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5. उपभोक्ता अधिकार


बाजार में हमारी भागीदारी उत्पादक और उपभोक्ता दोनों रूपों में होती है । 
उपभोक्ता :- बाजार से अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए विभिन्न प्रकार की वस्तुओं या सेवाओं को खरीदने वाले लोग ।
उत्पादक :- दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुओं का निर्माण या उत्पादन करने वाले लोग । 
बाजार में भी उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए नियम एवं विनियमों की आवश्यकता होती है, क्योंकि अकेला उपभोक्ता प्रायः स्वयं को कमजोर स्थिति में पाता है। खरीदी गयी वस्तु या सेवा के बारे में जब भी कोई शिकायत होती है, तो विक्रेता सारा उत्तरदायित्व क्रेता पर डालने का प्रयास करता है। सामान्यतः उनकी प्रतिक्रिया होती हैः आपने जो खरीदा है अगर वह पसंद नहीं है तो कहीं और जाइए। मानो, बिक्री हो जाने के बाद विक्रेता की कोई जिम्मेदारी नहीं रह जाती। उपभोक्ता आंदोलन इस स्थिति को बदलने का एक प्रयास है। 
बाजार में शोषण कई रूपों में होता है। उदाहरणार्थ, कभी-कभी व्यापारी अनुचित व्यापार करने लग जाते हैं, जैसे दुकानदार उचित वजन से कम वजन तौलते हैं या व्यापारी उन शुल्कों को जोड़ देते हैं, जिनका वर्णन पहले न किया गया हो या मिलावटी/दोषपूर्ण वस्तुएँ बेची जाती हैं। 
उपभोक्ताओं के शोषण के कारण:- सीमित सूचना सीमित आपूर्ति, सीमित प्रतिस्पर्धा, साक्षरता कम होना  
भारत में उपभोक्ता आंदोलन 1960 के दशक में शुरु हुए थे। 1970 के दशक तक इस तरह के आंदोलन केवल अखबारों में लेख लिखने और प्रदर्शनी लगाने तक ही सीमित होते थे। लेकिन हाल के वर्षों में इस आंदोलन में गति आई है। 
लोग विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं से इतने अधिक असंतुष्ट हो गये थे कि उनके पास आंदोलन करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था। 
उपभोक्ताओं के अधिकार :- 
(i) सुरक्षा का अधिकार 
(ii) सूचना का अधिकार
(iii) चुनने का अधिकार 
(iv) क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार 
(v) उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार 
उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 : भारत सरकार द्वारा ने 1986 में कंज्यूमर प्रोटेक्शन ऐक्ट (कोपरा) को लागू किया। 
जब हम एक उपभोक्ता के रूप में बहुत-सी वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग करते हैं, तो हमें वस्तुओं के बाजारीकरण और सेवाओं की प्राप्ति के खिलाफ सुरक्षित रहने का अधिकार होता है, क्योंकि ये जीवन और संपत्ति के लिए खतरनाक होते हैं। उत्पादकों के लिए आवश्यक है कि वे सुरक्षा नियमों और विनियमों का पालन करें। ऐसी बहुत सी वस्तुएँ और सेवाएँ हैं, जिन्हें हम खरीदते हैं तो सुरक्षा की दृष्टि से खास सावधनी की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए, प्रेशर कुकर में एक सेफ्टी वॉल्व होता है, जो यदि खराब हो तो भयंकर दुर्घटना का कारण हो सकता है। सेफ्टी वॉल्व के निर्माता को इसकी उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करनी चाहिए। 
 कोपरा के अंतर्गत उपभोक्ता विवादों के निपटार के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर एक त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र स्थापित किया गया है। 
जिला स्तर का प्राधिकरण जिसे उपभोक्ता आयोग विवाद निवारण केन्द्र भी कहते हैं। 1 करोड़ तक के दावों से संबंधित मुकदमों पर विचार करता है, 
राज्य स्तरीय प्राधिकरण जिसे राज्य आयोग कहते हैं। 1 करोड़ से 10 करोड़ तक के दावों से संबंधित मुकदमों पर विचार करता है, 
राष्ट्रीय स्तर की प्राधिकरण राष्ट्रीय आयोग, 10 करोड़ से उपर की दावेदारी से संबंधित मुकदमों को देखती हैं । यदि कोई मुकदमा जिला स्तर के आयोग में खारिज कर दिया जाता है, तो उपभोक्ता राज्य स्तर के आयोग में और उसके बाद राष्ट्रीय स्तर के आयोग में भी अपील कर सकता है।
आर टी आई - सूचना का अधिकार :- सन् 2005 के अक्टूबर में भारत सरकार ने एक कानून लागू किया जो आर टी आई या सूचना पाने का अधिकार के नाम से जाना जाता है। जो अपने नागरिकों को सरकारी विभागों के कार्यकलापों की सभी सूचनाएं पाने का अधिकार सुनिश्चित करता है ।
उपभोक्ता जिन वस्तुओं और सेवाओं को खरीदता है, उसके बारे में उसे सूचना पाने का अधिकार है। तब उपभोक्ता वस्तु की किसी भी प्रकार की खराबी होने पर शिकायत कर सकता है, मुआवजे पाने या वस्तु बदलने की माँग कर सकता है।
यदि लोग अंतिम तिथि समाप्त हो गई दवाओं को बेचते हैं, तो उनके खिलापफ कार्यवाही की जा सकती है। इसी तरह से यदि, कोई व्यक्ति मुद्रित मूल्य से अधिक मूल्य पर वस्तु बेचता है तो कोई भीउसका विरोध् और शिकायत कर सकता है। यह अधिकतम खुदरा मूल्य के द्वारा इंगित किया हुआ होता है। वस्तुतः उपभोक्ता, विक्रेता से अधिकतम खुदरा मूल्य से कम दाम पर वस्तु देने के लिए मोल-भाव कर सकते हैं। 
चुनने का अधिकार : 
किसी भी उपभोक्ता को जो कि किसी सेवा को प्राप्त करता है, चाहे वह किसी भी आयु या लिंग का हो और किसी भी तरह की सेवा प्राप्त करता हो, उसको सेवा प्राप्त करते हुए हमेशा चुनने का अधिकार होगा। मान लीजिए, आप एक दंतमंजन खरीदना चाहते हैं और दुकानदार कहता है कि वह केवल दंतमंजन तभी बेचेगा, जब आप दंतमंजन के साथ एक ब्रश भी खरीदेंगे। अगर आप ब्रश खरीदने के इच्छुक नहीं हैं, तब आपके चुनने के अधिकार का उलंघन हुआ है। ठीक इसी तरह, कभी-कभी जब आप नया गैस कनेक्शन लेते हैं तो गैस डीलर उसके साथ एक चूल्हा भी लेने के लिए दबाव डालता है। 
क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार : उपभोक्ताओं को अनुचित सौदेबाजी और शोषण के विरूद्ध क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार है। यदि एक उपभोक्ता को कोई क्षति पहुँचाई जाती है, तो क्षति की मात्रा के आधर पर उसे क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार होता है। इस कार्य को पूरा करने के लिए एक आसान और प्रभावी जन-प्रणाली बनाने की आवश्यकता है। उपभोक्ता, स्वयं किसी वकील के साथ अथवा वकील की सेवा के बिना उपयुक्त उपभोक्ता केन्द्र के सम्मुख अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, ।
उपभोक्ता, एक व्यक्ति के रूप में या एक समूह के रूप में (जिसे क्लास एक्शन सूट कहा जाता है) शारीरिक रूप में अथवा इंटरनेट के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं और वीडियो कांफ्रेसिंग के द्वारा अपने मुकदमों की कार्यवाही करवा सकते हैं। 
भारत में उपभोक्ता आंदोलन ने विभिन्न संगठनों के निर्माण में पहल की है, जिन्हें सामान्यतया उपभोक्ता अदालत या उपभोक्ता संरक्षण परिषद् के नाम से जाना जाता है। ये उपभोक्ता आयोग विवाद निवारण का मार्गदर्शन करती हैं कि कैसे उपभोक्ता अदालत में मुकदमा दर्ज कराएँ। बहुत से अवसरों पर ये इन आयोगों में व्यक्ति विशेष का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। ये स्वयंसेवी संगठन जनता में जागरूकता पैदा करने के लिए सरकार से वित्तीय सहयोग भी प्राप्त करते हैं।
  1. उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम (COPRA) भारत सरकार द्वारा अधिनियमित किया गया था
    1986
  2. सूचना का अधिकार अधिनियम कब पारित किया गया था?
    अक्टूबर 2005 में
  3. वर्ष 2005 में भारत सरकार द्वारा निम्नलिखित में से कौन सा कानून लागू किया गया था?
    सूचना का अधिकार अधिनियम
  4. कोपरा का पूरा नाम क्या  है?
    उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम
  5. RTI का पूरा नाम लिखिए।
    राइट टू इनफॉरमेशन।
  6. भारत में उपभोक्ता दिवस कब मनाया जाता है
    भारत में उपभोक्ता दिवस 24 दिसम्बर को मनाया जाता है।
  7. उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 का दूसरा नाम क्या है? 
    उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 का दूसरा नाम COPRA है। 
  8. उस अधिनियम का नाम बताइए जिसके तहत उपभोक्ता न्यायालयों की स्थापना की गई है:
    उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम
  9. जिला स्तरीय उपभोक्ता अदालतें कितने रुपए तक के दावों का निपटारा कर सकती हैं?
