राजस्थान राज्य कर्मचारी सामान्य प्रावधायी निधि नियम, 2021

Rule 1 :  नाम - "राजस्थान राज्य कर्मचारी सामान्य प्रावधायी निधि नियम, 2021"
              प्रभावी दिनांक - 12 अक्टूबर 2021
Rule 2 : परिभाषायें :-
(i) खाता - खाताधारक खाता जिसमें समस्त जमा राशि एवं ब्याज जमा किया जाता है एवं आहरण नामे लिखा जाता है।
(ii) खाताधारक - प्रावधायी निधि खाते में अंशदान करने वाला कार्मिक
(iii) अभिदाता - राज्य सरकार का कर्मचारी
(iv) विभाग - राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग
(v) निदेशक - राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग के निदेशक / अतिरिक्त उप एवं सहायक निदेशक
(vi) सरकार- राजस्थान सरकार
(vii) कार्यालय अध्यक्ष -कार्यालय का अध्यक्ष
(viii) राज्य - राजस्थान
(ix) निधि - सामान्य प्रावधायी निधि जिसमें समस्त प्राप्तियां एवं भुगतान किये जाते हैं।
(x) परिवार - पति/पत्नी अथवा पत्नियां,माता-पिता, बच्चे, अवयस्क भाई, अविवाहित बहिने,
मृत पुत्र की विधवा एवं बच्चे और अगर अभिदाता के माता पिता जीवित नहीं है तो दादा-दादी
(xi) वेतन - राजस्थान सेवा नियम 1951 के अन्तर्गत परिभाषित वेतन
(xii) ई-पासबुक/पासबुक - पासबुक जो SIPF पोर्टल पर प्रदर्शित होती है। इसमें वर्ष 2012 से पूर्व संधारित "पासबुक" भी सम्मिलित है जो अभिदाता को इन नियमों के अन्तर्गत विभाग / कार्यालयाध्यक्ष द्वारा जारी की गई है एवं सत्यापित की गई है
(xiii) सामान्य प्रावधायी निधि योजना - इन नियमों में वर्णित सामान्य प्रावधायी निधि योजना जिनमें सामान्य प्रावधायी निधि-2004 (जीपीएफ-2004) एवं सामान्य प्रावधायी निधि सैब (जीपीएफ-सैब) भी सम्मिलित है।
(xiv) सामान्य प्रावधायी निधि-2004 - दिनांक 1-1-2004 एवं इसके पश्चात् नियुक्त कर्मचारियों पर लागू सामान्य प्रावधायी निधि योजना
(xv) सामान्य प्रावधायी निधि-सैब - राज्य सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्वायत्तषासी संस्थाए, बोडर्स एवं निगम के नियुक्त कर्मचारियों पर लागू सामान्य प्रावधायी निधि योजना
(xiv) SIPF पोर्टल - विभागीय वेब पोर्टल जिसके द्वारा सामान्य प्रावधायी निधि योजना के लेखों का संधारण, भुगतान तथा अभिदाता के सम्पूर्ण कार्यों का ऑनलाईन संधारण एवं निस्तारण किया जायेगा।
(क्स्वी) भुगतान प्रक्रिया - वह प्रकिया है जो राज्य सरकार के विभिन्न नियमों, आदेशों, SIPF पोर्टल, आईएफएमएस तथा संबंधित अन्य आदेशों / प्रक्रियाओं से निर्धारित की जाये।

Rule 3 : प्रावधायी निधि योजना में अभिदान 

(1) सामान्य प्रावधायी निधि योजना में अनिवार्य अभिदान :-

(i) 01.01.2004 से पूर्व नियुक्त प्रत्येक कार्मिक जो सरकार में या जिला परिषद या पंचायत समिति या ऐसे विनिर्दिष्ट संस्थानो, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा इस विषयक आदेशों के अन्तर्गत विनिर्दिष्ट किया गया हो, में संस्थाई पद अथवा अस्थाई पद पर, जिसके स्थायी होने की संभावना हो, पर स्थायी रुप से अथवा अस्थाई रुप से नियुक्त हो अथवा अर्द्ध स्थाई / स्थाई वर्कचार्ज कर्मचारी, विभाग की प्रावधायी निधि योजना में अनिवार्य रुप से अभिदान करेगा।

(ii) वह अभिदाता जो सेवा निवृति के बाद एक बार में एक वर्ष से अधिक अवधि के लिए नियुक्त किये गये हो वे भी अभिदान करेंगे।

(2) सामान्य प्रावधायी निधि-2004 एवं सामान्य प्रावधायी निधि-सैब (जीपीएफ-सैब) के कार्मिक सामान्य प्रावधायी निधि योजना में स्वैच्छिक अभिदान कर सकेंगे। यदि ये कार्मिक स्वैच्छिक अभिदान का विकल्प चुनते हैं तो भविष्य में अनिवार्य अभिदान किया जाना आवश्यक होगा। परन्तु यदि ये कार्मिक स्वैच्छिक अभिदान का विकल्प नहीं चुनते हैं तो राज्य सरकार के आदेशों के अनुरूप जो कटौती की जायेगी वही कटौती की जावेंगी।

