GSSS BINCHAWA

GSSS BINCHAWA

GSSS KATHOUTI

GSSS KATHOUTI

GSSS BUROD

7. परमाणु सिद्धांत तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण व गुणधर्म

  1. आधुनिक आवर्त सारणी का निर्माण किसने किया 
    हेनरी मौजले ने 
  2. सर्वाधिक विधुतॠणी तत्व का नाम लिखिए
    फ्लोरीन
  3. F,C,Li,Be तत्वो को बढ़ती हुई परमाणु त्रिज्या के क्रम में लिखिए
    F≺ C≺ Be≺ Li
  4. Li, Fr, Na, K तत्वो को उनके बढ़ते धात्विक गुणों के क्रम में लिखिए
    Li≺ Na≺ K ≺ Fr
  5. न्यूलैण्ड ने कितने तत्व खोजे।
    56
  6. मेंडलीफ की आवर्त सारणी कितने वर्ग तथा आवर्त थे
    8 वर्ग व 6 आवर्त
  7. चार उपधातु के नाम लिखिए
    बाॅराॅन, सिलिकॉन, जर्मेनियम, आर्सेनिक
  8. आधुनिक आवर्त सारणी तत्वों के किस गुण पर आधारित है 
    परमाणु क्रमांक 
  9. परमाणु का प्रथम माॅडल किसने दिया 
    थाॅमसन ने
  10. आधुनिक आवर्त सारणी में वर्ग व आवर्त कितने हैं
    आधुनिक आवर्त सारणी में क्षैतिज पंक्तियाँ आवर्त  कहलाती है जिनकी संख्या 7 है और ऊर्ध्वाधर स्तम्भ वर्ग कहलाते है जिनकी संख्या 18 है
  11. उत्कृष्ट गैसों के नाम लिखिए
    18 वें वर्ग के सदस्य हीलियम, नियाॅन, आर्गन, क्रिप्टोन, जिनाॅन आदि को उत्कृष्ट गैसों के नाम से जाना जाता है 
  12. रदरफोर्ड मॉडल की दो कमियां लिखिए
    1.परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका
    2.परमाणु की इलेक्ट्रॉन रचना परमाणु की इलेक्ट्रॉन संरचना को स्पष्ट नहीं कर सका
  13. संयोजकता क्या होती है
    किसी तत्व के एक परमाणु से सहयोग करने वाले हाइड्रोजन परमाणु की संख्या या संयोग करने वाले ऑक्सीजन परमाणु की संख्या की आधी संख्या संयोजकता कहलाती है
  14. परिवर्ती संयोजकता किसे कहते हैं
    d ब्लॉक तत्व, लेंथनाईड व एक्टिनाईड तत्व एक से अधिक संयोजकता प्रदर्शित करते हैं इसे परिवर्तित संयोजकता कहते हैं
  15. डोबेराइनर ने कौन कौन से त्रिक बनाएं
    (1) Li Na K
    (2) Ca Sr Ba
    (3) Cl Br I
  16. न्यूलैण्ड का अष्टक नियम लिखिए (2019)
    न्यूलैंड के अनुसार जब तक तुम को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के आधार पर व्यवस्थित किया जाए तो प्रत्येकआठवें तत्व के गुण पहले तत्व के गुणधर्म के समान होते हैं
  17. आधुनिक आवर्त नियम क्या है
    "तत्वों के भौतिक व रासायनिक गुणधर्म उनके परमाणु क्रमांक उनके आवर्ती फलन होते हैं"
  18.  प्रभावी नाभिकीय आवेश किसे कहते हैं
    परमाणु की बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉन पर नाभिक द्वारा लगने वाला आकर्षण बल प्रभावी नाभिकीय आवेश कहलाता है
  19. बोर मॉडल की कमियां लिखिए
    1.अधिक इलेक्ट्रॉन वाले परमाणु की इस मॉडल से व्याख्या नहीं की जा सकती है
    2. परमाणु द्वारा रसायनिक बंध बनाकर अणु बनाने की प्रक्रिया को यह मॉडल नहीं समझा सका
  20. ऑक्सीकरण अवस्था से क्या अभिप्राय है
    किसी तत्व का एक परमाणु दूसरे तत्व के परमाणु से जितनी संख्या में आवेश या इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है वह उसकी ऑक्सीकरण अवस्था कहलाती है
  21. आयनन एंथैल्पी से क्या अभिप्राय है
    किसी तत्व के उदासीन गैसीय परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन पृथक करने के लिए दी जाने वाली ऊर्जा आयनन एंथैल्पी या आयनन विभव कहलाती है
  22. इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी किसे कहते हैं
    किसी तत्व के उदासीन गैसीय परमाणु द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर मुक्त होने वाली ऊर्जा इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी या इलेक्ट्रॉन बंधुता कहलाती है
  23. विधुतॠणता किसे कहते हैं
    सहसंयोजक यौगिकों में दो असमान परमाणुओ के मध्य बने रासायनिक बंध के इलेक्ट्रोन को अधिक विद्युत ऋणी परमाणु द्वारा अपनी ओर आकर्षित करने के गुण को विद्युत ऋणता कहते हैं
  24. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल को सौर मंडल का प्रतिरूप क्यों माना जाता है
    रदरफोर्ड मॉडल के अनुसार जिस प्रकार सूर्य के चारों और सभी ग्रह परिक्रमा करते हैं उसी प्रकार इलेक्ट्रॉन धनावेशित नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं
  25. गुणो में आवर्तिता से क्या अभिप्राय है
    आवर्त सारणी के किसी वर्ग में ऊपर से नीचे की तरफ जाने या आवर्त में बांयी से दांयी ओर जाने पर तत्वो के भोतिक व रासायनिक गुणो में नियमित परिवर्तन होता है इसे गुणों में आवर्तिता कहते है
  26. धनायन अपने उदासीन परमाणु से छोटा क्यों होता है (2020)
    धनायन निर्माण में इलेक्ट्रॉन निकलने से परमाणु का बाह्यतम कोश समाप्त हो जाता है तथा शेष इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान बढ़ जाता है अतः धनायन का आकार उदासीन परमाणु से छोटा होता है
  27. ऋणायन अपने उदासीन परमाणु से बङा क्यों होता है (2020)
    जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है तो ऋणायन बनता है ॠणायन निर्माण से बाह्यतम कक्षा में इलेक्ट्रॉन की संख्या बढ़ जाती है जिससे प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान कम हो जाता है अतः ऋण आयन का आकार उसके उदासीन परमाणु से बड़ा होता है
  28. आवर्त व वर्ग में विद्युत ॠणता का मान किस प्रकार बदलता है 
    आवर्त में बांयी से दांयी ओर जाने पर परमाणु आकार घटने के कारण विद्युत ॠणता का मान बढता है
    वर्ग में ऊपर से नीचे की जाने पर परमाणु आकार बढने के कारण विद्युत ॠणता का मान घटता है 
  29. इलेक्ट्रोन लब्धि एन्थैल्पी (इलेक्ट्रोन बन्धुुुता)  की आवर्त व वर्ग में आवर्तिता समझाइए 
    आवर्त में बांयी से दांयी ओर जाने पर परमाणु घटने एवं प्रभावी नाभिकीय आवेश बढने के कारण  इक्ट्रोन लब्धि एन्थैल्पी का मान बढता है
    वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर परमाणु आकार  में अनियमितता के कारण इलेक्ट्रोन लब्धि एन्थैल्पी में  भी अनीयमितता पायी जाती है
     