    1 करोड़ तक
  10. राज्य  स्तरीय उपभोक्ता अदालतें कितने रुपए तक के दावों का निपटारा कर सकती हैं?
    1 करोड़ से 10 करोड़ तक
  11. राष्ट्रीय स्तरीय उपभोक्ता अदालतें कितने रुपए तक के दावों का निपटारा कर सकती हैं?
    10  करोड़ से अधिक  तक
  12. एक उत्पाद पर MRP का क्या अर्थ है-
    अधिकतम खुदरा मूल्य
  13. बिस्किट के पैकेट पर आपको कौन सा लोगो या चिह्न देखना होगा?
    एगमार्क
  14. दवाईयों के पैकेट पर उत्पादक द्वारा अंकित कोई दो जानकारियां लिखिए 
    अंतिम तिथि व अधिकतम खुदरा मूल्य
  15. उस अधिकार का नाम बताएं जिसके तहत उपभोक्ता किसी उत्पाद से हुए नुकसान के लिए मुआवजे का दावा कर सकता है।
    क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार 
  16. कंज्यूमर्स इंटरनेशनल की स्थापना किसने की थी:
    संयुक्त राष्ट्र
  17. वह संगठन जो उपभोक्ताओं को उपभोक्ता अदालतों में मामले दर्ज करने के बारे में मार्गदर्शन करने में मदद करता है, लोकप्रिय रूप से क्या कहलाते हैं?
    उपभोक्ता अदालत या उपभोक्ता संरक्षण परिषद्
  18. मान लीजिए आप टूथपेस्ट खरीदना चाहते हैं और दुकान मालिक कहता है कि वह टूथपेस्ट तभी बेच सकता है जब आप टूथब्रश खरीदें, तो दुकानदार आपके किस अधिकार का उल्लंघन कर रहा है?
    चुनने का अधिकार

  19. अंतिम वस्तुएं कौन सी होती है

    अंतिम वस्तु वे वस्तुएं होती हैं जिन्हें उपभोक्ता अपनी ज़रूरतों और इच्छाओं को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करते हैं.
  20. अंतर्राष्ट्रीय स्तर का उपभोक्ता संगठन कौन सा है?
    अंतर्राष्ट्रीय स्तर का उपभोक्ता संगठन कंज्यूमर इंटरनेशनल है। 
  21. उपभोक्ताओं के कोई दो अधिकार लिखिए।
    (1) सुरक्षा का अधिकार; 
    (2) सूचना का अधिकार।
  22. कोपरा क्या है?
    उपभोक्ता संरक्षण की दिशा में, भारत सरकार ने 1986 में एक बड़ा कदम उठाया और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को अधिनियमित किया, जिसे लोकप्रिय रूप से कोपरा के नाम से जाना जाता है ।
  23. गुणवत्ता आश्वासन के लिए प्रमाणपत्र क्या हैं?

    (i) आईएसआई मार्क
    (ii) एगमार्क
    (iii) हॉलमार्क
  24. बाजार में उपभोक्ता  शोषण के कोई तीन प्रकार/रूप  लिखिए 

    दुकानदार द्वारा उचित वजन से कम वजन तौलना
    व्यापारी द्वारा  उन शुल्कों को जोड़ देना  जिनका वर्णन पहले न किया गया हो  
    मिलावटी/दोषपूर्ण वस्तुएँ बेचना 
  25. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 में प्रदत्त किन्ही तीन अधिकारों का वर्णन कीजिए
    1. सुरक्षा का अधिकार
    2. सूचना प्राप्त करने का अधिकार
    3. चयन का अधिकार

4. वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

बहुराष्ट्रीय कम्पनी (MNCs) - 
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) वे होती हैं जो एक से अधिक देशों में उत्पादन का नियंत्रण रखती हैं। 
ये कंपनियाँ ऐसे स्थानों पर कारखाने और कार्यालय स्थापित करती हैं, जहाँ सस्ता श्रम और अन्य संसाधन आसानी से उपलब्ध हों, ताकि उत्पादन लागत को कम किया जा सके और अधिक लाभ कमाया जा सके।
उदाहरण : टाटा, सैमसंग, एप्पल
विश्व-भर के उत्पादन को एक-दूसरे से जोड़ना
1. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs): 
बहुराष्ट्रीय कम्पनियां अपने कारखाने उन क्षेत्रों में स्थापित करती हैं  -
जहां बाजार निकट हों
जहां सस्ता और कुशल श्रम उपलब्ध हों
जहाँ उत्पादन के अन्य आवश्यक कारकों की उपलब्धता।
सरकारी नीतियाँ जो उनके हितों का ध्यान रखें।
2. निवेश और विदेशी निवेश
किसी कंपनी द्वारा भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरण जैसी संपत्ति खरीदने के लिए खर्च किया जाने वाला पैसा निवेश कहलाता है 
बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किया जाने वाला निवेश विदेशी निवेश कहलाता है।
3. बहुराष्ट्रीय कंपनियों का उत्पादन पर प्रभाव
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) विभिन्न तरीकों से अपने उत्पादन का विस्तार करती हैं 
(अ) संयुक्त उत्पादन :  बहुराष्ट्रीय कम्पनियां स्थानीय कम्पनियों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से उत्पादन स्थापित करती हैं। जिससे स्थानीय कंपनी को दोहरा लाभ मिलता है।
(i) बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ स्थानीय कम्पनी को अतिरिक्त निवेश के लिए धन उपलब्ध कराती हैं।
(ii) बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ अपने साथ उत्पादन के लिए नवीनतम तकनीक लेकर आती हैं।
(ब) स्थानीय कंपनियों की खरीद: MNCs अक्सर स्थानीय कंपनियों को खरीदकर उत्पादन का विस्तार करती हैं। उदाहरण के तौर पर, कारगिल फूड्स ने भारत की परख फूड्स को खरीदा और अब यह भारत में खाद्य तेलों की सबसे बड़ी निर्माता बन गई है।
छोटे उत्पादकों को आदेश देना: विकसित देशों में बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियां छोटे उत्पादकों को उत्पादन का ऑर्डर देती हैं तथा उत्पादन पर नियंत्रण रखती हैं। छोटे उत्पादक बहुराष्ट्रीय कंपनियों को उत्पाद उपलब्ध कराते हैं, जिन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने ब्रांड नाम से ग्राहकों को बेचती हैं।
विदेश व्यापार और बाज़ारों का एकीकरण
विदेश व्यापार लंबे समय से देशों को आपस में जोड़ने का एक मुख्य माध्यम रहा है। यह उत्पादकों और उपभोक्ताओं को नए अवसर और विकल्प प्रदान करता है।
1. विदेश व्यापार का महत्व
घरेलू बाजार से बाहर पहुंच: उत्पादक अपने उत्पाद केवल अपने देश में ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के बाजारों में भी बेच सकते हैं।
वस्तुओं में से चुनने का विकल्प: दूसरे देशों से वस्तुओं के आयात से उपभोक्ताओं के पास घरेलू रूप से उत्पादित वस्तुओं के अलावा विभिन्न देशों में उत्पादित  वस्तुओं में से चुनने का विकल्प होता है।
2. व्यापार का प्रभाव
व्यापार के खुलने से वस्तुओं का आवागमन एक बाजार से दूसरे बाजार में आसान हो जाता है। 
जब दो बाजार आपस में जुड़ते हैं, तो एक ही वस्तु का मूल्य दोनों जगह लगभग समान हो जाता है, जिससे मूल्य स्थिरता बनती है। 
दो देशों के उत्पादक, भले ही दूर-दूर हों, एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है।
3. विदेश व्यापार और बाज़ारों का जुड़ाव
विदेश व्यापार के माध्यम से अलग-अलग देशों के बाजार आपस में जुड़ते हैं। इससे बाजारों का एकीकरण होता है, जहाँ उत्पादक और उपभोक्ता दोनों को अधिक अवसर और लाभ मिलता है।
वैश्वीकरण : वैश्वीकरण का अर्थ है अपने देश की अर्थव्यवस्था का विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण करना। 
वैश्वीकरण देशों के तेजी से एकीकरण या अंतर्संबंध की प्रक्रिया है। 
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वैश्वीकरण प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं ।
निवेश और विदेशी निवेश : किसी कंपनी द्वारा भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरणों जैसी परिसंपत्तियों को खरीदने के लिए खर्च किया जाने वाला धन निवेश कहलाता है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किया जाने वाला निवेश विदेशी निवेश कहलाता है।
वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कारक
वैश्वीकरण को बढ़ावा देने में सबसे बड़ा योगदान प्रौद्योगिकी में उन्नति का है। यह प्रौद्योगिकी की प्रगति ही है जिसने दुनिया को जोड़ने में मदद की है।
परिवहन प्रौद्योगिकी में सुधार: बीते 50 वर्षों में परिवहन के साधनों में काफी उन्नति हुई है, जिससे लंबी दूरी तक सामान को तेजी से और कम लागत में पहुंचाना आसान हो गया है।
सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का विकास: दूरसंचार, जैसे टेलीफोन, मोबाइल और फैक्स, ने दुनियाभर में संपर्क को आसान और तेज बना दिया है। संचार उपग्रहों की मदद से अब दूरस्थ इलाकों से भी संवाद संभव हो गया है।
इंटरनेट और कंप्यूटर का उपयोग: इंटरनेट ने दुनिया भर की सूचनाएँ एक जगह उपलब्ध कराई हैं, जबकि ई-मेल और वॉयस मेल जैसे माध्यमों ने लोगों को बेहद कम लागत पर तुरंत संपर्क करने की सुविधा दी है। साथ ही, कंप्यूटर ने लगभग हर क्षेत्र में क्रांति ला दी है।