Rule 4 : सेवा निवृति पश्चात खाताधारक को खाता चालू रखने का विकल्प :-

(1) खाताधारक / राजस्थान कैडर के अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी / राजस्थान उच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीशों को यह विकल्प होगा कि वह सेवानिवृति के पश्चात् प्राप्त सेवानिवृति परिलाभों की राशि तक यथा सेवानिवृत्ति उपादान, पेंशन रूपान्तरण, उपार्जित अवकाश के नकदीकरण, प्रावधायी निधि स्वत्व राशि, बीमा स्वत्व राशि तथा राज्य सरकार द्वारा सक्षम आदेशों से अन्य राशि प्रावधायी निधि खाते में जमा करा सकेंगे। इस जमा राशि एवम् अर्जित ब्याज पर केन्द्र / राज्य सरकार द्वारा निर्धारित कर, यदि कोई हो, के भुगतान का उत्तरदायित्व संबंधित खाताधारक का होगा। सेवानिवृति के पश्चात् खाता बन्द होने की स्थिति में खाता पुनर्जीवित कर खाता जारी रखा जा सकेगा।

(2) राज्य सरकार द्वारा सक्षम आदेशों से अन्य कार्मिकों / पेंशनर को इस हेतु सम्मिलित किया जा सकेगा।

(3) नियम 4 (1) एवं (2) में उल्लेखित अवधि में खातेदार अपने खाते से आवश्यकतानुसार कुल जमा राशि की सीमा तक आहरित कर सकेगा।

Rule 5 : नाम निर्देशन 

(1) निधि में सम्मिलित होते समय अभिदाता एक अथवा अधिक व्यक्तियों के पक्ष में SIPF पोर्टल पर निर्धारित फील्ड में ऑनलाईन नाम निर्देशन करेगा, जिसे उसके खाते में जमा रकम के संदेय होने से पूर्व या जहां रकम संदेय हो गई हो तो उसके भुगतान होने से पूर्व अभिदाता की मृत्यु होने की दशा में निधि में जमा रकम प्राप्त करने का अधिकार होगा।

*परन्तु 

यदि अभिदाता अवयस्क हो तो उसके वयस्क होने पर ही नाम निर्देशन किया जाना आवश्यक होगा। 

परन्तु 

नाम निर्देशन पंजीकृत कराते समय अभिदाता का परिवार होने की स्थिति में वह परिवार के सदस्य / सदस्यों के पक्ष में ही नाम निर्देशन कर सकेगा।*

परन्तु 

यह भी कि, निधि में सम्मिलित होने से पूर्व किसी अन्य प्रावधायी निधि में संदाय करने वाले अभिदाता द्वारा उस निधि में पंजीकृत करवाया गया नाम निर्देशन, यदि उस निधि में जमा राशि इस निधि में अन्तरित कर दी गई है, तो इन नियमों को अंतर्गत जब तक वह नया नाम निर्देशन नहीं करता, इन नियमों में किया हुआ माना जायेगा। 

अभिदाता द्वारा विवाह पूर्व किसी भी व्यक्ति के पक्ष में किया गया नाम निर्देशन विवाह पश्चात् नया मनोनयन नहीं करने की स्थिति में उसके पत्नि / पति के पक्ष में स्वतः ही किया हुआ समझा जायेगा।*

(2) यदि अभिदाता उप नियम (1) के अन्तर्गत एक से अधिक व्यक्तियों का नाम निर्देशित करता है तो मनोनयन में प्रत्येक मनोनीत को प्राप्त होने वाली राशि या उसके भाग को इस प्रकार निर्दिष्ट करेगा कि निधि में किसी भी समय जमा उसकी सम्पूर्ण राशि इसके अन्तर्गत समाहित हो जाये।

(3) प्रत्येक नाम निर्देशन निदेशक द्वारा निर्धारित प्रपत्र में प्रस्तुत किया जावेगा ।

(4) अभिदाता किसी भी समय लिखित रूप से निदेशक को सूचित कर किये गये नाम निर्देशन को निरस्त करवा सकता है।

(5) अभिदाता नाम निर्देशन में प्रावधान कर सकता है कि :-

(अ) किसी विनिर्दिष्ट मनोनयन के संदर्भ में, मनोनीत की अभिदाता से पूर्व मृत्यु हो जाने की स्थिति में,उस मनोनीत के अधिकार मनोनयन प्रपत्र में निर्दिष्ट किये गये अन्य व्यक्ति / व्यक्तियों को हस्तान्तरित होंगें परन्तु यदि अभिदाता के परिवार में अन्य सदस्य हैं तो ऐसा मनोनयन परिवार के सदस्य / सदस्यों के लिए ही मान्य होगा। इस खण्ड के अन्तर्गत यदि अभिदाता ऐसा अधिकार एक से अधिक व्यक्तियों को प्रदान करता है तो

वह ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को प्राप्त होने वाली राशि / भाग का निर्धारण इस प्रकार करेगा कि पूर्व में मनोनीत को प्राप्त होने वाली सम्पूर्ण राशि / भाग इसके अन्तर्गत समाहित हो जायें ।

(ब) मनोनयन में किसी निर्दिष्ट आकस्मिक घटना के घटित होने की स्थिति में मनोनयन अवैध हो जावेगा ।