  30. आयनन एन्थैल्पी की गुणों में आवर्तिता समझाइए 
    आवर्त में बांयी से दांयी ओर जाने पर परमाणु आकार घटने एवं प्रभावी नाभिकीय आवेश बढने के कारण परमाणु से इलेक्ट्रोन पृथक करना कठिन होता है अतः आवर्त में बांयी से दांयी ओर जाने पर आयनन एन्थैल्पी बढती है
    वर्ग में ऊपर से नीचे की जाने पर परमाणु आकार बढने तथा प्रभावी नाभिकीय आवेश घटने कारण परमाणु से इलेक्ट्रोन पृथक करना सरल हो जाता है अतः वर्ग में ऊपर से नीचे  की ओर जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटती है
  31. वाण्डरवाल त्रिज्या व सहसंयोजक त्रिज्या किसे कहते हैं
    ठोस अवस्था में एक ही पदार्थ के दो निकट स्थित अनाबंधित अणुओं के परमाणुओं के बीच की दूरी का आधा वांडरवाल त्रिज्या कहलाती है वाण्डरवाल त्रिज्या का मान हमेशा सहसंयोजक त्रिज्या से अधिक होता है
    सहसंयोजक बंध से जुड़े एक ही तत्व के दो समान परमाणुओ के नाभिको के बीच की दूरी का आधा उस परमाणु की सहसंयोजक त्रिज्या कहलाती है
  32. मेंडलीफ का आवर्त नियम लिखिए
    मेंडलीफ के अनुसार जब तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में व्यवस्थित किया जाता है तो एक निश्चित अंतराल के बाद तत्वों के समान गुणों की पुनरावृत्ति होती है अर्थात "तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु भार के आवर्ती फलन होते हैं"
  33. डोबेराइनर का त्रिक नियम क्या है समझाइए (2019)
    डोबेराइनर ने समान गुणधर्म वाले तीन- तीन तत्वों के समूह बनाए और उन्हें त्रिक कहा डोबेराइनर के अनुसार जब त्रिक के तीनों तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में रखा जाता है तो बीच वाले तत्व का परमाणु द्रव्यमान शेष दो तत्वों के परमाणु द्रव्यमान के औसत के बराबर होता है
  34. मेंडलीफ की आवर्त सारणी की विशेषताएं लिखिए (2020)
    1.मेंडलीफ ने तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु भार के क्रम में व्यवस्थित किया परंतु समान गुणधर्म वाले तत्वों को एक साथ रखने के लिए कभी-कभी अधिक द्रव्यमान वाले तत्वों को कम द्रव्यमान वाले तत्वों से पहले रखा
    2.मेंडलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में कुछ रिक्त स्थान छोड़ें
    3.जब उत्कृष्ट गैसों का पता चला तो मेंडलीफ की आधुनिक आवर्त सारणी को बिना छुए इन्हें नए समूह में रखा जा सका
  35. मेंडलीफ की आवर्त सारणी के दोष लिखिए (2020)
    1.मेंडलीफ की आवर्त सारणी में हाइड्रोजन को निश्चित स्थान नहीं दिया गया
    2.समस्थानिक को कोई स्थान नहीं दिया गया
    3.कुछ स्थानों पर परमाणु भार के बढ़ते क्रम का पालन नहीं किया गया
    4.कुछ समान गुण वाले तत्वों को अलग-अलग वर्ग में तथा कुछ असमान गुणों वाले तत्वों को एक ही वर्ग में रख दिया
  36. थॉमसन का परमाणु मॉडल क्या है समझाइए (2019)
    परमाणु संरचना का पहला मॉडल थॉमसन ने दिया जिसे प्लम पुडिंग मॉडल के नाम से भी जाना जाता हैं थॉमसन ने अपने मॉडल की तुलना क्रिसमस केक या तरबूज से की ।थॉमसन मॉडल के अनुसार :-
    1.परमाणु एक धनावेशित गोला है जिसमें ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन रहते हैं
    2. परमाणु में धन आवेश व ऋण आवेश की मात्रा समान होती है इसलिए परमाणु उदासीन होता है

