GSSS BINCHAWA

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GSSS KATHOUTI

GSSS KATHOUTI

GSSS BUROD

2.अम्ल, क्षारक एवं लवण




सूचक
वे पदार्थ जो अपने रंग और गंध में परिवर्तन के द्वारा किसी विलयन में अम्ल एवं क्षारक की उपस्थिति को सूचित करते हैं।  सूचक कहलाते है
प्राकृतिक सूचक:  प्राकृतिक पदार्थों से प्राप्त होने वाले सूचक प्राकृतिक सूचक कहलाते है 
Example - लिटमसहल्दीलाल पत्ता गोभीगुड़हल का पुष्प
संश्लेषित सूचक: चक प्रयोगशाला में निर्मित सूचक संश्लेषित सूचक कहलाते है
Example -मेथिल ऑरेंज एवं फीनॉल्फथेलिन
लिटमस विलयन बैंगनी रंग का रंजक होता है जो थैलोफाइटा समूह के लिचेन पौधे से निकाला जाता है। लिटमस विलयन जब न तो अम्लीय होता है न ही क्षारकीयतब यह बैंगनी रंग का होता है।
गंधीय सूचक : कुछ ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी गंध अम्लीय या क्षारकीय माध्यम में बदल जाती है। इन्हें गंधीय सूचक कहते हैं।
Example -वैनिलाप्याज एवं लौंग का तेल 
सार्वत्रिक सूचक : सार्वत्रिक सूचक अनेक सूचकों का मिश्रण होता हैजो किसी विलयन में हाइड्रोजन आयन की विभिन्न सांद्रता को विभिन्न रंगों में प्रदर्शित करते हैं।  
Example - pH स्केल
अम्ल
    1. अम्ल  स्वाद में खट्टे होते है
    2. अम्ल नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं। 
    3. 
क्षारक 
    1. क्षारक का स्पर्श साबुन की तरह   स्वाद कड़वा होता है 
    2. क्षारक लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं। 
    3. इनकी प्रकृति संक्षारक होती है। 
1. अम्ल एवं क्षारक की धातु के साथ अभिक्रिया 
धातु व अम्ल की  अभिक्रिया  
अम्ल धातु से अभिक्रिया कर संगत लवण और हाइड्रोजन गैस बनाते है :
अम्ल  +  धातु    लवण  + हाइड्रोजन गैस 
Example -
जिंक सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके जिंक सल्फेट और हाइड्रोजन गैस बनाते है |
H2 SO4  +  Zn       ZnSO4   +   H2  
जिंक हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया करके जिंक क्लोराइड और हाइड्रोजन गैस बनाते है |
 2 HCl   +  Zn      ZnCl2    +    H2
धातु व क्षारक की अभिक्रिया
क्षारक धातुओं से अभिक्रिया कर संगत धातु का लवण और हाइड्रोजन गैस बनाते हैं | 
क्षारक  +  धातु      लवण  +  हाइड्रोजन गैस 
सोडियम हाइड्रोऑक्साइड  जिंक के साथ अभिक्रिया कर सोडियम ज़िन्केट और हाइड्रोजन गैस देता है | 
2NaOH    +   Zn   Na2ZnO2       + H2
2. धातु कार्बोनेट/धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अम्ल की अभिक्रिया
सभी धातु कार्बोनेट और हाइड्रोजनकार्बोनेट अम्ल के साथ अभिक्रिया कर संगत लवणकार्बन डाइऑक्साइड और जल प्रदान करता है |
धातु कार्बोनेट + अम्ल  लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + जल
सोडियम कार्बोनेट , हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया कर सोडियम क्लोराइडकार्बन डाइऑक्साइड और जल प्रदान करता है | 
Na2CO3  + HCl    2NaCl  + H2O + CO2 
इसी प्रकार सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट , हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया कर सोडियम क्लोराइडकार्बन डाइऑक्साइड और जल प्रदान करता है | 
धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट + अम्ल  लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + जल
NaHCO3  +  HCl    NaCl  + H2O + CO2 
उदासीनीकरण अभिक्रिया 
अम्ल व क्षार परस्पर क्रिया करके एक दूसरे के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं तथा लवण व जल बनाते हैं इसे उदासीनीकरण की अभिक्रिया कहते हैं यह ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया होती है