परन्तु मनोनयन पंजीकृत कराते समय यदि अभिदाता के परिवार में केवल एक ही सदस्य है तो वह मनोनयन में प्रावधान करेगा कि खण्ड (अ) में वैकल्पिक मनोनीत को प्रदत्त अधिकार परिवार के अन्य सदस्य / सदस्यों के परिवार में  शामिल हो जाने पर अमान्य हो जायेगें 

(6) ऐसे मनोनीत, की मृत्यु की दशा में, जिस के संदर्भ में उप नियम (5) के खण्ड (अ) के अन्तर्गत मनोनयन में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया हो या किसी ऐसी घटना के घटित होने पर जिसके कारण उप नियम (5) के खण्ड (ब) या उसके परन्तुक के  अनुसरण में मनोनयन अमान्य हो जाता है, इन नियमों के प्रावधानों के अन्तर्गत नये मनोनयन के साथ उक्त मनोनयन को निरस्त करने हेतु लिखित में सूचना भेजेगा ।

(7) अभिदाता द्वारा किये गये मनोनयन एवं निरस्तीकरण की सूचना, वैध होने की स्थिति में इसके निदेशक को प्राप्त होने की तिथि से प्रभावी होगी

Rule 6 : निधि का लेखा एवं इसका अंकेक्षण :-

(1) अभिदाताओं से प्राप्त सभी प्राप्तियां सामान्य प्रावधायी निधि में जमा की जावेगी एवं सभी आहरण इस निधि के नामे लिखे जायेगें ।

(2) सरकार प्रति वर्ष वित्तीय वर्ष के आरंभ में निधि के खाते में अवशेष जमा राशि पर एक वर्ष का एवं वर्ष के दौरान शुद्ध प्राप्तियों पर मासिक गुणन के आधार समय-समय पर निर्दिष्ट दर से ब्याज जमा करेगी। प्राप्ति / आहरण जिस तिथि को किया गया है, उसी तिथि के अनुसार ब्याज की गणना की जायेगी जब तक राज्य सरकार के अन्यथा कोई आदेश नहीं हो।

(3) निधि के खाते प्रति वर्ष 30 सितम्बर तक बंद किये जायेगें और महालेखाकार, राजस्थान द्वारा अंकेक्षित किये जायेगें ।

(3) निधि के खाते प्रति वर्ष 30 जून तक बंद किये जायेगें और महालेखाकार, राजस्थान द्वारा अंकेक्षित किये जायेंगे।

Rule 7  : निधि की प्रशासनिक सूचना - 

गत वित्तीय वर्ष के दौरान प्रावधायी निधि योजना की प्रशासनिक एवं कार्य कलापों की रिपोर्ट प्रति वर्ष 30 सितम्बर से पूर्व निदेशक द्वारा सरकार को प्रस्तुत की जायेगी।

Rule 8 :अभिदाता द्वारा प्रथम जमा -

 (1) सामान्य प्रावधायी निधि- 2004 एवं सामान्य प्रावधायी निधि- सैब के अन्तर्गत आने वाले कार्मिक स्वैच्छिक अभिदान का विकल्प चुन कर प्रथम कटौती करा सकेंगे।

(2) यदि ये कार्मिक स्वैच्छिक अभिदान का विकल्प चुनते हैं तो भविष्य में अनिवार्य अभिदान किया जाना आवश्यक होगा।

(3) यदि ये कार्मिक स्वैच्छिक अभिदान का विकल्प नहीं चुनते हैं तो राज्य सरकार के आदेशों के अनुरूप जो कटौती की जायेगी वह इन कार्मिकों हेतु प्रथम कटौती होगी।

Rule 9 : खाता संख्या एवं पास बुक -

(1) SIPF पोर्टल के माध्यम से ऑन लाइन वेतन से प्रथम बार राशि कटौति उपरान्त जमा होने पर कर्मचारी को सिस्टम जनरेटेड खाता संख्या आंवटित होगी।

(2) दिनांक 01.04.2012 से पूर्व अभिदाता की जमा राशि का ई-पासबुक में इन्द्राज नहीं होने तक लुप्त कटौतियों के लिये कार्यालयाध्यक्ष / आहरण वितरण अधिकारी द्वारा सत्यापित पासबुक / SIPF पोर्टल पर प्रदर्शित स्कैन्ड प्रति को अंतिम साक्ष्य के रूप में माना जायेगा।

(3) दिनांक 01.04.2012 के पश्चात अभिदाता के वेतन से की गई कटौती या कोष में जमा कराई गई राशियों का विवरण SIPF पोर्टल के माध्यम से स्वतः ही विभागीय पोर्टल पर प्रदर्शित होगा।

Rule 10 : खाते में जमा की जाने वाली राशि

(1) राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित दर से इन नियमों के नियम 3(2) के अतिरिक्त कर्मचारियों द्वारा उनके वेतन से अनिवार्य मासिक अभिदाय किया जायेगा परन्तु निलम्बन की अवधि में अभिदाय की राशि की कटौती नहीं की जायेगी। जहां अभिदाता का वेतन कोष के माध्यम से वेतन बिल से आहरित नहीं किया जाता, वहां अभिदाय की निर्धारित राशि ऑन लाईन प्रकिया से जमा करवाई जायेगी।