  37. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के तीन बिंदु लिखिए
    1.परमाणु का संपूर्ण द्रव्यमान व धनावेश उस के मध्य में केंद्रित रहता है जिसे नाभिक कहते हैं
    2.परमाणु का अधिकांश भाग खोखला होता है जिसमें इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृताकार पथ पर चक्कर लगाते हैं
    3.परमाणु उदासीन होता है अतः परमाणु में इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन की संख्या बराबर होती है
  38. डाल्टन का परमाणु सिद्धांत क्या है
    1.प्रत्येक पदार्थ छोटे-छोटे अविभाज्य कणों से मिलकर बना होता है जिन्हें परमाणु कहते हैं
    2.एक ही तत्व के सभी परमाणु भार, आकार व रासायनिक गुणधर्मों में समान होते हैं
    3.भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु भार, आकार व रासायनिक गुणधर्मों में असमान होते हैं
    4.रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु का न तो निर्माण होता है और ना ही विनाश! परमाणु केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं
  39. नील्स बोर की परिकल्पनाएं लिखिए
    1.परमाणु के केंद्र में नाभिक होता है जिसमें परमाणु के धनावेशित कण प्रोटॉन उपस्थित होते हैं
    2.इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों और निश्चित त्रिज्या एवं ऊर्जा वाले पथ पर चक्कर लगाते हैं जिन्हें कक्षा, कोष या ऊर्जा स्तर कहते हैं
    3.कक्षाएं नाभिक के चारों ओर संकेंद्रीय वलय के रूप में व्यवस्थित होती है जिन्हें n से दर्शाते हैं
    4.n का मान बढ़ने के साथ कक्षाएं नाभिक से दूर होती जाती है और उनकी ऊर्जा बढ़ती जाती है
    5.एक निश्चित कक्षा में चक्कर लगाने से इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता है
    6.जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न उर्जा स्तर में जाता है तो ऊर्जा का उत्सर्जन करता है तथा जब इलेक्ट्रोन निम्न उर्जा स्तर से उच्च ऊर्जा स्तर में जाता है तो ऊर्जा का अवशोषण करता है
  40. आवर्त व वर्ग में निम्न गुण किस प्रकार परिवर्तित होते हैं
    (1) परमाणु त्रिज्या - आवर्त में बांयी से दांयी ओर जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है अतः नाभिक में प्रोटोन की संख्या बढ़ती है फलस्वरुप परमाणु की बाह्यतम कक्षा में उपस्थित इलेक्ट्रोन पर लगने वाला नाभिकीय आकर्षण बल बढ़ जाता है अतः परमाणु की त्रिज्या घटती है
    (2019) वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है अतः नाभिक में प्रोटॉन की संख्या भी बढ़ती है परंतु साथ ही कोशो की संख्या भी बढ़ जाती है और बाह्यतम कक्षा में उपस्थित इलेक्ट्रोन पर लगने वाला नाभिकीय आकर्षण बल कम हो जाता है अतः परमाणु की त्रिज्या बढ़ती है
    (2) धात्विक (2019) व अधात्विक गुण- आवर्त में बांयी से दांयी ओर जाने पर परमाणु आकार घटने एवं प्रभावी नाभिकिय आवेश बढ़ने के कारण  इलेक्ट्रोन ग्रहण करने की प्रवृृत्ति बढती  अतः धनायन बनाने की प्रवृति(धात्विक गुण) में कमी और ॠणायन बनाने की प्रवृति(अधात्विक गुण) में वृद्धि होती है
    वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर परमाणु आकार में वृद्धि तथा प्रभावी नाभिकीय आवेश में कमी आती है अतः धनायन बनाने की प्रवृत्ति(धात्विक गुण) में वृृद्धि  होती  एवं ॠणायन बनाने की प्रवृत्ति घटती है अर्थात वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर धात्विक गुणों में वृद्धि व अधात्वक गुणो में कमी आती है
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9.प्रकाश

  1. प्रकाश का वेग सर्वाधिक किसमें होता है
    निर्वात में
  2. समतल दर्पण की फोकस दूरी कितनी होती है
    अनंत
  3. वक्रता त्रिज्या और फोकस दूरी में संबंध लिखिए
    वक्रता त्रिज्या R फोकस दूरी F की दोगुनी होती है
    R=2f
  4. समतल दर्पण का आवर्धन कितना होता है
    +1
  5. जब कोई वस्तु प्रकाश के सभी रंगों को अवशोषित कर लेती है तो कैसी दिखाई देती है
    काली
     
  6. जब कोई वस्तु प्रकाश के सभी रंगो को परावर्तित कर देती है तो कैसी दिखाई देती है
    सफेद
  7. कोर्निया की गोलाई में अनियमितता के कारण कौन सा दोष उत्पन्न होता है
    दृष्टि वैषम्य दोष
  8. स्पेक्ट्रम किसे कहते हैं
    प्रकाश के अवयवी वर्णों का पर्दे पर प्राप्त सप्त वर्ण (सात रंग) प्रतिरूप स्पेक्ट्रम कहलाता है
  9. समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है
    अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर लेता है समंजन क्षमता कहलाती है
  10. प्रकाश का अपवर्तन क्यों होता है 
    जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है तो प्रकाश के वेग में परिवर्तन होता है वेग में परिवर्तन के कारण अपवर्तन होता है 
  11. पार्श्व परावर्तन किसे कहते हैं
    समतल दर्पण से बने प्रतिबिंब में वस्तु का बायां भाग दांयी ओर तथा दायां भाग बांयी ओर दिखाई देता है इसे पार्श्व परावर्तन कहते हैं
  12. दृष्टिवैषम्य दोष या अबिंदुकता दोष क्या होता है (2020)
    कोर्निया की गोलाई में अनियमितता के कारण व्यक्ति को समान दूरी पर रखी ऊर्ध्वाधर व क्षेतिज रेखाएं एक साथ स्पष्ट दिखाई नहीं देती है इसे दृष्टिवैषम्य दोस्त कहते हैं
  13. समतल दर्पण से किस प्रकार का प्रतिबिंब बनता है
    1.आभासी व सीधा बनताा है
    2.प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु सामने स्थित होती है 
  14. उत्तल दर्पण के उपयोग लिखिए
    1.उत्तल दर्पण का उपयोग वाहनों में पश्च दृश्य दर्पण एवं पार्श्व दर्पण के रूप में किया जाता है
    2.ATM मशीन के पास सुरक्षा की दृष्टि से उत्तल दर्पण लगाए जाते हैं
  15. पूर्ण आंतरिक परावर्तन क्या है (2020)
    जब प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से अधिक होने पर प्रकाश किरण पुन: उसी माध्यम में अपवर्तित हो जाती है। इस घटना को पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहते हैं।
  16. प्रकाश परावर्तन के नियम लिखिए
    (i)आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं
    (ii)आपतन कोण ∠i व परावर्तन कोण ∠r बराबर होते हैं
    ∠ i = ∠ r
  17. प्रकाश का अपवर्तन किसे कहते हैं
    जब प्रकाश की किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है तो दोनों माध्यमों के पृथक्कारी तल पर अपने मूल मार्ग से विचलित हो जाती है इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते है जैसे पानी में आंशिक रूप से डूबी हुई पेंसिल का मुड़ा हुआ दिखाई देना, गिलास में बड़ा सिक्का ऊपर उठा हुआ दिखाई देना, नदी का पेंदा ऊपर उठा हुआ दिखाई देना
  18. क्रांतिक कोण किसे कहते हैं
    जब प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो आपतन कोण का वह मान जिस पर अपवर्तित किरण दोनों माध्यमों की सतह के समांतर हो जाती है क्रान्तिक कोण कहलाता है
  19. लेंस क्षमता से क्या अभिप्राय है इसका मात्रक लिखिए
    लेंस की फोकस(f) दूरी का व्युत्क्रम लेंस क्षमता कहलाता है
    इसका मात्रक डायोप्टर होता है