विदेशी व्यापार और विदेशी निवेश नीति का उदारीकरण।
उदारीकरण: विदेशी व्यापार पर सरकार द्वारा लगाए गए अवरोधों या प्रतिबंधों को हटाना उदारीकरण कहलाता है। 
भारत में यह प्रक्रिया 1991 से शुरू हुई।
व्यापार अवरोधक : विदेशी व्यापार को बढ़ाने या घटाने के लिए सरकार द्वारा वस्तुओं के आयात और निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को व्यापार अवरोध कहा जाता है।
आयात पर कर व्यापार अवरोध का एक उदाहरण है। 
अगर सरकार आयातित वस्तुओं पर कर लगाती है, तो आयातित चीज़ें महंगी हो जाती हैं, जिससे घरेलू उत्पादकों को फायदा होता है 
विश्व व्यापार संगठन: 
विश्व व्यापार संगठन (WTO)
विश्व व्यापार संगठन (WTO) एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है
विश्व के लगभग 160 देश वर्तमान में विश्व व्यापार संगठन के सदस्य हैं।
विश्व व्यापार संगठन (WTO) का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है। 
विश्व व्यापार संगठन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के संबंध में नियम स्थापित करता है, तथा यह सुनिश्चित करता है कि इन नियमों का पालन हो।
यह देशों को विदेशी व्यापार और निवेश पर रोकटोक हटाने के लिए प्रेरित करता है।
व्यवहार में समस्याएँ: विकसित देश कई बार अपने व्यापार अवरोधकों को बरकरार रखते हैं, जबकि विकासशील देशों पर अपने व्यापार अवरोध हटाने का दबाव डाला जाता है। 
इसका एक उदाहरण कृषि उत्पादों के व्यापार पर वर्तमान बहस है
भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव:
वैश्वीकरण का सकारात्मक प्रभाव
शहरी इलाकों के संपन्न उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प और उत्कृष्ट गुणवत्ता के उत्पाद कम कीमत पर मिलने लगे हैं, जिससे उनका जीवन स्तर पहले से बेहतर हो गया है।
वैश्वीकरण के कारण MNCs ने भारत में अपना निवेश बढ़ाया है और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कच्चा माल आपूर्ति करने वाली स्थानीय कंपनियां समृद्ध हुई हैं।
MNCs ने शहरी क्षेत्रों में सेल फोन, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स, फास्ट फूड जैसे उद्योग स्थापित किए हैं। जिसके कारण नई नौकरियाँ पैदा हुई हैं।
वैश्वीकरण ने कुछ बड़ी भारतीय कंपनियों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रूप में उभरने में सक्षम बनाया है।
उदाहरण: टाटा मोटर्स (ऑटोमोबाइल), इंफोसिस (आईटी), रैनबैक्सी (दवाएँ), एशियन पेंट्स (पेंट), सुंदरम फास्टनर्स (नट और बोल्ट)
वैश्वीकरण ने विशेष रूप से आईटी क्षेत्र में सेवाएँ प्रदान करने वाली कंपनियों के लिए भी नए अवसर पैदा किए हैं।
वैश्वीकरण का नकारात्मक प्रभाव
(i) वैश्वीकरण ने छोटे उत्पादकों और श्रमिकों को प्रभावित किया है क्योंकि वे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ हैं।
(ii) छोटे निर्माता वैश्वीकरण के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं थे, इसलिए कई इकाइयां बंद हो गईं और कई श्रमिक बेरोजगार हो गए।
(iv) वैश्वीकरण और प्रतिस्पर्धा के दबाव के कारण श्रमिकों का रोजगार अनिश्चित हो गया है।
(v) श्रम कानूनों में लचीलेपन के कारण श्रमिकों की स्थिति खराब हो गई है। और 
श्रमिकों की नौकरी में अस्थिरता पैदा हुई है।
विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) : भारत में केंद्र और राज्य सरकारें विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए आकर्षित करने के लिए औद्योगिक क्षेत्र स्थापित कर रही हैं, जिन्हें विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) कहा जाता है।
SEZ में बिजली, पानी, सड़क, परिवहन, भंडारण, मनोरंजन और शैक्षिक सुविधाओं जैसी विश्व स्तरीय सुविधाएँ हैं।
SEZ में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने वाली कंपनियों को पाँच साल की शुरुआती अवधि के लिए करों का भुगतान नहीं करना पड़ता है।
सरकार ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए श्रम कानूनों में लचीलापन भी दिया है।
कंपनियां नियमित आधार पर कर्मचारियों को काम पर रखने के बजाय, काम के अत्यधिक दबाव के समय कम अवधि के लिए कर्मचारियों को काम पर रखती हैं।

न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष
वैश्वीकरण से सभी को लाभ नहीं हुआ है। वैश्वीकरण से शिक्षित, कुशल और धनी लोगों को लाभ हुआ है जबकि कई लोग इससे वंचित रहे हैं।
न्यायसंगत वैश्वीकरण में सरकार की भूमिका
सरकार को ऐसी नीतियाँ बनानी चाहिए जो सभी वर्गों के हितों की रक्षा करें, न कि केवल धनी और प्रभावशाली लोगों के। 
श्रमिकों के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए श्रम कानूनों का सही तरीके से पालन होना चाहिए। 
छोटे उत्पादकों को प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाने के लिए आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण जैसी मदद दी जानी चाहिए। 
आवश्यकता पड़ने पर सरकार व्यापार और निवेश पर रोक लगा सकती है और न्यायसंगत नियम सुनिश्चित करने के लिए विश्व व्यापार संगठन के साथ समझौते कर सकती है।
  1. बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को ..........................................कहा जाता है।
  2. एक साथ बहुत सारे देशों में व्यवसाय करने वाली कम्पनियां .....................................कहलाती हैं
  3. विदेशी निवेश वह निवेश है, जो कि.................................. के द्वारा किया जाता है।
  4. वैश्वीकरण को सक्षम करने वाले मूल कारक .......................है  
  5. आयात पर कर .......... का एक उदाहरण है।
  6. ...................................... आकर्षित करने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) स्थापित किए जा रहे हैं
  7. ........................(अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी) भारत में खाद्य तेल की  सबसे बड़ा उत्पादक कम्पनी है,  
  1. वर्तमान में विश्व के लगभग  कितने देश विश्व व्यापार संगठन के सदस्य हैं।
    विश्व के लगभग 160 देश वर्तमान में विश्व व्यापार संगठन के सदस्य हैं।
  2. कारगिल फूड्स (अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी) भारत में किसका उत्पादन करती है,
    खाद्य तेल का
  3. किस भारतीय कंपनी को एक बहुराष्टीय कंपनी 'कारगिल फूड्स' ने खरीद लिया है ? 
     परख फूड्स
  4. उस भारतीय कंपनी का नाम बताएँ जिसने फोर्ड मोटर्स के साथ भारतीय मोटरगाड़ी उद्योग में साझेदारी की है ? 
    महिंद्रा एण्ड महिंद्रा
  5. फोर्ड मोटर्स ने भारत में अपना पहला संयंत्र कहाँ स्थापित किया?
     चेन्नई
  6. वैश्वीकरण को सक्षम करने वाले मूल कारक का नाम बताइए।
    प्रौद्योगिकी
  7. MNC का पूरा नाम लिखिए
    बहुराष्ट्रीय कंपनी
  8. रैनबैक्सी कम्पनी क्या उत्पादन करती है?
    दवाईयां 
  9. सरकार द्वारा निर्धारित बाधाओं या प्रतिबंधों को हटाना क्या  कहलाता है:
     उदारीकरण
  10. 'व्यापार अवरोध' का कोई एक उदाहरण बताएँ। 
    आयात पर कर
  11. विश्व व्यापार संगठन के गठन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
    WTO के गठन का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है। 
  12. वैश्वीकरण का अर्थ बताइए?
    वैश्वीकरण का अर्थ है अपने देश की अर्थव्यवस्था का विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण करना।वैश्वीकरण विभिन्न देशों के तेजी से एकीकरण या अंतर्संबंध की प्रक्रिया को 
    वैश्वीकरण कहते है। 
  13. उदारीकरण से क्या अभिप्राय  है? 
    विदेशी व्यापार पर सरकार द्वारा लगाए गए अवरोधों या प्रतिबंधों को हटाना उदारीकरण कहलाता है।
  14. आयात शुल्क क्या है
    आयात शुल्क
    किसी देश में विदेश से आने वाली वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कर है.
  15. किसी भी दो बड़ी भारतीय कंपनियों के नाम बताइए जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रूप में उभरी हैं
    1. टाटा मोटर्स    2. एशियन पेंट्स
  16.  MNCs अपने कार्यालय और कारखाने उन क्षेत्रों में क्यों स्थापित करते हैं जहाँ उन्हें सस्ते श्रम और अन्य संसाधन मिलते हैं? 