(2) राज्य सरकार द्वारा जमा कराये जाने के लिए आदेशित अन्य कोई राशि।

(3) बीमा परिपक्वता स्वत्त्व राशि, स्वैच्छिक तौर पर।

(4) उपरोक्त वर्णित राशि एवं अन्य अनिवार्य कटौतियों को कम करने के पश्चात वार्षिक परिलब्धियों में शेष राशि तक स्वैच्छिक तौर पर जमा कराई जा सकेगी।

Rule 11 : जमा का बंद होना -

(1) अभिदाता की मृत्यु, सेवा से त्याग पत्र, पदच्युत कर दिये जाने, हटाये जाने, सेवा निवृति से पूर्व अवकाश पर जाने पर कटौती बन्द हो जायेगी।

(2) अभिदाता की सेवानिवृति से एक माह पूर्व उसकी कटौती बंद हो जायेगी।

Rule 8 : राशि जमा कराये जाने की प्रक्रिया -

(1) दिनांक 01.01.2004 के पूर्व नियुक्त कार्मिकों के लिए कार्यालयाध्यक्ष / आहरण वितरण अधिकारी संबंधित अभिदाता के वेतन से निर्धारित दर से मासिक अभिदाय की कटौती किया जाना सुनिश्चित करेंगे

राज्य सरकार के आदेशों से जमा राशि एवं अभिदाता द्वारा स्वयं के विकल्प के अनुसार जमा कराने हेतु प्रस्तावित राशि अभिदाता द्वारा जमा कराई जा सकेगी। 

कर्मचारी अपने पूरे साल के वेतन (कुल वार्षिक परिलब्धियों) में से अनिवार्य कटौतियों (जैसे इनकम टैक्स, बीमा आदि) को घटाने के बाद जो पैसा बचता है, उस पूरी बची हुई राशि तक GPF में जमा कर सकता है।

यह कटौतियां IFMS की निर्धारित प्रकियानुसार जमा कराई जा सकेंगी।

(2) सामान्य प्रावधायी निधि 2004 के अंतर्गत अभिदान करने वाले अंशदाता इस योजना में अभिदान हेतु विकल्प चुनते हैं तो वे कार्यालयध्यक्ष को ऑन लाइन एडवाइज़/सहमति प्रस्तुत करेंगे एवं कार्यालयध्यक्ष/आहरण वितरण अधिकारी संबंधित अभिदाता के वेतन से निर्धारित दर से मासिक कटौती IFMS की निर्धारित प्रकियानुसार वेतन/चालान से किया जाना सुनिश्चित करेंगे। 

राज्य सरकार के आदेशों से जमा राशि एवं अभिदाता द्वारा स्वयं के विकल्प के अनुसार जमा कराने हेतु प्रस्तावित राशि अभिदाता द्वारा जमा कराई जा सकेगी। 

कर्मचारी अपने पूरे साल के वेतन (कुल वार्षिक परिलब्धियों) में से अनिवार्य कटौतियों (जैसे इनकम टैक्स, बीमा आदि) को घटाने के बाद जो पैसा बचता है, उस पूरी बची हुई राशि तक GPF में जमा कर सकता है।

(3) सामान्य प्रावधायी निधि योजना सैब के अंतर्गत अभिदान करने वाले अंशदाता इस योजना में अभिदान हेतु विकल्प चुनते हैं तो वे कार्यालयध्यक्ष को ऑन लाइन एडवाइज़/सहमति प्रस्तुत करेंगे एवं कार्यालयध्यक्ष/आहरण वितरण अधिकारी संबंधित अभिदाता के वेतन से निर्धारित दर से मासिक कटौती IFMS की निर्धारित प्रकियानुसार वेतन/चालान से किया जाना सुनिश्चित करेंगे। 

राज्य सरकार के आदेशों से जमा राशि एवं अभिदाता द्वारा स्वयं के विकल्प के अनुसार जमा कराने हेतु प्रस्तावित राशि अभिदाता द्वारा जमा कराई जा सकेगी। 

कर्मचारी अपने पूरे साल के वेतन (कुल वार्षिक परिलब्धियों) में से अनिवार्य कटौतियों (जैसे इनकम टैक्स, बीमा आदि) को घटाने के बाद जो पैसा बचता है, उस पूरी बची हुई राशि तक GPF में जमा कर सकता है।

Rule : 13. ब्याज : 

(1) ब्याज कब जमा किया जाता है 

(i) वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ में प्रारम्भिक शेष पर अप्रेल माह में अभिदाता के खाते में ब्याज जमा किया जायेगा। वित्तीय वर्ष के दौरान की गई जमाओं के लिये जिस माह में राशि जमा की गई है उसकी ब्याज की गणना की जायेगी जब तक राज्य सरकार के अन्यथा कोई आदेश नहीं हो।

(ii) नियम 11 के प्रावधानों के अनुसार खाते में कटौती होना बंद हो जाने पर विभाग द्वारा भुगतान आदेश जारी करने के पूर्ववर्ती माह तक के ब्याज का भुगतान किया जायेगा।