    उतल लेंस की लेंस क्षमता धनात्मक व अवतल लेंस की लेंस क्षमता ॠणात्मक होती है 
  20. दर्पण सूत्र लिखिए

    f= दर्पण की फोकस दूरी
    u= वस्तु की दर्पण से दूरी 
    v= प्रतिबिम्ब की दर्पण से दूरी 
  21. लेंस सूत्र लिखिए

    f= लेंस की फोकस दूरी
    u= वस्तु की लेंस से दूरी 
    v= प्रतिबिम्ब की लेंस से दूरी 
  22. वर्ण विक्षेपण से क्या अभिप्राय है
    जब किसी कांच के प्रिज्म में से गुजरता है तो यह अपने अवयवी रंगो (सात रंगों) में विभाजित हो जाता है। इसे प्रकाश का वर्ण विक्षेपण कहते हैं। इन रंगों के विक्षेपण का क्रम निम्न होता है 
    बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल(VIBGYOR)
  23. जरादूर दृष्टिता से क्या अभिप्राय है
    आयु बढ़ने के साथ नेत्र लैंस एवं मांसपेशियों का लचीलापन कम होने से नेत्र की समंजन क्षमता कम हो जाती है जिसके कारण दूर दृष्टि दोष उत्पन्न हो जाता है अर्थार्त पास की वस्तुएं स्पष्ट दिखाई नहीं देती है इसे जरा दूरदर्शिता कहते हैं 
    इसके निवारण केे लिए उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है
  24. मोतियाबिंद क्या होता है 
    आयु बढऩे के साथ नेत्र लेंस की पारदर्शिता खत्म होने लगती है एवं लेंस का लचिलापन कम होने लगाता है। इस कारण यह प्रकाश का परावर्तन करने लगता है। और वस्तुएं स्पष्ट नहीं दिखाई देती है। इस दोष को मोतियाबिंद कहते हैं।
    इस दोष के निवारण के लिए नेत्र लेंस को हटाकर कृत्रिम लेंस लगाया जाता है। जिसे इन्ट्रा आक्यूलर लेंस कहते हैं।
  25. अपवर्तनांक से क्या अभिप्राय है । यह पर निर्भर करता है?
    प्रकाश का निर्वात या हवा में वेग तथा किसी माध्यम में प्रकाश के वेग का अनुपात अपवर्तनांक कहलाता है 
    अपवर्तनांक माध्यम की प्रकृति, घनत्व व प्रकाश के रंग पर निर्भर करता है। बैंगनी रंग के प्रकाश के लिए अपवर्तनांक सबसे अधिक तथा लाल रंग के प्रकाश के लिए अपवर्तनांक सबसे होता है 
  26. अपवर्तन के नियम लिखिए
    1.अपवर्तन के दौरान आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब तीनों एक ही तल में होते है
    2.स्नेल का नियम -अपवर्तन में आपतन कोण की ज्या (sin i) तथा अपवर्तन कोण की ज्या (sin r)का अनुपात सदैव स्थिर रहता है इसे स्नेल का नियम कहते हैं
  27. निकट बिन्दु व दूर बिन्दु से क्या अभिप्राय है 
    निकट बिंदु -वस्तु की नेत्र से वह न्यूनतम दूरी जहां से वस्तु को स्पष्ट देखा जा सकता है नेत्र का निकट बिंदु कहलाता है सामान्य नेत्र के लिए निकट बिंदु 25 सेमी पर स्थित होता है 
    दूर बिंदु - वस्तु की नेत्र वह अधिकतम दूरी जहां तक वस्तु को स्पष्ट देखा जा सकता है नेत्र का दूर बिंदु कहलाता है सामान्य आंख के लिए दूर बिंदु अनंत पर स्थित होता है 
    दृष्टि परास- निकट बिंदु व दूर बिंदु के बीच की दूरी (अनन्त से 25 सेमी के बीच की दूरी) दृष्टि परास कहलाती है
  28. आवर्धनता से क्या अभिप्राय है (2020)
    किसी लेंस द्वारा वस्तु को आवर्धित करने की क्षमता को आवर्धनता कहते हैं प्रतिबिंब की ऊंचाई एवं बिंब की ऊंचाई के अनुपात को आवर्धनता को दर्शाता है