    अपनी उत्पादन लागत को कम करके अधिकतम लाभ कमाने के लिए ।
  17.  ‘बहुराष्ट्रीय कंपनियों’ के साथ सहयोग करके ‘स्थानीय कंपनियों’ को कैसे लाभ होता है? 
    (i) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ स्थानीय कंपनी को अतिरिक्त निवेश के लिए धन उपलब्ध कराती हैं,
    (ii) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अपने साथ उत्पादन के लिए नवीनतम तकनीक लाती हैं।
  18. बहुराष्ट्रीय कम्पनी किसे कहते है?
    एक कंपनी जो एक से अधिक देशों में उत्पादन का स्वामित्व या नियंत्रण रखती है उसे बहुराष्ट्रीय कम्पनी (MNC) कहा जाता है उदाहरण: टाटा, सैमसंग, एप्पल
  19. भारत में केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र क्यों स्थापित किए जा रहे हैं?
    भारत में विदेशी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करने के लिए 
  20. व्यापार अवरोध का क्या अर्थ है?
    विदेशी व्यापार को बढ़ाने या घटाने के लिए सरकार द्वारा वस्तुओं के आयात और निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को व्यापार अवरोध कहा जाता है।
  21. निवेश का क्या अर्थ है?
    किसी कंपनी द्वारा भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरण जैसी संपत्ति खरीदने के लिए खर्च किया जाने वाला धन निवेश कहलाता है।
  22. बहुराष्ट्रीय निगमों और घरेलू कंपनियों के बीच अंतर करें।
    एमएनसी एक ऐसी कंपनी है जो एक से अधिक देशों में उत्पादन का स्वामित्व या नियंत्रण करती है, जबकि एक घरेलू कंपनी देश के भीतर उत्पादन का स्वामित्व और नियंत्रण करती है।
  23. निवेश और विदेशी निवेश में अंतर बताइए?
    किसी कंपनी द्वारा भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरण जैसी संपत्ति खरीदने के लिए खर्च किया जाने वाला पैसा निवेश कहलाता है जबकि बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किया जाने वाला निवेश विदेशी निवेश कहलाता है।
  24. बहुराष्ट्रीय कंपनियों अपनी उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने के लिए किन बातों का ध्यान रखती है ।
    (i) श्रम: उद्योगों के लिए सस्ते और कुशल श्रम की सहज उपलब्धता होनी चाहिए। इससे उत्पादन की लागत कम करने और लाभ को अधिकतम करने में मदद मिलेगी।
    (ii) बाजार: बाजार उत्पादन इकाइयों के करीब होना चाहिए ताकि परिवहन लागत पर कम खर्च हो।
    (iii) सरकारी नीतियाँ: उस विशेष देश की सरकारी नीतियाँ कंपनी के पक्ष में होनी चाहिए।
  25. बहुराष्ट्रीय कंपनियों  के तीन लाभों का आकलन करें
    (i) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अतिरिक्त निवेश के लिए धन उपलब्ध कराती हैं और अपने साथ उत्पादन के लिए नवीनतम तकनीक लाती हैं।
    (ii) बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने बेहतर गुणवत्ता और कम कीमत के सामान उपलब्ध कराए हैं।
    (iii) बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा नई नौकरियाँ पैदा की गई हैं।
    (iv) लोग बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कारण जीवन स्तर और सुविधाओं का उच्च स्तर है।
  26. छोटे उत्पादकों और श्रमिकों के लिए वैश्वीकरण द्वारा उत्पन्न समस्याओं का वर्णन करें।
    (i) वैश्वीकरण ने छोटे उत्पादकों और श्रमिकों को प्रभावित किया है क्योंकि वे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ हैं।
    (ii) विभिन्न मॉल निर्माता वैश्वीकरण के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं थे।
    (iii) कई इकाइयाँ बंद हो गईं और कई श्रमिक बेरोजगार हो गए।
    (iv) बैटरी, कैपेसिटर, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी उत्पाद और वनस्पति तेल उद्योग जैसे स्थानीय निर्माताओं को प्रतिस्पर्धा के कारण भारी नुकसान हुआ है।
    (v) श्रम कानूनों में लचीलेपन के कारण श्रमिकों की स्थिति खराब हो गई है।
  27. भारत में वैश्वीकरण को सुविधाजनक बनाने वाले कारक लिखिए ।
    (i) प्रौद्योगिकी ।
    (ii) परिवहन प्रौद्योगिकी ।
    (iii) सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ।
    (iv) 
    इंटरनेट और कंप्यूटर का उपयोग
  28.  वैश्वीकरण की प्रक्रिया को बढ़ावा देने में प्रौद्योगिकी के योगदान का वर्णन करें
    परिवहन प्रौद्योगिकी में सुधार ने कम लागत पर लंबी दूरी तक माल की डिलीवरी को तेज कर दिया है।
    सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के विकास ने सूचना को तुरंत सुलभ बना दिया है।
    दूरसंचार सुविधाओं का उपयोग दुनिया भर में एक-दूसरे से संपर्क करने, तुरंत सूचना प्राप्त करने और दूरदराज के क्षेत्रों से संवाद करने के लिए किया जाता है। उपग्रह संचार उपकरणों द्वारा इसे सुगम बनाया गया है।
    इंटरनेट हमें नगण्य लागत पर दुनिया भर में तत्काल इलेक्ट्रॉनिक मेल (ई-मेल) भेजने और बात करने (वॉयस-मेल) की भी अनुमति देता है।

3. मुद्रा और साख

विमुद्रीकरण: भारत में 8 नवंबर 2016 को 500 और 1,000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित कर दिया गया था। लोगों से कहा गया था कि वे एक निश्चित अवधि तक इन नोटों को बैंक में जमा कर दें और 500, 2,000 या अन्य नए नोट प्राप्त करें। इसे 'विमुद्रीकरण' के रूप में जाना जाता है। 
डिजिटल लेन-देन:  इंटरनेट या मोबाइल फोन, चेक, एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड और पॉइंट ऑफ़ सेल (POS) स्वाइप मशीन के माध्यम से किए गए लेन-देन को डिजिटल लेन-देन कहा जाता है। 
आवश्यकताओं का दोहरा संयोग :  यह वस्तु विनिमय प्रणाली में एक ऐसी स्थिति को संदर्भित करता है जिसमें दोनों पक्ष (विक्रेता और खरीदार) एक-दूसरे की वस्तुओं को खरीदने और बेचने के लिए सहमत होते हैं। आवश्यकताओं का दोहरा संयोग वस्तु विनिमय प्रणाली की मुख्य कठिनाई है। मुद्रा आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की आवश्यकता को समाप्त कर देती है। 
वस्तु विनिमय प्रणाली: वह प्रणाली जिसमें मुद्रा के उपयोग के बिना वस्तुओं का सीधे आदान-प्रदान किया जाता है, वस्तु विनिमय प्रणाली कहलाती है।
मुद्रा : कोई भी वस्तु जिसे विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकार किया जाता है, उसे मुद्रा कहते हैं।
लेन-देन में मुद्रा लाभदायक होती है क्योंकि मुद्रा इच्छाओं के दोहरे संयोग की आवश्यकता को समाप्त कर देती है।
मुद्रा विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थ के रूप में कार्य करती है, इसलिए इसे विनिमय का माध्यम कहते हैं।
मुद्रा रखने वाला व्यक्ति इसे अपनी इच्छानुसार किसी भी वस्तु या सेवा के साथ आसानी से विनिमय कर सकता है।
मुद्रा लेन-देन प्रणाली वस्तु विनिमय प्रणाली से कहीं बेहतर है।
पुरानी मुद्रा - सोने, चांदी और तांबे के सिक्के जैसे धातु के सिक्के।
मुद्रा के आधुनिक रूप : कागज़ के नोट और सिक्के आधुनिक मुद्रा के दो रूप हैं
आधुनिक मुद्रा का अपना कोई उपयोग नहीं है। इसे विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकार किया जाता है क्योंकि मुद्रा देश की सरकार द्वारा अधिकृत होती है।
भारत में, भारतीय रिजर्व बैंक केंद्र सरकार की ओर से करेंसी नोट जारी करता है।
भारतीय कानून के अनुसार, किसी अन्य व्यक्ति या संगठन को करेंसी जारी करने की अनुमति नहीं है।
कानून रुपये को भुगतान के माध्यम के रूप में उपयोग करने को वैध बनाता है जिसे भारत में लेन-देन निपटाने में अस्वीकार नहीं किया जा सकता है।
आरबीआई: यह भारत का केंद्रीय बैंक है जो हमारे देश की मौद्रिक नीति को नियंत्रित करता है।
आरबीआई केंद्र सरकार की ओर से करेंसी नोट जारी करता है।
यह भारत के सभी वाणिज्यिक बैंकों को नियंत्रित और पर्यवेक्षण भी करता है।