(2) ब्याज की दर:- ब्याज की दर समय समय पर राज्य सरकार द्वारा जारी आदेशों के अनुसार निर्धारित की जायेगी।

(3) सभी प्रकार की जमा राशि एवं आहरण राशि पर जमा / आहरण माह से ब्याज की गणना की जायेगी। परन्तु इन नियमों के नियम 10 (2) के अन्तर्गत राज्य सरकार के आदेशों द्वारा मंहगाई भत्ते की जमा होने योग्य राशि पर ब्याज की गणना मंहगाई भत्ते के आदेश प्रसारित किये जाने के माह से की जायेगी।

Rule 14 : आहरण -

(1) कोई भी अभिदाता वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ पर अपने खाते में जमा राशि का निम्नानुसार आहरण करने का पात्र होगाः-

(अ) बिना कारण बताये आहरण की स्थिति में :

क्र.स.     आहरण प्रतिशत         सेवा अवधि 

| 1 |      10 प्रतिशत              5 वर्ष से 15 वर्ष 

| 2 |     30 प्रतिशत              15 वर्ष से अधिक किन्तु 25 वर्ष से कम 

| 3 |     40 प्रतिशत              25 वर्ष से अधिक किन्तु 30 वर्ष से कम 

| 4 |     50 प्रतिशत              30 वर्ष से अधिक 

| 5 |     90 प्रतिशत              अधिवार्षिकी सेवानिवृति से 60 माह अथवा उससे कम होने पर 

(ब) कारण उल्लेखित करने की स्थिति में आहरण :

क्र.स.    आहरण प्रतिशत             कारण 

| 1 |     50 प्रतिशत                  1. अभिदाता स्वयं या उसके संतान की उच्च शिक्षा हेतु

                                            2. वाहन क्रय।

                                            3. स्थाई उपभोग की वस्तुओं का क्रय

                                            4. परिवार के सदस्यों या आश्रित माता-पिता की बीमारी पर व्यय।

                                            5. अन्य कारण जो राज्य सरकार द्वारा  आदेशित किये जावें।

नोट- आहरण की सीमा हेतु वास्तविक व्यय अथवा जमा का 50 प्रतिशत जो भी कम हो तक की सीमा में ही आहरण किया जा सकेगा।

| 2 |     75 प्रतिशत                  1. भवन निर्माण, भू-खण्ड, आवास व फ्लेट क्रय, निर्मित या अधिग्रहित                                                   भवन/आवास पुनर्निमार्ण, विस्तार, परिवर्धन, भू-खण्ड पर भवन निर्माण।

                                            2. अभिदाता की स्वयं या उसके पुत्रों/पुत्रियों की सगाई/विवाह हेतु।

                                            3. अन्य कारण जो राज्य सरकार द्वारा  आदेशित किये जायें। 

(2) आहरण हेतु राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग के स्तर पर किसी प्रकार की स्वीकृति एवं कोष कार्यालय स्तर पर जांच अथवा अधिकृति की कोई आवश्यकता नहीं रहेगी। बाधारहित आहरण Direct Benefit Transfer (DBT) / सर्वर सर्टिफिकेट के माध्यम से बैंक खाते में हस्तान्तरित किया जा सकेगा।

(3) राज्य सरकार द्वारा समय समय पर आदेश जारी कर खातेदार के सेवाकाल / आयु के अनुसार आहरण की सीमा तथा आहरण के कारणों को संशोधित / पुनर्निर्धारित किया जा सकेगा।

(4) कोई भी अभिदाता अपने खाते से UPI (Unified Payments Interface) के माध्यम से UPI की मानक शर्तों SOP (Standard Operating Procedures) के अनुसार भी आहरण कर सकेगा।

(5) अभिदाताओं को आहरण स्वीकृति/भुगतान के संबंध में निदेशक के स्तर पर समय-समय पर यथावश्यक प्रक्रिया निर्धारित की जायेगी।

Rule 15 : अभिदाता के सेवानिवृत्त अथवा सेवामुक्त होने पर खाता बंद होने की प्रक्रिया -

(1) अभिदाता के खाते में जमा राशि का मय ब्याज भुगतान हो जाने पर अभिदाता का खाता बंद कर दिया जायेगा।

(2) निदेशक खाता बंद किये जाने वाले वर्ष के दौरान लिये गये आहरण को कम करते हुए अभिदाता के खाते में जमा राशि पर भुगतान करने के पूर्व माह तक के ब्याज सहित जमा राशि का भुगतान करेगा।

(3) दिनांक 1-4-2012 से पूर्व की लुप्त कटौतियों को कार्यालयाध्यक्ष / आहरण वितरण अधिकारी द्वारा प्रमाणित पासबुक में इन्द्राज अथवा GA 55A के माध्यम से अंतिम साक्ष्य माना जाकर पूर्ण किया जायेगा। इस हेतु प्रमाणित पासबुक अथवा GA 55A की स्केन्ड कॉपी ऑन लाईन SIPF पोर्टल पर अपलोड की जा सकेगी।

(4) केवल मृत्यु के मामलों को छोडकर अन्य समस्त मामलों में भुगतान अभिदाता को किया जावेगा। अभिदाता की मृत्यु की स्थिति में भुगतान नियम 16 के अनुरूप किया जायेगा।