    उत्तल दर्पण के लिए आवर्धन का मान हमेशा धनात्मक होता है
  29. गोलीय दर्पण किसे कहते हैं ये कितने प्रकार के होते है
    ऐसे दर्पण जिसका परावर्तक पृष्ठ गोलीय होता है, गोलीय दर्पण कहलाता है गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते है
    1.अवतल दर्पण- इसका परावर्तक पृष्ठ अन्दर की ओर धँसा हुआ होता है अवतल दर्पण प्रकाश की किरणों को अभिसरित (एकत्रित) करता है 
    2.उत्तल दर्पण-इसका परावर्तक पृष्ठ बाहर की तरफ उभरा हुआ होता है उत्तल दर्पण प्रकाश की किरणो को अपसरित (फैलाता) करता है 
  30. गोलीय लेंस किसे कहते हैं यह कितने प्रकार के होते हैं
    दो पृष्ठों से घिरा पारदर्शी माध्यम जिसका एक या दोनों पृष्ठ गोलीय होते है लेंस कहलाता है लेंस दो प्रकार के होते हैं
    1.उत्तल लेंस- उत्तल लेंस किनारों पर पतला व बीच में से मोटा होता है उत्तल लेंस प्रकाश की किरणों को अपवर्तन के पश्चात एक स्थान पर अभिसरित (केन्द्रित ) करता है इसलिए इसे अभिसारी लेंस भी कहते हैं
    2.अवतल लेंस -अवतल लेंस किनारों से मोटा व बीच में से पतला होते है अवतल लेंस प्रकाश की किरणों को अपवर्तन के पश्चात अपसरित ( फैला) देता है इसलिए इसे अपसारी लेंस भी कहते है  
  31. अवतल दर्पण के उपयोग लिखिए
    1.अवतल दर्पण का उपयोग वाहनों के अग्रदीपों में प्रकाश का शक्तिशाली समांतर किरण पुंज प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
    परावर्तक टेलीस्कोप मेंं अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है
    2.उपग्रहों से प्राप्त संकेतों को एकत्रित कर रिसीवर तक पहुंचाने के लिए सेटेलाइट डिस एन्टीना में अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है
    3.दन्त विशेषज्ञों द्वारा दान्तो को बङा देखने के लिए अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है 
    4.अवतल दर्पण का उपयोग चेहरे का बड़ा प्रतिबिंब देखने के लिए सेविंग दर्पण के रूप मे किया जाता है 
  32. वास्तविक व आभासी प्रतिबिम्ब में अन्तर लिखिए
    वास्तविक प्रतिबिम्ब 
    1.प्रकाश की किरणें परावर्तन के पश्चात जब किसी बिंदु पर वास्तव मिलती है तो बनने वाला प्रतिबिंब वास्तविक प्रतिबिंब कहलाता है 
    2.वास्तविक प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है
    3.वास्तविक प्रतिबिंब सदैव उल्टे बनते हैं
    आभासी प्रतिबिम्ब 
    1.प्रकाश की किरणें परावर्तन के पश्चात जब वास्तव में नहीं मिलती है बल्कि उन्हें पीछे की और बढ़ाने पर मिलती हुई प्रतीत होती है तो बनने वाला प्रतिबिंब आभासी प्रतिबिंब कहलाता है 
    2.आभासी प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त नही किया जा सकता है
    3.आभासी प्रतिबिंब सदैव सीधे बनते हैं 
  33. प्रकाश के परावर्तन से क्या अभिप्राय है
    जब कोई प्रकाश की किरण एक माध्‍यम से चलकर दूसरे माध्‍यम की सतह से टकराकर वापस उसी माध्‍यम में लौट आती है तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं। परावर्तन दो प्रकार का होता है 
    1.नियमित परावर्तन- चिकने पृष्ठ द्वारा प्रकाश को किसी विशिष्ट दिशा में परिवर्तित करने की घटना नियमित परावर्तन कहलाती है 


    2.विसरित परावर्तन- खुदरे पृष्ठ द्वारा प्रकाश को सभी दिशाओं में परावर्तित करने (बिखेरने) की घटना विसरित परावर्तन कहलाती है 
  34. निकट दृष्टि दोष व दूर दृष्टि दोष से क्या अभिप्राय है 
    1.निकट दृष्टि दोष ( मायोपिया) – इस दोष में व्यक्ति को निकट की वस्तुएं तो साफ दिखाई देती है परन्तु दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती है इस दोष में नेत्र की वक्रता बढ जाती है जिससे दूर बिन्दु अनन्त पर न होकर पास आ जाता है इसलिए वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना से पहले बन जाता है।
    इस दोष के निवारण के लिए उचित क्षमता केअवतल लेंस का उपयोग किया जाता है 

    2.दूर/ दीर्घ दृष्टि दोष – इस दोष में व्यक्ति को दूर की वस्तुएं तो स्पष्ट दिखाई देती है परन्तु पास की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती है इस दोष में नेत्र का निकट बिन्दु दूर चला जाता है इसलिए वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना के बाद बनता है।
    इस दोष के निवारण के लिए उचित क्षमता का उत्तल लेंस का उपयोग किया जाता है
  35. अवतल लैंस से प्रतिबिंब निर्माण समझाइए 
    1.जब वस्तु अनंत पर हो
    प्रतिबिंब फोकस F1 पर बनता है
    प्रतिबिम्ब आभासी व सीधा बनता है
    प्रतिबिम्ब अत्याधिक छोटा बनता है

    2.जब वस्तु अनंत व प्रकाश केंद्र के बीच कहीं भी हो
    प्रतिबिंब फोकस F1 व प्रकाश केंद्र के बीच बनता है
    प्रतिबिंब आभासी व सीधा बनता है
    प्रतिबिम्ब छोटा बनता है
  36. उत्तल दर्पण से प्रतिबिंब निर्माण समझाइए
    1.जब वस्तु अनंत पर हो
    प्रतिबिंब दर्पण के पीछे फोकस पर बनता है
    प्रतिबिम्ब आभासी व सीधा बनता है
    प्रतिबिम्ब अत्याधिक छोटा बनता है