आरबीआई नकदी संतुलन बनाए रखने में बैंकों की निगरानी करता है।
आरबीआई बैंकों के ऋण वितरण और ब्याज दर की निगरानी करता है।
भारतीय रिजर्व बैंक ऋण के औपचारिक स्रोतों के कामकाज की निगरानी करता है।
बैंकों :  लोग बैंकों में अतिरिक्त नकदी जमा करते हैं। बैंक जमा राशि स्वीकार करते हैं और जमा राशि पर ब्याज के रूप में एक राशि भी देते हैं।
बैंकों में पैसा जमा करने के फायदे
घर की तुलना में यह पैसे रखने के लिए सबसे सुरक्षित जगह है।
लोग जमा किए गए पैसे पर ब्याज कमा सकते हैं।
लोग जब चाहें पैसे निकाल सकते हैं।
लोग चेक के ज़रिए भी भुगतान कर सकते हैं
मांग जमा  :  बैंक खातों में जमा राशि को मांग पर निकाला जा सकता है, इसलिए इस जमा राशि को  मांग जमा कहते हैं।
मांग जमा से नकदी के इस्तेमाल के बिना सीधे भुगतान करना संभव हो जाता है।
मांग जमा  चेक के ज़रिए भुगतान की एक और सुविधा प्रदान करता है।
चेक: चेक एक ऐसा कागज़ होता है, जिस पर बैंक को किसी व्यक्ति के खाते से एक निश्चित राशि उस व्यक्ति को देने का निर्देश होता है, जिसके नाम पर चेक जारी किया गया है।
चेक पैसे का एक आधुनिक रूप है।
चेक सुविधा से नकदी के इस्तेमाल के बिना सीधे भुगतान संभव हो जाता है।
बैंकों की ऋण गतिविधियाँ
बैंक अपनी जमा राशि का केवल एक छोटा हिस्सा (15%) नकद जमा के रूप में रखते हैं। यह उन जमाकर्ताओं को भुगतान करने के लिए रखा जाता है, जो किसी भी दिन बैंक से पैसे निकालने आ सकते हैं। चूंकि किसी भी खास दिन उसके कई जमाकर्ताओं में से कुछ ही नकदी निकालने आते हैं, इसलिए बैंक इस नकदी से काम चला लेता है।
बैंक जमा राशि के बड़े हिस्से का इस्तेमाल ऋण देने में करते हैं। इस तरह बैंक उन लोगों के बीच मध्यस्थता करते हैं जिनके पास अतिरिक्त धन है (जमाकर्ता) और जिन्हें इन निधियों की जरूरत है (उधारकर्ता)।
बैंक जमा राशि पर ब्याज की तुलना में ऋण पर उच्च ब्याज दर वसूलते हैं । इसलिए उधारकर्ताओं से लिए गए ब्याज और जमाकर्ताओं को दिए गए ब्याज के बीच का अंतर उनकी आय का मुख्य स्रोत है
ऋण:  ऋण ऋणदाता और उधारकर्ता के बीच एक समझौता है जिसमें ऋणदाता भविष्य में भुगतान के वादे के बदले में उधारकर्ता को धन देता है।
ऋण-जाल: ऋण उधारकर्ता को ऐसी स्थिति में धकेल देता है, जहां से उबरना बहुत मुश्किल होता है। इस स्थिति को ऋण जाल कहते हैं
ऋण की शर्तें
(i) निश्चित ब्याज दर: प्रत्येक ऋण समझौर्ते में ब्याज की दर निश्चित कर दी जार्ती है, जिसे उधारकर्ता को मूलधन के पुनर्भुगतान के साथ ऋणदाता को देना होता है । 
(ii) समर्थक ऋणाधार/संपार्श्विक : ऋणदाता ऋण के विरुद्ध समर्थक ऋणाधार की मांग कर सकते हैं। 
(iii) दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता। 
(iv) पुनर्भुगतान का तरीका। 
समर्थक ऋणाधार: समर्थक ऋणाधार ऐसी  संपत्ति है जिसका मालिक कर्जदार होता है और इसका उपयोग वह ऋणदाता को ऋण चुकाए जाने तक गारंटी रूप में करता है 
जैसे भूमि, भवन, वाहन, पशुधन, बैंकों में जमा
औपचारिक ऋण: RBI की प्रत्यक्ष निगरानी में संस्थानों द्वारा प्रदान किए गए ऋण को औपचारिक ऋण कहा जाता है। 
औपचारिक ऋणदाताओं में बैंकों और सहकारी समितियों से लिए गए ऋण शामिल हैं। 
भारतीय रिजर्व बैंक ऋण के औपचारिक स्रोतों के कामकाज की निगरानी करता है। RBI यह सुनिश्चित करता है कि बैंक न केवल लाभ कमाने वाले व्यवसायों और व्यापारियों को बल्कि छोटे किसानों, लघु उद्योगों और छोटे उधारकर्ताओं को भी ऋण दें। समय-समय पर बैंकों को आरबीआई को यह जानकारी देनी होती है कि वे कितना उधार दे रहे हैं, किसे, किस ब्याज दर पर आदि।
सहकारी समितियां ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते ऋण उपलब्ध कराती हैं जैसे किसान सहकारी समितियां, बुनकर सहकारी समितियां, औद्योगिक श्रमिक सहकारी समितियां आदि।
अनौपचारिक ऋण किसी व्यक्ति द्वारा बिना किसी निगरानी के दिया गया ऋण अनौपचारिक ऋण कहलाता है।
अनौपचारिक ऋणदाताओं में साहूकार, व्यापारी, नियोक्ता, रिश्तेदार और मित्र आदि शामिल हैं।
अनौपचारिक क्षेत्र में ऋणदाताओं की ऋण गतिविधियों की निगरानी करने वाला कोई संगठन नहीं है।
अपना पैसा वापस पाने के लिए अनुचित तरीकों का इस्तेमाल करने से उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।
वे अपनी पसंद की ब्याज दर पर ऋण देते हैं।
औपचारिक ऋणदाताओं की तुलना में अनौपचारिक ऋणदाता ऋण पर बहुत अधिक ब्याज लेते हैं। इस प्रकार उधार लेने की लागत बढ़ जाती है।
उच्च ब्याज दर (उधार लेने की उच्च लागत) के कारण उधारकर्ताओं की कमाई का एक बड़ा हिस्सा ऋण चुकाने में खर्च हो जाता है।
कई बार चुकाई जाने वाली राशि उधारकर्ता की आय से अधिक होती है। इससे ऋण और ऋण जाल बढ़ता है।
जो लोग उधार लेकर कोई व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, वे उधार लेने की उच्च लागत के कारण ऐसा नहीं कर पाते हैं।
गरीब परिवार अभी भी ऋण के अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर हैं क्योंकि: ग्रामीण भारत में हर जगह बैंक मौजूद नहीं हैं । 
बैंक से लोन लेना अनौपचारिक स्रोतों से लोन लेने से कहीं ज़्यादा मुश्किल है। बैंक लोन के लिए उचित दस्तावेज़ और जमानत की ज़रूरत होती है, जबकि अनौपचारिक ऋणदाता उधारकर्ता को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और इसलिए बिना जमानत के लोन देते हैं।
 
स्वयं सहायता समूह - स्वयं सहायता समूह ग्रामीण गरीबों (खासकर महिलाओं) का संगठन है जो अपने सदस्यों के बीच छोटी बचत को बढ़ावा देता है। 
स्वयं सहायता समूह ग्रामीण गरीबों की नींव हैं स्वयं सहायता समूह में 15-20 सदस्य होते हैं, जो आम तौर पर पड़ोसी होते हैं, वे नियमित रूप से मिलते हैं और बचत करते हैं। स्वयं सहायता समूह ग्रामीण गरीबों को उनकी बचत इकट्ठा करने में मदद करते हैं। 
स्वयं सहायता समूह अपने सदस्यों को उनकी ज़रूरतों के लिए उचित ब्याज दरों पर छोटे लोन देते हैं वे महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करते हैं एक या दो साल बाद, अगर समूह नियमित रूप से बचत करता है, तो वह बैंक से लोन लेने के योग्य हो जाता है। समूह के नाम पर लोन स्वीकृत किया जाता है और इसका उद्देश्य सदस्यों के लिए स्वरोज़गार के अवसर पैदा करना है। सदस्यों को गिरवी रखी गई ज़मीन को छुड़ाने, घर के सामान, सिलाई मशीन, हथकरघा, मवेशी आदि के लिए छोटे-छोटे ऋण दिए जाते हैं। बचत और ऋण गतिविधियों से जुड़े ज़्यादातर अहम फ़ैसले समूह के सदस्यों द्वारा लिए जाते हैं। ऋण की अदायगी के लिए भी स्वयं सहायता समूह ज़िम्मेदार होता है। किसी एक सदस्य द्वारा ऋण न चुकाने के मामले को समूह के दूसरे सदस्यों द्वारा गंभीरता से लिया जाता है। इस विशेषता के कारण, बैंक SHGS में संगठित होने पर गरीब महिलाओं को ऋण देने के लिए तैयार रहते हैं, भले ही उनके पास कोई ज़मानत न हो। इस प्रकार, SHG उधारकर्ताओं को ज़मानत की कमी की समस्या से उबरने में मदद करते हैं। समूह की नियमित बैठकें स्वास्थ्य, पोषण, घरेलू हिंसा आदि जैसे विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर चर्चा और कार्रवाई करने के लिए एक मंच प्रदान करती हैं। 

ग्रामीण बैंक ऑफ़ बांग्लादेश - 
ग्रामीण बैंक के संस्थापक और 2006 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक गरीबों को उचित दरों पर ऋण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है

  1. भारत में  500 और 1,000 रुपये के नोटों को कब अमान्य घोषित कर दिया गया
    8 नवंबर 2016 को 
  2. विनिमय का  माध्यम क्या है
    मुद्रा
  3. आधुनिक मुद्रा के दो रूप क्या हैं
    कागज़ी नोट और सिक्के।
  4. उधार देने का नवीनतम विकसित स्त्रोत कौन सा है ?
