्न कर लिये हैं या वह नष्ट या विकृत हो गयी है या, यथास्थिति कट-फट गयी है तो उसके बदले में दूसरी पाॅलिसी जारी करेगा, बशर्ते कि पाॅलिसीधारकः-(क) क्षतिपूर्ति पत्र के साथ एक आवेदन निदेशक को प्रस्तुत करें, जिसमें यह लिखें कि उनको जारी की गयी पाॅलिसी खो गयी है या नष्ट हो गयी है।(ख) उसको जारी विकृत या कटी-फटी पाॅलिसी को निदेशक को लौटा दें।(ग) (क) की दशा में 100/- और (ख) कि दशा में 50/- की राशि बीमा विभाग को भेजे। यदि दूसरी पाॅलिसी जारी किये जाने के पश्चात् धारक व्यक्ति की मूल पाॅलिसी मिल जाये तो उसे विभाग को भिजवाया जायेगा।
- नियम-49 (1) के अनुसार बीमाधारक के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह ऋण के लिए आवेदन करते समय और दावे के निपटान के समय आवेदन के साथ पॉलिसी प्रस्तुत करे।नियम-49 (2) के अनुसार जब कभी ऋण के मामलों में निदेशक का यह समाधान हो जाए कि लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से बीमाधारक के लिए पॉलिसी प्रस्तुत करना संभव नहीं है, तो वह उसे ऐसे प्रस्तुतीकरण से छूट दे सकता है।
- नियम-51 के अनुसार बीमा पाॅलिसी धारक सेवा में बना रहते हुए बीमा परिपक्वता तिथि से पूर्व आकस्मिक या सामान्य मृत्यु होने पर राज्य सरकार द्वारा बीमाधन की दुगुनी राशि बोनस सहित भुगतान किया जाता है। चाहे कार्मिक की मृत्यु प्रथम माह का प्रिमियम अदा करने के बाद हो गई हो ।परन्तु उन बीमाकृत व्यक्तियों की मृत्यु की दशा में, जो सेवा में नही रह गये थे, किन्तु नियम 39(2) में अनुसार विस्तारित बीमे के लिए विकल्प दे चुके थे, उनके जीवन पर जारी किये गये बीमे की बीमाकृत राशि की दुगुनी राशि संदत्त की जायेगी।
- 7 वर्ष से लापता कर्मचारी को कोर्ट द्वारा मृत घोषित करने पर भी बीमित राशि का दुगुना भुगतान किया जाएगा
- नियम-52 के अनुसार प्रीमियम की लुप्त जमाओं का समायोजना बीमा अभिलेख पुस्तक, जी.ए. 55 ए या सरकार द्वारा समय समय पर विहित किसी भी अन्य प्रोफार्मा में सत्यापित प्रविष्टि के आधार पर किया जायेगा।
- वित्त विभाग की अधिसूचना क्रमांक F12(6) FD (रूल्स)/05 दिनांक 13.03.2006 के द्वारा राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतनमान) 2006 में दिनांक 20.01.2004 को या उसके पश्चात प्रशिक्षणार्थियों के स्थिर वेतन में से राज्य बीमा कटौती नहीं की जाने का प्रावधान है
मासिक प्रीमियम की दर माह मार्च देय अप्रैल 1998 | |||
क्र.सं. | वेतन | प्रीमियम | अधिकतम प्रीमियम |
1 | 2550 से 3700 तक | 150 | 300 |
2 | 3701 से 5000 तक | 200 | 450 |
3 | 5001 से 8000 तक | 300 | 600 |
4 | 8001 से 12000 तक | 450 | 800 |
5 | 12000 से अधिक | 600 | 800 |
6 | अधिकतम | 800 | 800 |
मासिक प्रीमियम की दर माह मार्च देय अप्रैल 1999 14/05/1999 | |||
क्र.सं. | वेतन | प्रीमियम | अधिकतम प्रीमियम |
1 | 2550 से 3700 तक | 150 | 400 |
2 | 3701 से 5000 तक | 200 | 600 |
3 | 5001 से 8000 तक | 400 | 1000 |
4 | 8001 से 12000 तक | 600 | 1300 |
5 | 12000 से अधिक | 1000 | 1300 |
6 | अधिकतम | 1300 | 1300 |
मासिक प्रीमियम की दर माह मार्च देय अप्रैल 2009 | |||
क्र.सं. | वेतन | प्रीमियम | अधिकतम प्रीमियम |
1 | 6050 से 8500 तक | 180 | 480 |
2 | 8501 से 11000 तक | 240 | 720 |
3 | 11001 से 18000 तक | 480 | 1200 |
4 | 18001 से 28000 तक | 720 | 1500 |
5 | 28000 से अधिक | 1200 | 1500 |
6 | अधिकतम | 1500 | 1500 |
मासिक प्रीमियम की दर माह मार्च देय अप्रैल 2010 | |||
क्र.सं. | वेतन | प्रीमियम | अधिकतम प्रीमियम |
1 | 6050 से 8500 तक | 330 | 900 |
2 | 8501 से 11000 तक | 450 | 1300 |