    2.जब वस्तु अनंत व ध्रुव के बीच कहीं भी हो
    प्रतिबिंब दर्पण के पीछे ध्रुव व फोकस के बीच बनता है
    प्रतिबिंब आभासी व सीधा बनता है
    प्रतिबिम्ब छोटा बनता है
  37. गोलीय दर्पण से सम्बन्धित निम्न पदों को समझाइए।
    1.ध्रुव – गोलीय दर्पण के परावर्तक पृष्ठ का मध्य बिन्दु ध्रुव कहलाता है।
    2.वक्रता केन्द्र –गोलीय दर्पण को जिस गोले का कटा हुआ भाग माना जाता है उस गोले का केंद्र वक्रता केंद्र कहलाता है 
    3.वक्रता त्रिज्या – गोलीय दर्पण को जिस गोले का कटा हुआ भाग माना जाता है उस गोले की त्रिज्या वक्रता त्रिज्या कहलाती है 
    4.मुख्य अक्ष – गोलीय दर्पण के ध्रुव व वक्रता केन्द्र को मिलाने वाली रेखा मुख्य अक्ष कहलाती है।
    5.मुख्य फोकस –अवतल दर्पण की मुख्य अक्ष के समान्तर आने वाली प्रकाश की किरणे परावर्तन के पश्चात मुख्य अक्ष पर जिस बिन्दु पर मिलती है उसे अवतल दर्पण का फोकस कहते हैं। 
    उत्तल दर्पण की मुख्य अक्ष के समान्तर आने वाली प्रकाश की किरणे परावर्तन के पश्चात मुख्य अक्ष के एक बिन्दु आती हूई प्रतीत होती है उसे उत्तल दर्पण का फोकस कहते हैं। 
    6.फोकस दूरी (f)- गोलीय दर्पण के ध्रुव व फोकस के बीच की दूरी को फोकस दूरी कहलाती हैं।
    7.द्वारक- गोलीय दर्पण के परावर्तक पृष्ठ की वृत्ताकार सीमा रेखा का व्यास दर्पण का द्वारक कहलाता है
  38. गोलीय लेंस से संबंधित निम्न पदों को परिभाषित कीजिए
    1.वक्रता केंद्र -लेंस को जिन गोलो का कटा हुआ भाग माना जाता है उन दोनों के केंद्र वक्रता केन्द्र कहलाते हैं 2.वक्रता त्रिज्या- लेंस को जिन गोलो का कटा हुआ भाग माना जाता है उन गोलो की त्रिज्या वक्रतात्रिज्या कहलाती है
    3.मुख्य अक्ष- किसी लेंस के वक्रता केंद्रो को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा मुख्य अक्ष कहलाती है
    4.प्रकाशिक केंद्र -किसी लेंस की मुख्य अक्ष पर स्थित वह बिंदु जहां से गुजरने वाली प्रकाश की किरण बिना मुङे सीधी निकल जाती है
    5.मुख्य फोकस - मुख्य के समांतर आने वाली प्रकाश की किरणें अपवर्तन के पश्चात मुख्य अक्ष पर जिस बिंदु पर मिलती है अथवा मिलती हुई प्रतीत होती है उसे मुख्य फोकस कहते हैं
    6.फोकस दूरी- लेंस के प्रकाशिक केंद्र व मुख्य पक्ष के बीच की दूरी फोकस दूरी कहलाती है 
  39. मानव नेत्र की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए। (2020)
    मानव नेत्र ऑटोफोक्स कैमरे की तरह कार्य करती है इसके निम्न भाग होते है 
    1. श्वेत पटल – यह नेत्र की सबसे बाहरी परत है जो अपारदर्शी होती है इसे दृढ पटल भी कहते है 
    2.रक्त पटल - श्वेत पटल के नीचे रक्त वाहिकाओं की एक परत होती है जिसे रक्त पटल या मध्य पटल कहते हैं यह पटल भी अपारदर्शक होती है यह पटल रेटीना को ऑक्सीजन व पोषण प्रदान करती है तथा आंख में आने वाली वाले प्रकाश का अवशोषण कर आंख की भीतरी दीवारों से प्रकाश के परावर्तन को रोकती है 
    3.दृष्टि पटल (रेटिना)- यह आंख की सबसे भीतरी परत है जो पारदर्शक होती है रेटिना में दो तरह की प्रकाश ग्राही कोशिकाएं पाई जाती है रेटिना पर वस्तु का उल्टा प्रतिबिम्ब बनता है जिसे मस्तिष्क उचित संयोजन करके हमें सीधा दिखाता है। रेटीना पर उपस्थित पीत बिंदु पर वस्तु का सबसे अच्छा प्रतिबिंब बनता है 
    4.कॉर्निया – श्वेत पटल का आगे का भाग उभरा हुआ पारदर्शक भाग काॅर्निया कहलाता है आंख में प्रकाश कोर्निया से ही होकर प्रवेश करता है
    5.परितारिका- कॉर्निया के ठीक पीछे मांसपेशियों का एक अपारदर्शी काला पर्दा होता है। जिसे परितारिका कहते है इसके बीच में एक छिद्र होता है। 
    6.पुतली - परितारिका के बीच वाले छिद्र को पुतली कहते हैं परितारिका के संकुचन व फैलने से पुतली का आकार बदलता है तीव्र प्रकाश में इसका आकार कम हो जाता है एवं कम प्रकाश में इसका आकार बढ जाता है है इस प्रकार यह नियंत्रित प्रकाश को ही आँख में प्रवेश करने देती है
    7.नेत्र लेंस – परितारिका के ठीक पीछे एक लचीला पारदर्शक पदार्थ का उतल लेंस होता है जो मांसपेशियों की सहायता से अपने स्थान पर रहता है। यह लैंस वस्तु का वास्तविक, उल्टा व छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है 
    8. जलीय द्रव – नेत्र लेंस व कॉर्निया के मध्य पारदर्शक द्रव भरा रहता है। यह द्रव नेत्र की आकृति को गोल बनाये रखता है एवं कार्निया व अन्य भागों को पोषण प्रदान करता है 
    9..काचाभ द्रव – नेत्र लेंस व रेटिना के मध्य पारदर्शक द्रव भरा रहता है। जिसे काचाभ द्रव कहते हैं।
  40. अवतल दर्पण से प्रतिबिम्ब निर्माण समझाइए
    1.जब वस्तु अनंत पर हो-
    प्रतिबिंब मुख्य फोकस पर बनता है
    प्रतिबिम्ब वास्तविक और उल्टा बनता है
    प्रतिबिम्ब अत्यधिक छोटा बिंदु जैसा बनता हैै

    2.जब वस्तु वक्रता केंद्र व अनंत के मध्य हो
    प्रतिबिंब फोकस हुए वक्रता केंद्र के बीच बनता है
    प्रतिबिम्ब वास्तविक व उल्टा बनता है
    प्रतिबिंब छोटा बनता है

    3.जब वस्तु वक्रता केंद्र पर हो
    प्रतिबिंब वक्रता केंद्र पर बनता है
    प्रतिबिम्ब वास्तविक व उल्टा बनता है
    प्रतिबिम्ब स्तु के बराबर बनता है