    स्व्यं सहायता समूह
  5. 2006 में शांति नोबल पुरस्कार विजेता बांग्लादेश ग्रामीण बैंक के संस्थापक का नाम लिखिए। 
    प्रो. मोहम्मद युनूस
  6. केन्द्र सरकार की ओर से करेंसी नोट कौन जारी करता है?
    भारतीय रिज़र्व बैंक।
  7. भारत में लेन-देन निपटाने के लिए भुगतान के माध्यम के रूप में रुपये के उपयोग को किसने वैध बनाया?
    भारतीय कानून।
  8. बैंक अपनी जमा राशि का कितने %  नकद जमा के रूप में रखते हैं?
    15%
  9. भारत में औपचारिक क्षेत्र के ऋणों का महत्व लिखिए । 
    कम ब्याज दर। 
  10. पुरानी मुद्रा का एक-एक उदाहरण दीजिए 
    सोने, चाँदी और तांबे के सिक्के जैसे धातु के सिक्के।
  11. ‘नकदरहित/डिजिटल लेन देन ’ के कोई दो माध्यम लिखिए?
    चेक, एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड और पॉइंट ऑफ़ सेल (POS) मशीन
  12. स्तु विनिमय प्रणाली की मुख्य कठिनाई क्या है?
    आवश्यकताओं का दोहरा संयोग 
  13. ऋण के औपचारिक क्षेत्र के कोई दो उदाहरण दें। 
    ऋण के दो औपचारिक क्षेत्र हैं: (i) बैंक (ii) सहकारी समितियाँ 
  14. ऋण के अनौपचारिक क्षेत्र के कोई दो उदाहरण दें। 
    ऋण के दो अनौपचारिक क्षेत्र हैं: (i) साहूकार (ii) व्यापारी 
  15. ऋण के औपचारिक स्रोतों के कामकाज की निगरानी कौन करता है?
    भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
  16. ‘भारतीय मुद्रा’ किस नाम से जानी जाती है?
    भारतीय मुद्रा को "रुपया" के नाम से जाना जाता है। 
  17. किन चीजों का उपयोग समर्थक ऋणाधार के रूप में किया जा सकता है? 
    भूमि, भवन, आभूषण, वाहन, पशुधन, बैंकों में जमा आदि। 
  18. अधिकांश गरीब परिवार ऋण के औपचारिक क्षेत्र से क्यों वंचित हैं। 
    समर्थक ऋणाधार की कमी के कारण 
  19. SHG का पूर्ण रूप क्या है? 
    स्वयं सहायता समूह।
  20. स्वयं सहायता समूहों (SHG) में बचत और ऋण गतिविधियों के बारे में निर्णय कौन लेता है? 
    सेल्फ-हेल्फ ग्रुप के सदस्य
  21. 'समर्थक ऋणाधार' का महत्व लिखिए 
    इसका उपयोग ऋणदाता को ऋण चुकाए जाने तक गारंटी के रूप में किया जाता है। 
  22. मुद्रा किसे कहते है ?
    कोई भी वस्तु जिसे विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकार किया जाता है, उसे मुद्रा कहते हैं।
  23. माँग जमा को मुद्रा क्यों माना जाता है?
    क्योंकि उन्हें मुद्रा के साथ-साथ भुगतान के साधन के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है।
  24. मुद्रा को विनिमय का माध्यम क्यों कहा जाता है?
    मुद्रा विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थ के रूप में कार्य करती है, इसलिए इसे विनिमय का माध्यम कहते हैं।
  25. विमुद्रीकरण क्या है ? 
    विमुद्रीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी मुद्रा इकाई को वैध मुद्रा के रूप में उसकी स्थिति से वंचित कर दिया जाता है। 
  26. वस्तु विनिमय प्रणाली क्या है?
    ऐसी प्रणाली जिसमें पैसे का उपयोग किए बिना वस्तुओं का सीधे आदान-प्रदान किया जाता है, उसे वस्तु विनिमय प्रणाली कहते हैं।
  27. आवश्यकताओं का दोहरा संयोग से क्या अभिप्राय है 
    यह वस्तु विनिमय प्रणाली में एक ऐसी स्थिति को संदर्भित करता है जिसमें दोनों पक्ष (विक्रेता और खरीदार) एक-दूसरे की वस्तुओं को खरीदने और बेचने के लिए सहमत होते हैं।
  28. मुद्रा के कार्य क्या हैं ? 
    मुद्रा विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य करती है।
    मुद्रा ने वस्तु विनिमय प्रणाली की समस्या को हल कर दिया है।
  29. आधुनिक मुद्रा बहुमूल्य धातु से नहीं बनी फिर भी इसे विनिमय का माध्यम क्यों स्वीकार किया गया है ?
    आधुनिक मुद्रा बहुमूल्य धातु से नहीं बनी फिर भी इसे विनिमय का माध्यम स्वीकार किया गया है क्योंकि किसी देश की सरकार इसे प्राधिकृत करती हैं।
  30. मांग जमा क्या है ?
    बैंक खातों में जमा राशि को मांग पर निकाला जा सकता है, इसलिए इस जमा राशि को  मांग जमा कहते हैं।
  31. बैंक चेक क्या है ?
    चेक एक ऐसा कागज़ होता है जिसमें बैंक को किसी व्यक्ति के खाते से उस व्यक्ति को एक निश्चित राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है जिसके नाम पर चेक जारी किया गया है।
  32. बैंकों की आय के मुख्य स्रोत क्या है ?
    बैंक जमा राशि पर ब्याज की तुलना में ऋण पर उच्च ब्याज दर वसूलते हैं । इसलिए उधारकर्ताओं से लिए गए ब्याज और जमाकर्ताओं को दिए गए ब्याज के बीच का अंतर उनकी आय का मुख्य स्रोत है
  33. औपचारिक ऋण क्या है ?
    औपचारिक प्रक्रियाओं को पूरा कर बैंकों या सहकारी समितियों से लिए गए ऋण को औपचारिक ऋण कहते हैं।
  34. अनौपचारिक ऋण क्या है ?
    साहूकारों, व्यापारियों, नियोक्ता, रिश्तेदारों और मित्रों आदि से लिए जाने वाले ऋण औपचारिक ऋण कहलाते हैं। 
  35. स्वयं सहायता समूह क्या हैं? 
    स्वयं सहायता समूह ग्रामीण गरीबों (विशेष रूप से महिलाओं) का संगठन है जो अपने सदस्यों के बीच छोटी बचत को बढ़ावा देते हैं।
  36. ऋण को परिभाषित कीजिए।
    ऋण ऋणदाता और उधारकर्ता के बीच एक समझौता है जिसमें ऋणदाता भविष्य में भुगतान के वादे के बदले में उधारकर्ता को धन देता है।
  37. ऋण की आवश्यक शर्तें लिखिए
    (i) निश्चित ब्याज दर : हर ऋण समझौते में एक ब्याज दर निर्दिष्ट होती है, जिसे कर्जदार को मूलधन के पुनर्भुगतान के साथ-साथ कर्जदाता को देना होता है।
    (ii) समर्थक ऋणाधार : कर्जदार ऋण के बदले समर्थक ऋणाधार (जैसे जमीन, इमारत, वाहन, पशुधन, बैंकों में जमा) की मांग कर सकता है। 
    (iii) दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता: जहां नियम और शर्तों का उल्लेख किया गया है, वहां दस्तावेज की आवश्यकता होती है।
    (iv) पुनर्भुगतान का तरीका : यह वह अवधि (मासिक किश्तें) है, जिसमें ऋण चुकाया जाना है। 
  38. वस्तु विनिमय प्रणाली की सीमाएँ/कठिनाईयां क्या हैं?
    आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव
    मूल्य के एक सामान्य माप का अभाव।
    मूल्य के भंडारण की समस्या।
    विभाज्यता का अभाव।
  39. भारतीय रिजर्व बैंक के किसी भी तीन कार्यों की व्याख्या करें।
    (i) RBI केंद्र सरकार की ओर से करेंसी नोट जारी करता है।
    (ii) यह ऋण के औपचारिक स्रोतों के कामकाज की निगरानी करता है।
    (iii) RBI नकदी संतुलन बनाए रखने के लिए बैंकों की निगरानी करता है।
    (iv) RBI हमारे देश की मौद्रिक नीति को नियंत्रित करता है।
  40. ऋण/उधार के औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों के बीच अंतर बताइए।
    (i) औपचारिक ऋण के स्रोत बैंक और सहकारी समितियाँ हैं, जबकि अनौपचारिक ऋण के स्रोत साहूकार, व्यापारी, नियोक्ता, रिश्तेदार, मित्र हैं।
    (ii) भारतीय रिजर्व बैंक ऋण के औपचारिक स्रोतों के कामकाज की निगरानी करता है, जबकि कोई भी संगठन अनौपचारिक क्षेत्र की निगरानी नहीं करता है।
    (iii) औपचारिक स्रोतों में अनौपचारिक क्षेत्र की तुलना में अधिक पारदर्शिता होती है
    (iv) औपचारिक स्रोत नाममात्र ब्याज दर लेते हैं, जबकि अनौपचारिक ऋणदाता ऋण पर बहुत अधिक ब्याज लेते हैं।
    (v) औपचारिक क्षेत्र में ऋण प्राप्त करने के लिए संपार्श्विक एक अनिवार्य शर्त है, जबकि अनौपचारिक क्षेत्र में यह आवश्यक नहीं है। 
  41.  स्वयं सहायता समूह के लाभ/महत्व/कार्य लिखिए 
    (i) SHG अपने सदस्यों को उनकी ज़रूरतों के लिए उचित ब्याज दरों पर छोटे ऋण प्रदान करते हैं। 
    (ii) SHG उधारकर्ताओं को संपार्श्विक की कमी की समस्या से उबरने में मदद करते हैं। 
    (iii) वे महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करते हैं
    (iv) स्वयं सहायता समूह विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक मंच भी प्रदान करते हैं।
    (v) स्वयं सहायता समूह ग्रामीण गरीबों को उनकी बचत एकत्र करने में मदद करते हैं। 
    (vi) स्वयं सहायता समूह गरीब परिवारों को आसानी से ऋण प्राप्त करने में मदद करते हैं और वे गरीबों को साहूकारों और जमींदारों के उत्पीड़न से बचाते हैं।
  42. ‘‘बैंक भारत की अर्थव्यवस्था/आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका कैसे निभाते हैं? समझाएँ।
    (i) बैंक जमा राशि पर ब्याज देते हैं। इस प्रकार, वे परिवार की आय में योगदान करते हैं।
    (ii) बैंक कम ब्याज दर पर ऋण देते हैं जिसका उपयोग विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए किया जाता है।
    (iii) बैंक बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देते हैं। इस प्रकार वे रोजगार की समस्याओं को कम करते हैं।
    (iv) बैंक देश के व्यापार की रीढ़ हैं।
    (v) बैंक ऋण प्रदान करके कृषि और औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देते हैं।
  43. ऋण कैसे भूमिका निभाता है सकारात्मक और नकारात्मक भूमिका उदाहरणों के साथ समझाएँ।
    ऋण की सकारात्मक भूमिका:
    ऋण तब सकारात्मक भूमिका निभाता है जब उधारकर्ता समय पर ऋण राशि वापस करने में सक्षम होता है
    ऋण उत्पादन की कार्यशील पूंजी की आवश्यकता को पूरा करने में मदद करता है।
    ऋण उत्पादन के चल रहे खर्चों को पूरा करने में मदद करता है।
    ऋण आय बढ़ाने में मदद करता है और इसलिए व्यक्ति पहले से बेहतर स्थिति में होता है।
    ऋण की नकारात्मक भूमिका:
    ऋण तब नकारात्मक भूमिका निभाता है जब उधारकर्ता ऋण चुकाने में सक्षम नहीं होता है।
    ग्रामीण क्षेत्रों में, ऋण की मुख्य मांग फसल उत्पादन के लिए होती है।
    कभी-कभी फसल खराब होने पर ऋण चुकाना असंभव हो जाता है।
    इस स्थिति में उधारकर्ता ऋण चुकाने में सक्षम नहीं होता है।
    ऋण चुकाने के लिए व्यक्ति को अपनी जमीन का एक हिस्सा बेचना पड़ता है।
    इस स्थिति में, उधारकर्ता की स्थिति पहले से बहुत खराब हो जाती है और वह कर्ज के जाल में फंस जाता है।
  44. आवश्यकता के दोहरे संयोग में अंतर्निहित समस्या को उजागर करें।
    चाहिए के दोहरे संयोग में अंतर्निहित समस्या यह है कि दोनों पक्षों (विक्रेता और खरीदार) को एक दूसरे की वस्तुओं को खरीदने और बेचने के लिए सहमत होना पड़ता है।।
  45. ऋण के औपचारिक स्रोतों के कामकाज की निगरानी क्यों आवश्यक है। 
    ऋण के औपचारिक स्रोतों के कामकाज की निगरानी यह जाँचने के लिए आवश्यक है कि बैंक कितना, किसे और किस ब्याज दर पर ऋण दे रहे हैं ।
  46. भारत में रुपये में किए गए भुगतान को कोई क्यों मना नहीं कर सकता? 
    भारत में रुपये में किए गए भुगतान को कोई मना नहीं कर सकता क्योंकि यह भारत सरकार द्वारा अधिकृत है और कानून रुपये को विनिमय के माध्यम के रूप में उपयोग करने को वैध बनाता है।
  47. लेन-देन में मुद्रा कैसे फायदेमंद है ?
    पैसा चाहत के दोहरे संयोग की आवश्यकता को समाप्त करता है।
    पैसा विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य करता है।
  48. मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बैंकों को बढ़ाना क्यों आवश्यक है?
    (i) ऋण के अनौपचारिक क्षेत्र पर निर्भरता को कम करने के लिए
    (ii) सस्ता ऋण उपलब्ध कराने के लिए।
    (iii) गरीबों के लिए ऋण की सुलभता प्रदान करने के लिए
  49. बैंकों में पैसा जमा करने के क्या लाभ हैं?
    घर की तुलना में यह पैसा रखने के लिए सबसे सुरक्षित स्थान है।
    लोग जमा किए गए पैसे पर ब्याज कमा सकते हैं।
    लोगों के पास जरूरत पड़ने पर पैसे निकालने का प्रावधान है।
    लोग चेक के जरिए भी भुगतान कर सकते हैं।
  50. मुद्रा विनिमय के माध्यम के रूप में कैसे कार्य करती है? 
    मुद्रा विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य करती है क्योंकि यह विनिमय प्रक्रिया और लेन-देन में मध्यस्थ के रूप में कार्य करती है। अगर हमारी जेब में पैसा है तो हम चीजें खरीद सकते हैं। नकद का उपयोग किए बिना भुगतान करने के तरीकों का कोई एक उदाहरण दें। मूवी टिकट बुक करने के लिए डेबिट कार्ड का उपयोग करना, या किराने की दुकान से ब्रेड और दूध खरीदने के लिए भुगतान ऐप के माध्यम से ऑनलाइन ट्रांसफर का उपयोग करना कैशलेस लेनदेन का एक उदाहरण है। 
  51. “बैंक विनिमय का कुशल माध्यम हैं।” तर्कों के साथ कथन का समर्थन करें।
    (i) बैंक खातों में जमा राशि को मांग पर डिमांड डिपॉजिट द्वारा निकाला जा सकता है।
    (ii) चेक सुविधा नकदी के उपयोग के बिना सीधे भुगतान को संभव बनाती है।
    (iii) डिमांड डिपॉजिट चेक के माध्यम से भुगतान की एक और सुविधा प्रदान करता है।
  52. गरीबों को बैंकों से ऋण प्राप्त करने से रोकने के लिए 'समर्थक ऋणाधार' एक मुख्य कारण क्यों है?