(5) अंतिम भुगतान प्राप्त करने हेतु अभिदाता ऑनलाईन क्लेम रिक्वेस्ट के साथ undertaking हेतु निर्धारित चैक बॉक्स में सहमति प्रस्तुत करेगा जिसके अनुसार निधि से अधिक भुगतान होना पाये जाने पर राशि जीपीएफ की तत्समय प्रचलित ब्याज दर सहित एक मुश्त लौटाने हेतु बाध्य होगा।

Rule  16. अभिदाता की मृत्यु पर प्रक्रिया -

(1)  यदि कर्मचारी का परिवार है 

(i) वैध नाम निर्देशन होने पर: यदि कर्मचारी ने अपने परिवार के किसी सदस्य या सदस्यों को नॉमिनी बनाया है, तो GPF खाते की जमा राशि उन्हें नाम निर्देशन में विनिर्दिष्ट अनुपात में मिलेगी 

(ii) नामांकन न होने पर (या आंशिक होने पर): यदि परिवार के लिए कोई नामांकन नहीं है, तो पूरी राशि परिवार के जीवित सदस्यों के बीच समान रूप से (बराबर-बराबर) बांट दी जाएगी। (ध्यान दें: यदि परिवार के होते हुए भी कर्मचारी ने किसी बाहरी व्यक्ति को नॉमिनी बनाया था, तो वह मान्य नहीं होगा और पैसा परिवार को ही मिलेगा)।

विवाद की स्थिति में: यदि उत्तराधिकारियों के बीच कोई विवाद है और विभाग यह तय नहीं कर पा रहा है कि पैसा किसे मिलेगा, तो दावेदार को उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र (Succession Certificate) बनवाना होगा। इसके आधार पर SIPF पोर्टल पर ऑनलाइन क्लेम सबमिट किया जाएगा और जांच के बाद भुगतान होगा।

(2) यदि कर्मचारी का परिवार नहीं है 

(i) नाम निर्देशन होने पर : यदि कर्मचारी का अपना कोई परिवार नहीं है, तो उसने जिस भी बाहरी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों को नॉमिनी बनाया है तो राशि नाम निर्देशन में विनिर्दिष्ट अनुपात में  नाम निर्देशिति या नाम निर्देशितियों को दे दी जाएगी।

(ii)  कर्मचारी के लापता होने पर: यदि कर्मचारी लापता है, तो विभाग द्वारा जारी सेवामुक्ति आदेश अथवा न्यायालय द्वारा मृतक घोषित किये जाने के आदेश प्राप्त होने पर जीपीएफ में जमा राशि का भुगतान किया जायेगा।

(iii) भुगतान से पूर्व मृत्यु होने पर: यदि राशि के भुगतान से पहले ही कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो वैध नॉमिनी/दावेदार को जरूरी दस्तावेजों के साथ SIPF पोर्टल पर ऑनलाइन क्लेम करना होगा और जांच उपरान्त पात्र होने पर संबंधित व्यक्ति / व्यक्तियों को भुगतान किया जायेगा।

(iv) अभिदाता की मृत्यु होने पर अंतिम भुगतान हेतु मनोनीत / दावेदार ऑनलाईन क्लेम रिक्वेस्ट के साथ ऑन लाईन undertaking हेतु निर्धारित चैक बॉक्स में सहमति प्रस्तुत करेगा, जिसमें यदि भविष्य में यह पाया जाता है कि दावेदार को गलती से ज्यादा भुगतान हो गया है, तो वह अतिरिक्त राशि को तत्कालीन GPF ब्याज दर के साथ एकमुश्त वापस लौटाने के लिए बाध्य होगा।

Rule 17. किसी भी न्यायालय द्वारा खाता अधिग्रहित / कुर्क न करना - 

यदि किसी कर्मचारी पर कोई भारी कर्ज है या अदालत में कोई वित्तीय  मामला चल रहा है, तो कोई भी न्यायालय कर्मचारी के GPF खाते की राशि को जब्त (कुर्क) करने का आदेश या डिक्री (Decree) जारी नहीं कर सकता। यदि कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है और GPF का पैसा उसके द्वारा नामित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को दिया जाना है, तब भी यह कानूनी सुरक्षा लागू रहेगी। नॉमिनी को मिलने वाले इस पैसे को किसी पुराने कर्ज या अदालती आदेश के तहत कुर्क नहीं किया जा सकता।

Rule 18. प्रबन्धन व्यय - प्रावधायी निधि योजना के प्रबन्धन के लिए आवश्यक व्यय राशि सरकार द्वारा सरकार में जमा प्रावधायी निधि पर देय ब्याज के अतिरिक्त बजट में प्रावधित की जाकर उपलब्ध कराई जावेगी।

Rule 19. अन्तिम भुगतान के मामले मे शक्तियों का प्रत्यायोजन - 

(1) विभाग के संयुक्त/उप/सहायक निदेशक इन नियमों के नियम 15 एव 16 के अन्तर्गत अंतिम भुगतान योग्य राशि पर भुगतान आदेश जारी करने के पूर्ववर्ती माह तक ब्याज स्वीकृत करने के लिए अधिकृत होंगे।