    4.जब वस्तु वक्रता केंद्र व फोकस के मध्य हो
    प्रतिबिंब वक्रता केंद्र से परे बनता है
    प्रतिबिम्ब वास्तविक व उल्टा बनता है
    प्रतिबिम्ब वस्तु से बड़ा बनता है

    5.जब वस्तु मुख्य फोकस पर हो तो-
    प्रतिबिंब अनंत पर बनता है
    प्रतिबिम्ब वास्तविक एवं उल्टा बनता है
    प्रतिबिम्ब बहुत बड़ा बनता है

    6.जब वस्तु फोकस व ध्रुव के मध्य हो
    प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बनता है
    प्रतिबिम्ब आभासी व सीधा बनता है
    प्रतिबिम्ब वस्तु से बड़ा बनता है
  41. उत्तल लैस से प्रतिबिम्ब निर्माण समझाइए
    1.जब वस्तु अनंत पर हो-
    प्रतिबिंब मुख्य फोकस F2 पर बनता है
    प्रतिबिम्ब वास्तविक और उल्टा बनता है
    प्रतिबिम्ब अत्यधिक छोटा बिंदु जैसा बनता हैै

    2.जब वस्तु अनंत व 2F1 के मध्य हो-
    प्रतिबिंब F2 व 2F2 के बीच बनता है
    प्रतिबिम्ब वास्तविक व उल्टा बनता है
    प्रतिबिंब छोटा बनता है

    3.जब वस्तु 2F1 पर हो-
    प्रतिबिंब 2F2 पर बनता है
    प्रतिबिम्ब वास्तविक व उल्टा बनता है
    प्रतिबिम्ब वस्तु के बराबर बनता है
    b
    4.जब वस्तु 2F1 व F1के मध्य हो-
    प्रतिबिंब 2F2 व अनन्त से परे बनता है
    प्रतिबिम्ब वास्तविक व उल्टा बनता है
    प्रतिबिम्ब वस्तु से बड़ा बनता है

    5.जब वस्तु F1 पर हो-
    प्रतिबिंब अनंत पर बनता है
    प्रतिबिम्ब वास्तविक एवं उल्टा बनता है
    प्रतिबिम्ब बहुत बड़ा बनता है

    6.जब वस्तु F1 व प्रकाश केंद्र के मध्य हो
    प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बनता है
    प्रतिबिम्ब आभासी व सीधा बनता है
    प्रतिबिम्ब वस्तु से बड़ा बनता है
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10. विद्युत धारा


  1. विद्युत आवेश का मात्रक लिखिए
    कूलाम
  2. भारत में प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति कितनी है
    50 हर्ट्ज
  3. घरों में विद्युत संयोजन किस प्रकार किया जाता है
    समांतर क्रम में
  4. एक अश्वशक्ति में कितने वाट होते हैं 
    746 वाट
  5. विद्युत जनित्र किस सिद्धांत पर कार्य करता है
    विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर
  6. विद्युत धारा का मापन किसके द्वारा किया जाता है
    अमीटर के द्वाराअमीटर को विद्युत परिपथ में श्रेेेेणी क्रम में  जोङा जाता है 
  7. एंपियर से क्या अभिप्राय है
    किसी विद्युत परिपथ में प्रति सेकंड एक कूलाम आवेश प्रवाह से उत्पन्न धारा 1 एंपियर कहलाती है
  8. विद्युत जनित्र किसे कहते है
    यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने वाली युक्ति को विद्युत जनित्र कहते हैं। 
  9. विद्युत विभव से क्या अभिप्राय है
    किसी बिंदु पर विद्युत विभव एकांक धनावेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किए गए कार्य के बराबर होता है 
  10. विभवांतर का मापन किसके द्वारा किया जाता है
    विभवांतर का मापन वोल्टमीटर के द्वारा किया जाता है वोल्टमीटर को विद्युत परिपथ में समांतर क्रम में जोड़ा जाता है
  11. चुंबकीय फ्लक्स किसे कहते हैं
    किसी चुंबकीय क्षेत्र में रखे पर से गुजरने वाली चुंबकीय बल रेखाओं की संख्या कोचुंबकीय फ्लक्स कहते हैं इसका मात्रक वेबर होता है
  12. गैल्वेनोमीटर किसे कहते है
    विद्युत परिपथ में विद्युत धारा की उपस्थिति बताने वाला उपकरण गैल्वेनोमीटर कहलाता है
  13. प्रत्यावर्ती धारा किसे कहते हैं
    वह धारा जो निश्चित समय अंतराल के बाद अपनी दिशा में परिवर्तन कर लेती है प्रत्यावर्ती धारा कहलाती है
  14. चुंबकीय क्षेत्र किसे कहते हैं
    चुंबक के चारों ओर वह क्षेत्र जिसमें चुंबकीय प्रभाव महसूस किया जाता है चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है
  15. विद्युत चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं
    किसी कुंडली एवं चुम्बक  के बीच सापेक्ष गति के कारण कुंडली में उत्पन्न विद्युत प्रभाव को विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहते हैं
  16. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं किसे कहते हैं (2020 केवल चित्र)
    किसी चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र को प्रदर्शित करने वाली काल्पनिक रेखाएं चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं कहलाती है
  17. प्रतिरोध किसे कहते हैं इसका मात्रक क्या होता है
    किसी चालक का वह गुण जो उसमेंआवेश प्रवाह का विरोध करता है प्रतिरोध कहलाता है प्रतिरोध का मात्रक ओम ( 
    Ω))होता है
  18. प्रतिरोधकता किसे कहते हैं
    इकाई लंबाई व इकाई अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल वाले तार का प्रतिरोध विशिष्ट प्रतिरोध  प्रतिरोधकता कहलाता है
  19. विद्युत धारा के तापीय प्रभाव से क्या अभिप्राय है
    जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो वह गर्म हो जाता है इसे विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं
  20. विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव क्या है
    जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है इस में विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं
  21. एक ओम से क्या अभिप्राय है
    किसी चालक तार में 1 एंपियर विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उसके सिरों के मध्य 1 वोल्ट विभवांतर उत्पन्न होता है तो उस चालक का प्रतिरोध एक ओम कहलाता है
  22. ओम का नियम क्या है
    स्थिर ताप पर किसी चालक के दो सिरों के बीच उत्पन्न विभवांतर उस चालक में प्रवाहित विद्युत धारा के समानुपाती होता है
           V  I
           V = IR
  23. प्रत्यावर्ती धारा जनित्र से उत्पन्न धारा का मान किन कारकों पर निर्भर करता है
    कुंडली में फेरों की संख्या
    कुंडली का क्षेत्रफल
    चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता
    घूर्णन वेग
  24. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण लिखिए
    1.चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव में विलीन हो जाती है
    2.चुंबक के भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की होती है
    3.चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक बंद वक्र होती है
    4.चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक दूसरे को काटती नहीं है
  25. चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के नियम लिखिए
    1.मैक्सवेल का दक्षिणावर्त पेच नियम- इस नियम के अनुसार जब किसी पेच को दक्षिणावर्त इस प्रकार घुमाया जाए कि पेच की नोक विद्युत धारा की दिशा में आगे बढ़े तो पेच को घुमाने की दिशा चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को व्यक्त करती है
    2.दक्षिण हस्त नियम - जब किसी धारावाही चालक को दाहिने हाथ से इस प्रकार पकड़े की अंगूठा धारा की दिशा की ओर रहे तो मुड़ी हुई अंगुलियों की दिशा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को व्यक्त करती है
  26. विद्युत शक्ति किसे कहते हैं इसका मात्रक लिखिए 
    किसी विद्युत परिपथ में धारा प्रवाहित करने पर प्रति सेकंड किया गया कार्य विद्युत शक्ति का लाता है इसका मात्रक वाट होता है 
  27. विधुत धारा किसे कहते है
    किसी चालक में आवेश प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते है विद्युत धारा का मात्रक एम्पीयर होता है
  28. प्रतिरोध किन-किन कारको पर निर्भर करता है
    1.चालक की लंबाई- किसी चालक तार का प्रतिरोध उसकी लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है
                        L
    2. अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल- किसी चालक तार का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है
    3.पदार्थ की प्रकृति -विद्युत के अच्छे चालक का प्रतिरोध कम तथा चालकता घटने पर प्रतिरोधत का मान बढ़ता है
  29. जूल का तापन नियम क्या है 
    जब किसी प्रतिरोध में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो उस में उत्पन ऊष्मा का मान (H = I2Rt) -
    1.प्रतिरोध में प्रवाहित विद्युत धारा के वर्ग के समानुपाती होता है 
       H  ∝  I2
    2.प्रतिरोध के समानुपाती होता है 
      H ∝ R
    3.प्रतिरोध में धाराप्रवाह के समय के समानुपाती होता है
      H ∝ t
     इसे ही जूल का तापन नियम कहते है 
  30. श्रेणी क्रम संयोजन से क्या अभिप्राय है श्रेणी क्रम संयोजन के लिए तुल्य प्रतिरोध की गणना कीजिए
    जब दो या दो से अधिक प्रतिरोधो को क्रमशः छोर से छोर मिलाते हुए संयोजित किया जाता है तो इस प्रकार के संयोजन को श्रेणी क्रम संयोजन कहते हैं