3 | 11001 से 18000 तक | 900 | 2200 |
4 | 18001 से 28000 तक | 1300 | 2500 |
5 | 28000 से अधिक | 2200 | 2500 |
6 | अधिकतम | 2500 | 2500 |
मासिक प्रीमियम की दर माह मार्च देय अप्रैल 2015 25/02/2015 | |||
क्र.सं. | वेतन | प्रीमियम | अधिकतम प्रीमियम |
1 | 6050 से 8500 तक | 400 | 1100 |
2 | 8501 से 11000 तक | 550 | 1550 |
3 | 11001 से 18000 तक | 1100 | 2650 |
4 | 18001 से 28000 तक | 1550 | 3000 |
5 | 28000 से अधिक | 2650 | 3000 |
6 | अधिकतम | 3000 | 3000 |
मासिक प्रीमियम की दर माह मार्च देय अप्रैल 2018 | |||
क्र.सं. | वेतन | प्रीमियम | अधिकतम प्रीमियम |
1 | 22000 तक | 500 | 1300 |
2 | 22001 से 28500 | 700 | 1800 |
3 | 28501 से 46500 | 1300 | 3000 |
4 | 46501 से 72000 | 1800 | 4000 |
5 | 72001 से अधिक | 3000 | 4000 |
6 | अधिकतम | 4000 | 4000 |
मासिक प्रीमियम की दर माह मार्च देय अप्रैल 2020 13.04.2020 | |||
क्र.सं. | वेतन | प्रीमियम | अधिकतम प्रीमियम |
1 | 22000 तक | 800 | 2200 |
2 | 22001 से 28500 | 1200 | 3000 |
3 | 28501 से 46500 | 2200 | 5000 |
4 | 46501 से 72000 | 3000 | 7000 |
5 | 72001 से अधिक | 5000 | 7000 |
6 | अधिकतम | 7000 | 7000 |
SI Loan Interest Rates
| Year | Rate of Interest |
|---|---|
| UP TO 18-Sep-1985 | 6.0% |
| 19-Sep-85 | 10.0% |
| 1-Apr-98 | 12.0% |
| 1-Apr-02 | 9.5% |
| 10-May-04 | 8.5% |
| 17-Apr-20 | 7.50% |
(देखिये नियम-31 तथा 34)
नामनिर्देशन का प्रारूप
मै ......................................................पुत्र/पुत्री/श्री ............................................जो राज्यबीमा, विभाग, राजस्थान पाॅलिसी संख्या ................................................ के अधीन बीमाकृत व्यक्ति हूॅं, इसके द्वाराः-
(1) पूर्व में मैरे द्वारा मेरे/मेरी ..........................................................................(नाम निर्दशिती से संबंध) श्री/श्रीमती ..................................................आयु ................वर्ष के पक्ष में किया गया नाम निर्देशन रद्द करता/करती हूॅ।
(2) मेरे/मेरी .............................................................. (नाम निर्देशिती से संबंध) श्री/श्रीमती.............................................. आयु................ वर्ष को अपना नाम निर्देशिती करता/करती हूॅ।
(3) श्री/श्रीमती ................................... जो..............................................(नाम निर्देशिती से संबंध) का नाम निर्देशिती के व्यस्क होने तक उसकाा अभिभावक नियुक्त करता/करती हूॅ।
मेरे समक्ष हस्ताक्षरित बीमाकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर
(उच्चाधिकारी के हस्ताक्षर तथा उसके पदनाम की मुहर) दिनांक........................
स्थानः-........................
राजस्थान सरकार के कर्मचारियों के लिए राज्य बीमा (SI) दावा ऑनलाइन submit कर्मचारी की SSO ID से लॉग इन करने के बाद SIPF(NEW) पोर्टल से होगा।
नामांकित दावों (Nominee claims) के लिए DDO की भागीदारी आवश्यक है।
➥ कर्मचारी अपने स्वयं की SSO ID से खाते में लॉग इन करें।
➥ SIPF Portal (New) एप्लिकेशन आइकन पर क्लिक करें।
➥ अपना ई-बैग अपडेट करें।
➥ SIPF डैशबोर्ड से, "SI" सेक्शन के लिए umbrella आइकन पर क्लिक करें।
➥ SI Transaction पर क्लिक करें।
➥ SI Claim पर क्लिक करें।
➥ Claim फ़ॉर्म भरें।
1. Claim फ़ॉर्म में, Type Of Claim में से दावे का प्रकार चुनें, जैसे Superannuation, Voluntary Retirement, or Compulsory Retirement.