(2) इन नियमों के अन्तर्गत किसी व्यक्ति के अभिदाता होने के पात्र न होने की स्थिति में उससे प्राप्त राशि विभाग के संयुक्त / उप / सहायक निदेशक उक्त राशि विभाग में जमा रहने की अवधि के लिए विनिर्दिष्ट की गई दर से ब्याज सहित लौटाने के लिए अधिकृत होंगे।

Rule 20. निर्वचन - 

इन नियमों के निर्वचन के सम्बंध में यदि कोई संदेह उत्पन्न होता है तो राज्य सरकार के वित्त विभाग को निर्णय हेतु भेजे जायेंगे।

Rule 21. शिथिलता प्रदान करने की शक्ति -  

जहां राज्य सरकार सन्तुष्ट है कि इन नियमों के क्रियान्वयन से किसी विशेष प्रकरण में अनावश्यक कठिनाई उत्पन्न होने पर, ऐसे प्रकरणों में वह कारणों को लिपिबद्ध करते हुए सम्बंधित नियम में आवश्यक सीमा तक वित्त विभाग की सक्षम सहमति से शिथिलन प्रदान कर सकती है।

Rule 22. प्रत्यायोजन की शक्तियां - 

राज्य सरकार अपने अधीनस्थ किसी भी अधिकारी को इन नियमों के अन्तर्गत नियम 15 एवं 16 के अतिरिक्त, आवश्यक शर्तों के अध्यधीन, शक्तियों का प्रत्यायोजन कर सकेगी।

Rule 23. निरसन एवं व्यावृत्ति -

(1) समय समय पर संशोधित राजस्थान राज्य कर्मचारी सामान्य प्रावधायी निधि नियम, 1997, उस तिथि से, जिससे यह नियम प्रभावी होंगे, अप्रभावी हो जायेगे।

(2) इन अप्रभावी नियमों के अन्तर्गत किया गया कोई कार्य इस अप्रभाव को नजर अंदाज करते हुए, यह मानते हुए कि, मानों वह इन नियमों के अन्तर्गत किया गया है, प्रभावी रहेगा।

Rule 24. कठिनाइयों के निराकरण की शक्तियां -  

यदि इन नियमों के लागू होने के पश्चात् पूर्व के नियमों के कारण अभिदाता को कोई कठिनाई होती है तो राज्य सरकार में यह शक्तियां होंगी कि वह विशिष्ट आदेश जारी कर इन कठिनाइयों का निराकरण कर सकेगी।

 आदेश दिनांक  25 मई 2022

1 जनवरी 2004 और उसके बाद नियुक्त राज्य कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने के निर्णय के बाद, 1 जनवरी 2004 या उसके बाद नियुक्त कर्मचारियों के वेतन से माह अप्रैल 2022 के वेतन (जो 1 मई 2022 को देय था) से GPF कटौती अनिवार्य रूप से की जाएगी।
बकाया कटौती: अप्रैल 2022 और मई 2022 की GPF कटौती को मई 2022 के वेतन (जो 1 जून 2022 को देय है) से काटा जाएगा।

आदेश दिनांक  26 मई 2022

प्रोबेशनर ट्रेनी के रूप में नियुक्त कार्मिकों के लिये पुरानी पेंशन योजना लागू करने के निर्णय के दृष्टिगत सामान्य प्रावधायी निधि हेतु अभिदान की नियत पारिश्रमिक से मासिक कटौती
संदर्भः वित्त विभाग का समसंख्यक आदेश दिनांक 25-5-2022.

क्र.सं.

पे मेट्रिक्स में पे-लेवल

GPF अभिदान की राशि (रुपये)       

1

L-1 से L-7 तक

700

2

L-8 से 9 तक

800

3

L-10 से L-11 तक

1100

4

L-12 से L-14 तक

1400

5

L-15

1800

6

L-16 से L-17 तक

2100

7

L-18 से L-19 तक

2400

8

L-20 से L-21 तक

3000

9

L-22 से L-23 तक

4500

10

L-24

5000

माह अप्रेल 2022 एवं माह मई 2022 के GPF अभिदान की कटौती माह मई 2022 के नियत पारिश्रमिक से ( 1 जून 2022 को देय) की जावेगी। इन कार्मिकों के नियमित वेतन श्रंखला प्राप्त करने पर GPF अभिदान की राशि की कटौती राज्य कर्मचारियों के लिये निर्धारित GPF अभिदान के अनुसार की जायेगी।


आदेश दिनांक  25 अगस्त 2023 

राजस्थान राज्य कर्मचारी सामान्य प्रावधायी निधि (GPF) नियम, 2021 के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपना GPF खाता चालू रखने का विकल्प 

  • खाताधारकों के पास सेवानिवृत्ति के बाद भी अपना GPF खाता चालू रखने का विकल्प होगा।
  • यदि सेवानिवृत्ति के बाद खाता बंद हो गया है, तो उसे फिर से शुरू (पुनर्जीवित) किया जा सकता है।
  • पेंशनभोगी अपनी कुल मासिक पेंशन का अधिकतम 1/3 हिस्सा GPF खाते में जमा करवा सकते हैं।
  • जमा राशि और ब्याज पर किसी भी प्रकार के कर (Tax) के भुगतान की जिम्मेदारी खाताधारक की होगी।
  • यह सुविधा पारिवारिक पेंशनभोगियों (Family Pensioners) के लिए उपलब्ध नहीं है।


GPF कटौती  With Etfect From 01.05.1999

क्र.सं.