    माना श्रेणी क्रम में संयोजित प्रतिरोध R1, R2 व R3 में धारा प्रवाहित हो रही है तथा इन प्रतिरोधो के सिरों के मध्य उत्पन्न विभवांतर क्रमशः V1,V2 व V3 है तो ओम के नियमानुसार प्रत्येक प्रतिरोध के लिए विभावान्टर का मान निम्न होगा    
                       V1 = IR1
                       V2 = IR2
                       V3 = IR3
    यदि बैटरी का विभवांतर हो तो
                       V = V1 + V2 + V3
                       V = IR1 + IR2 + IR3
                       V = I( R1 + R2 + R3)               .........(1)
    यदि परिपथ का तुल्य प्रतिरोध हो तो सम्पूर्ण परिपथ के लिए ओम के नियमानुसार-
                       V = IR                            ...........(2)
    समी० (1) वह (2) से
                        IR = I( R1 + R2 + R3)
                         R = R1 + R2 + R3       
    अतः श्रेणी क्रम संयोजन में परिपथ का कुल तुल्य प्रतिरोध सभी प्रतिरोधो के योग के बराबर होता है
  31. समांतर क्रम संयोजन से क्या अभिप्राय है समांतर क्रम संयोजन के लिए तुल्य प्रतिरोध की गणना कीजिए
     जब दो या दो से अधिक प्रतिरोधो को दो सिरों के मध्य संयोजित किया जाता है तो इसे समांतर क्रम संयोजन कहते हैं
    माना तीन प्रतिरोध R1, R2 व R3 समांतर क्रम में संयोजित है इनमें क्रमशः I1, I2 व I3 धारा प्रवाहित होती है इन प्रतिरोधो के सिरों पर उत्पन्न विभवांतर V हो तो ओम के नियमानुसार प्रत्येक प्रतिरोध में प्रवाहित धारा का मान  निम्न होगा
                    
     
        
    यदि परिपथ में प्रवाहित कुल धारा I हो तो
                             I= I1+ I2+ I3  
                    ........(1)
    यदि परिपथ का तुल्य प्रतिरोध R हो तो सम्पूर्ण परिपथ में प्रवाहित धारा का मान निम्न होगा
     ....,............(2)
    समी० (१) व (२) से
            
                       
               
  32. विभवांतर किसे कहते हैं इसका मात्रक लिखिए
    किसी विद्युत परिपथ में एकांक धनावेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक लाने में किया गया कार्य उन दोनों बिंदुओं के बीच विभवांतर होता है इसका मात्रक वोल्ट होता है 
  33. दिये गए विद्युत परिपथ में निम्न की गणना कीजिए
    (i)परिपथ का कुल प्रतिरोध 
    (ii)परिपथ की कुल धारा

    (i) परिपथ में प्रतिरोध श्रेणी क्रम में संयोजित है अतः श्रेणी क्रम में कुल प्रतिरोध-
    R= R1 +R2
    R =  10+30
        =  40 Ω
    (ii) परिपथ में कुल धारा
    I = V/R
      =  40/40
      = 1 एम्पीयर
  34. दिए गए विद्युत परिपथ के मध्य तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए   
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