    (i) गरीबों के पास संपार्श्विक का अभाव।
    (ii) उनके पास दस्तावेजों का अभाव।
    (iii) ग्रामीण गरीबों की बचत नगण्य है।
    (iv) उनमें शिक्षा और जागरूकता की कमी है।
  53. ऋणदाता ऋण देते समय ‘'समर्थक ऋणाधार'’ क्यों मांगते हैं? कारणों का विश्लेषण करें।
    (i) यह ऋण के खिलाफ सुरक्षा के रूप में कार्य करता है।
    (ii) ऋणदाता ऋण चुकाए जाने तक ऋणदाता को गारंटी के रूप में उपयोग करते हैं।
    (iii) यदि उधारकर्ता ऋण चुकाने में विफल रहता है, तो ऋणदाता को भुगतान प्राप्त करने के लिए संपार्श्विक को बेचने का अधिकार है।
  54. आर्थिक विकास में ऋण के औपचारिक स्रोतों के महत्व का वर्णन करें:
    (i) औपचारिक स्रोत सस्ती दर पर ऋण प्रदान करते हैं।
    (ii) ऋण के औपचारिक स्रोतों को सरकार द्वारा विनियमित किया जाता है
    (iii) औपचारिक स्रोत से ऋण अनुकूल हैं।
  55. भारत में बैंकों की किन्हीं तीन ऋण गतिविधियों की व्याख्या करें।
    (i) बैंक ऋण देने के लिए जमाराशि के बड़े हिस्से का उपयोग करते हैं।
    (ii) बैंक उन लोगों के बीच मध्यस्थता करते हैं जिनके पास अधिशेष निधि है (जमाकर्ता) और जिन्हें इन निधियों की आवश्यकता है (उधारकर्ता)।
    (iii) बैंक जमाराशि पर दिए जाने वाले ब्याज दर की तुलना में ऋण पर अधिक ब्याज दर लेते हैं।
  56. ऐसी तीन स्थितियों की जाँच करें जिनमें ऋण उधारकर्ता को ऋण-जाल में धकेलता है।
    (i) अनौपचारिक स्रोत से लिया गया ऋण, ऋण जाल में ले जा सकता है।
    (ii) नियोजन की कमी के परिणामस्वरूप ऋण होता है।
    (iii) कुछ परिस्थितियों के कारण ऋण चुकाने में कठिनाई।
    (iv) उच्च ब्याज दर।
  57. चेक की उपयोगिता का वर्णन करें।
    (i) चेक में मुद्रा की विशेषताएँ होती हैं।
    (ii) वे नकदी के उपयोग के बिना भुगतान का निपटान करते हैं।
    (iii) वे भुगतान के साधन के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार किए जाते हैं।
    (iv) चेक लेन-देन में जोखिम को कम करते हैं।
    (v) यह निष्पक्ष और पारदर्शी लेन-देन का सबसे उपयुक्त माध्यम है।
  58. “अनौपचारिक क्षेत्र की ऋण गतिविधियों को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।” तर्कों के साथ कथन का समर्थन करें
    (i) अनौपचारिक ऋणदाता ऋण पर बहुत अधिक ब्याज लेते हैं। इस प्रकार उधार लेने की लागत बढ़ जाती है
    (ii) गरीब परिवारों को उधार लेने के लिए बड़ी राशि का भुगतान करना पड़ता है
    (iii) शहरी क्षेत्रों में गरीब परिवारों द्वारा लिए गए 85% ऋण अनौपचारिक स्रोतों से हैं।
  59. ऋण के औपचारिक स्रोतों पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निगरानी की आवश्यकता का कारण स्पष्ट कीजिए।
    (i) आरबीआई नकदी संतुलन बनाए रखने में बैंकों की निगरानी करता है।
    (ii) आरबीआई यह सुनिश्चित करता है कि बैंक केवल लाभ कमाने वाले व्यवसाय और व्यापार को ही ऋण न दें, बल्कि छोटे किसानों और लघु उद्योगों और किसानों को भी ऋण दें।
    (iii) आरबीआई यह निगरानी करता है कि बैंक किसको कितना ऋण दे रहे हैं और किस ब्याज दर पर।
  60. ‘मुद्रा का उपयोग हमारे दैनिक जीवन के एक बहुत बड़े हिस्से में होता है।’ उदाहरणों के साथ कथन का समर्थन करें।
    (i) सभी लेन-देन में मुद्रा को विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकार किया जाता है
    (ii) लेन-देन में मुद्रा लाभदायक है क्योंकि मुद्रा इच्छाओं के दोहरे संयोग की आवश्यकता को समाप्त करती है।
    (iii) मुद्रा विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थ के रूप में कार्य करती है।
    (iv) मुद्रा रखने वाला व्यक्ति आसानी से वस्तुओं/सेवाओं के साथ विनिमय कर सकता है।
    (v) हर कोई पैसे में भुगतान प्राप्त करना और फिर अपनी इच्छानुसार वस्तुओं के लिए मुद्रा का आदान-प्रदान करना पसंद करता है।
  61. मांग जमा धन की एक आवश्यक विशेषता कैसे है?
    (i) बैंक खातों में जमा राशि को मांग पर निकाला जा सकता है।
    (ii) मांग जमा नकदी के उपयोग के बिना सीधे भुगतान का निपटान करना संभव बनाता है।
    (iii) मांग जमा चेक के माध्यम से भुगतान की एक और सुविधा प्रदान करता है।
  62. गरीब परिवार अभी भी ऋण के अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर क्यों हैं? व्याख्या करें
    (i) ग्रामीण भारत में हर जगह बैंक मौजूद नहीं हैं।
    (ii) बैंक से ऋण प्राप्त करना बहुत अधिक कठिन है
    (iii) बैंक ऋण के लिए उचित दस्तावेजों और 'समर्थक ऋणाधारकी आवश्यकता होती है अनौपचारिक ऋणदाता उधारकर्ताओं को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और इसलिए बिना 'समर्थक ऋणाधारके ऋण देते हैं। 
  63. “स्वयं सहायता समूह उधारकर्ताओं को संपार्श्विक सुरक्षा की कमी की समस्या से उबरने में मदद करते हैं।” उदाहरण देकर कथन का समर्थन करें।
    एसएचजी में बचत और ऋण गतिविधियों से संबंधित अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय समूह के सदस्यों द्वारा लिए जाते हैं।
    स्वयं सहायता समूह ऋण की अदायगी के लिए भी जिम्मेदार है।
    किसी एक सदस्य द्वारा ऋण न चुकाने के किसी भी मामले का समूह के अन्य सदस्यों द्वारा गंभीरता से पालन किया जाता है।
    इस विशेषता के कारण, बैंक एसएचजी में संगठित होने पर गरीब महिलाओं को ऋण देने के लिए तैयार हैं, भले ही उनके पास कोई संपार्श्विक न हो।
    इस प्रकार, एसएचजी उधारकर्ताओं को संपार्श्विक की कमी की समस्या से उबरने में मदद करते हैं।
  64. सस्ता और किफायती ऋण देश के विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? कोई तीन कारण बताएं।
    (i) सस्ता और वहनीय ऋण लोगों को कृषि में निवेश करने, व्यापार करने और लघु उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
    (ii) वहनीय ऋण ऋण जाल को भी समाप्त करता है
    (iii) सस्ता ऋण अधिक निवेश को सक्षम बनाता है। इससे आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है।
    (iv) सस्ता ऋण समाज के कमजोर वर्गों को ऋण के औपचारिक क्षेत्र तक पहुँचने और अनौपचारिक एकल व्यापारियों से छुटकारा पाने की अनुमति देता है।
    (v) ऋण की सस्ती और आसान शर्तें प्रौद्योगिकी में बेहतर निवेश को प्रेरित करती हैं।
  65. औपचारिक क्षेत्र के ऋणों को गरीब किसानों और श्रमिकों के लिए कैसे लाभकारी बनाया जा सकता है। कोई पाँच उपाय सुझाएँ
    (i) औपचारिक क्षेत्र के ऋणों के बारे में किसानों को जागरूक करें।
    (ii) ऋण प्रदान करने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाना चाहिए।
    (iii) ग्रामीण क्षेत्र में अधिक संख्या में राष्ट्रीयकृत बैंक/सहकारी बैंक खोले जाने चाहिए।
    (iv) बैंकों और सहकारी समितियों को ऋण प्रदान करने की सुविधा बढ़ानी चाहिए ताकि ऋण के अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भरता कम हो।
  66. ‘मुद्रा ने लेन-देन को आसान बना दिया है।’ औचित्य सिद्ध करें।
    (i) मुद्रा रखने वाला व्यक्ति इसे अपनी इच्छानुसार किसी भी वस्तु या सेवा के साथ आसानी से बदल सकता है।
    (ii) हर कोई मुद्रा में भुगतान प्राप्त करना और फिर अपनी इच्छानुसार वस्तुओं के लिए मुद्रा का आदान-प्रदान करना पसंद करता है।
    (iii) मुद्रा लेनदेन प्रणाली वस्तु विनिमय प्रणाली से कहीं बेहतर है। यह आवश्यकताओं  के दोहरे संयोग की समस्याओं को हल करती है।
    (iv) बैंक और सहकारी समितियां लोगों को साहूकारों के शोषण से बचाती हैं। 
    (v) बैंक और सहकारी समितियां ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आय बढ़ाने और आजीविका में सुधार करने में मदद करती हैं। 
  67. भारत में ‘औपचारिक ऋण क्षेत्र’ के किन्हीं तीन गुणों और किन्हीं दो अवगुणों की समीक्षा करें।
    गुण
    (i) वे सस्ते (कम ब्याज दर पर) ऋण प्रदान करते हैं। इससे उधारकर्ता के कर्ज के जाल में फंसने की संभावना कम हो जाती है।
    (ii) वे उत्पादन की कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं।
    (iii) आरबीआई औपचारिक ऋण क्षेत्र के कामकाज की निगरानी करता है। इसलिए, वे पैसे वापस पाने के लिए अनुचित साधनों का उपयोग नहीं कर सकते।
    अवगुण
    (i) अधिकांश गरीब लोगों को संपार्श्विक के अभाव के कारण इस स्रोत से ऋण नहीं मिलता है।
    (ii) औपचारिक ऋण क्षेत्र’ के लिए उचित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।
  68. बैंकों और सहकारी समितियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी ऋण सुविधाएँ बढ़ाना क्यों आवश्यक है? समझाएँ।
    बैंकों और सहकारी समितियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी ऋण सुविधाएँ बढ़ाने के लिए कोई तीन कारण बताएँ।
    (i) बैंक और सहकारी समितियाँ सस्ती दरों पर अधिक ऋण सुविधाएँ प्रदान करके मदद करती हैं। किसान इन ऋणों के माध्यम से फसल उगा सकते हैं, व्यवसाय कर सकते हैं, लघु उद्योग स्थापित कर सकते हैं
    (ii) बैंक और सहकारी समितियाँ रचनात्मक समाज ऋण के अनौपचारिक क्षेत्र पर निर्भरता कम करते हैं। (iii) गरीब किसानों को कर्ज के जाल से बचाने के लिए बैंकों और सहकारी समितियों की जरूरत है। 
     
  69. आर्थिक विकास के लिए ऋण की भूमिका की व्याख्या करें
    (i) ऋण से उत्पादन और रोजगार में वृद्धि होती है। 
    (ii) ऋण उत्पादन की कार्यशील पूंजी की आवश्यकता को पूरा करने में मदद करता है।
    (iii) यह उत्पादन के चल रहे खर्चों को पूरा करने में मदद करता है।
    (iv) यह आय बढ़ाने में मदद करता है।