वेतन

कटौती

1

4000 /- तक

300/-

2

4001/- से 5000/-

400/-

3

5001/- से 6500 /-

700/-

4

6501/- से 8500/-

1000/-

5

8501/- से 10500/-

1400/-

6

10501/- से 12000/-

2000/-

7

12001/- से 14000/-

2600/-

8

14000/- से ऊपर

3400/-

GPF कटौती  With Etfect From 01.11.2009

क्र.सं.

वेतन

कटौती

1

9000/- तक

500/-

2

9001/- से 11000/-

650/-

3

11001/- से 15000/-

1100/-

4

15001/- से 20000/-

1450/-

5

20001/- से 24000/-

2100/-

6

24001/- से 28000/-

3300/-

7

28001/- से 31000/-

4100/-

8

31001/- से 45000/-

5200/-

9

45001/- से 65000/-

5700/-

10

65000/- से ऊपर

6200/-

GPF कटौती  With Etfect From 01.10.2017

क्र.सं.

वेतन

कटौती

1

23100/- तक

500/-

2

23101/- से 28500/-

650/-

3

28501/- से 38500/-

1100/-

4

38501/- से 51500/-

1450/-

5

51501/- से 62000/-

2100/-

6

62001/- से 72000/-

3300/-

7

72001/- से 80000/-

4100/-

8

80001/- से 116000/-

5200/-

9

116001/- से 167000/-

5700/-

10

167000/- से ऊपर

6200/-

 GPF कटौती  With Etfect From 01.03.2018

क्र.सं.

वेतन

कटौती

1

23100/- तक

1450/-

2

23101/- से 28500/-

1625/-

3

28501/- से 38500/-

2100/-

4

38501/- से 51500/-

2850/-

5

51501/- से 62000/-

3575/-

6

62001/- से 72000/-

4200/-

7

72001/- से 80000/-

4800/-

8

80001/- से 116000/-

6150/-

9

116001/- से 167000/-

8900/-

10

167000/- से ऊपर

10500/-


GPF ब्याज दर 

 क्र.सं.

वर्ष

ब्याज दर 

1

1980-81

8.5%

2

1981-82 to 1982-83

9.0%

3

1983-84

9.5%

4

1984-85

10.0%

5

1985-86

10.5%

6

1986-87 to 1999-00

12.0%

7

2000-01

11.0%

8

2001-02

9.5%

9

2002-03

9.0%

10

2003-04 to 2010-11

8.0%

11

01-04-2011 to 30-11-2011

8.0%

12

01-12-2011 to 31-03-2012

8.6%

13

2012-13

8.8%

14

2013-14 to 2015-16

8.7%

15

01.04.2016 to 30.06.2016

8.1%

16

01.07.2016 to 30.09.2016

8.1%

17

01.10.2016 to 31.12.2016

8.0%

18

01.01.2017 to 31.03.2017

8.0%

19

01.04.2017 to 30.06.2017

7.9%

20

01.07.2017 to 31.12.2017

7.8%

21

01.01.2018 to 31.03.2018

7.6%

22

01.4.2018 to 30.06.2018

7.6%

23

01.07.2018 to 30.09.2018

7.6%

24

01.10.2018 to 31.12.2018

8.0%

25

01.01.2019 to 31.03.2019

8.0%

26

01.04.2019 to 30.06.2019

8.0%

27

01.07.2019 to 30.09.2019

7.9%

28

01.10.2019 to 31.12.2019

7.9%

29

01.01.2020 to 31.03.2020

7.9%

30

01.04.2020 to 30.06.2020

7.1%

31

01.07.2020 to 30.09.2020

7.1%

32

01.10.2020 to 31.12.2020

7.1%

33

01.01.2021 to 31.03.2021

7.1%

34

01.04.2021 to 30.06.2021

7.1%

35

01.07.2021 to 30.09.2021

7.1%

36

01.10.2021 to 31.12.2021

7.1%

37

01.01.2022 to 31.03.2022

7.1%

38

01.04.2022 to 30.06.2022

7.1%

39

01.07.2022 to 30.09.2022

7.1%

40

01.10.2022 to 31.12.2022

7.1%

41

01.01.2023 to 31.03.2023.

7.1%

42

01.04.2023 to 30.06.2023

7.1%

43

01.07.2023 to 30.09.2023.

7.1%

44

01.10.2023 to 31.12.2023

7.1%

45

01.01.2024 to 31.03.2024

7.1%

46

 01.04.2024 to 30.06.2024

7.1%

47

 01.07.2024 to 30.09.2024

7.1%

48

01.10.2024 to 31.12.2024

7.1%

49

01.01.2025 to 31.03.2025

7.1%

50

01.04.2025 to 30.06.2025.

7.1%

51

01.07.2025 to 30.09.2025

7.1%

52

01.10.2025 to 31.12.2025

7.1%

53

01.04.2026 to 30.06.2026

7.1%

54


7.1%

55


7.1%