➥ Maturity Date/Claim Date भरें
➥ Box में ✔ Mark करें
➥ "Next" बटन पर क्लिक करें।
2. Bank Detailsसत्यापित करें। आपके बैंक विवरण Pay Manager सिस्टम से स्वतः भर जाएँगे। ध्यान से जाँच लें कि वे सही हैं।
➥ Box में ✔ Mark करें
➥ "Next" बटन पर क्लिक करें।
3. Documents Upload करें
➥ BEEMA RECORD BOOK ➥ EMPLOYEE SI BOND ➥ ANNEXURE A (PLACE OF POSTING AND TIME PERIOD)
➥ OTP के साथ सबमिट करें।
➥ OTP दर्ज करें और सबमिट करें।
➥ आवेदन पत्र डाउनलोड करें।
मृत्यु दावों के लिए (DDO द्वारा प्रस्तुत)
यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु हो गई है, तो उसका नामित व्यक्ति कर्मचारी के लॉगिन का उपयोग नहीं कर सकता। उसका दावा आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) द्वारा दायर किया जाना चाहिए।
➥ DDO की SSO ID से खाते में लॉग इन करें।
➥ SIPF Portal (New) एप्लिकेशन आइकन पर क्लिक करें।
➥ DDO Switch Role Select करें
➥ SI Claim पर क्लिक करें।
➥ SI Death claim पर क्लिक करें।
➥ Claim फ़ॉर्म में, Type Of Claim में से दावे का प्रकार चुनें, जैसे Death, Maturaty Cum Death, Surrender Cum Death .
➥ Claim/Reclaim का चयन करें
➥ Employee ID भरें
➥ Search पर Click करें
(i) Employee Detail
(ii) Nominee Detail
➥ यदि Nominee Detail नहीं दिखाई देती है तो Employee की SSO ID से Family Members And Nominees को update करें या Add Femily Detail से Nominee जोड़ें
(iii) Claim Detail
Application Date, Date of Death, Cause of Death और Nominee का मोबाइल नंबर भरे
➥ सबमिट पर क्लिक करे
➥ Ok पर click करे
➥ Application प्रिंट हो जाएगी
सभी Document Employee की SSO ID से Upload करें
ऑनलाइन आवेदन जमा करने के बाद भी पॉलिसी बॉन्ड और रिकॉर्ड बुक जैसे दस्तावेज़ जिला कार्यालय में ऑफ़लाइन जमा करने होंगे।
Application की एक हार्ड कॉपी इस कार्यालय में निम्नाकिंत दस्तावेज संलग्न कर भिजवावें।
1. ऑन लाईन बीमा दावा प्रपत्र की हार्ड कॉपी।
2. मूल बीमा पॉलिसी एवं बीमा प्रारम्भ के माह से अंतिम कटौति तक की बीमा रेकार्ड बुक ।
3. सेवा काल में पदस्थापित स्थानों का विवरण मार्च 1983 से अंतिम कटौति तक
4. जी.ए.55 ए मार्च 2012 से अतिंम कटौती तक (ऑनलाईन पे मैनेजर से)
5. जिन कर्मचारियों की कटौतियां चालान से जमा करवाई गई है अथवा करवाई जा रही है उनकी प्रत्येक कटौतियों के चालान संख्या, दिनांक, चालान की कुल राशि, बैंक में जमा दिनांक का बीमा रेकॉर्ड बुक में अकिंत कर भिजवाए।
6. कैन्सिल चैक या बैंक पास बुक कि फॉटो प्रति।
7.यदि बीमेदार का स्थान्तरण (अन्य जिले में) स्वै.से.नि./ मृत्यु की स्थिती में इसकी सूचना भिजवाएं।
8. क्षतिपूर्ति बॉण्ड 10 रू नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर (डिडिओ से सत्यापित हो)
9. सेवाकाल में लिये गये बीमा ऋणों का विवरण।
12 टिप्पणियाँ
Agar Aap II Grade se I Grade me Promot Hue ho to II grade Joining date Se 20 sal Bad Apko ACP Milagi
2. ACP हमेशा प्रथम नियुक्ति तिथि से मिलती है तो पिछली सेवा काउन्ट हुई तो 14/09/2021 को ACP मिलेगी और यदि पिछली सेवा काउन्ट नहीं होती है तो 15/03/2015 को ACP लगेगी
3. दोनों ही परिस्थितियों में आपका परिवीक्षा काल दोबारा होगा