अम्ल  + क्षारक             लवण   + जल
Example-
सोडियम हाइड्रोऑक्साइडहाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करके साधारण नमक और जल बनाता है
NaOH + HCl  NaCl + H2O
सोडियम हाइड्रोऑक्साइडनाइट्रिक अम्ल से अभिक्रिया करके सोडियम नाइट्रेट और जल बनाता है |
NaOH  + HNO3   NaNO3 +  H2
पोटेशियम हाइड्रोऑक्साइडसल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया करके पोटेशियम सल्फेट और जल बनाता है
2KOH + H2SO4  K2SO4 + 2H2
अम्ल और  धात्विक ऑक्साइड की अभिक्रिया
अम्ल एवं क्षारक की अभिक्रिया के समान ही अम्ल धात्विक ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करके लवण एवं जल प्रदान करते हैंअतः धात्विक ऑक्साइड को क्षारकीय ऑक्साइड भी कहते हैं।
अम्ल  +  धातु ऑक्साइड  लवण +  जल
Example-
कॉपर ऑक्साइड हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया कर कॉपर क्लोराइड एवं जल प्रदान करता है |
CuO  +  2HCl     CuCl2   +  H2O
क्षारक और अधातु ऑक्साइड का अभिक्रिया :
क्षारक अधातु ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करके लवण एवं जल का निर्माण करते है।
क्षारक   +  अधातु ऑक्साइड  लवण +  जल 
Example-
जब कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (चूने का पानी) में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित की जाती है कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड जो एक क्षारक हैकार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करके लवण एवं जल का निर्माण करता है। चूँकि यह क्षारक एवं अम्ल के बीच होने वाली अभिक्रिया के समान हैअतः हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि अधात्विक ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं।
 Ca(OH)2  + CO2      CaCO3  H2O
जलीय विलियन में अम्ल व क्षारक 
अम्ल का जलीय विलियन 
अम्ल जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन [H+] उत्पन्न करते हैतथा इसी कारण उनके  गुणधर्म अम्लीय होते है । अम्लों से हाइड्रोजन आयन [H+]  केवल जलीय विलियन में ही उत्पन्न होते है ये हाइड्रोजन आयन [H+] स्वतंत्र रूप में नहीं रह सकते है इसलिए हाइड्रोजन आयन [H+] जल के साथ मिलकर हाइड्रोनियम आयन [H3O+] के रूप में पाए जाते है 
HCl         जल             H+Cl-
H+  H2 H3O+
HCl + H2  H3O+ + Cl- 
जल की उपस्थिति में HCl में हाइड्रोजन आयन उत्पन्न होते हैं। इसलिए HCl का जलीय विलियन अम्लीय होता है जबकि  जल की अनुपस्थिति में HCl अणुओं से H+ आयन पृथक नहीं हो सकते हैं। इसलिए शुष्क HCl अम्लीय गुण प्रदर्शित नहीं करता है 
क्षारक जलीय विलियन में हाइड्रॉक्साइड आयन [OH-] उत्पन्न करते हैं।
NaOH   जल     Na+ + OH-
सभी क्षारक जल में घुलनशील नहीं होते हैं। जल में घुलनशील क्षारक को क्षार कहते हैं ।
जल में अम्ल या क्षारक के घुलने की प्रक्रिया अत्यंत ऊष्माक्षेपी होती है। इसलिए जल में सांद्र नाइट्रिक अम्ल या सल्फ्यूरिक अम्ल को मिलाते समय अत्यंत सावधानी रखनी चाहिए। अम्ल को सदैव धीरे-धीरे तथा जल को लगातार हिलाते हुए जल में मिलाना चाहिए। जल में  सांद्र अम्ल  मिलाने पर उत्पन्न हुई ऊष्मा के कारण मिश्रण आस्फलित होकर बाहर आ सकता है तथा आप जल सकते हैं। साथ ही अत्यधिक स्थानीय ताप के कारण प्रयोग में उपयोग किया जा रहा काँच का पात्र भी टूट सकता है।
तनुकरण
जल में अम्ल या क्षारक मिलाने पर क्रमशः H3O+  OH आयन की सांद्रता में प्रति इकाई आयतन में कमी हो जाती है। इस प्रक्रिया को तनुकरण कहते हैं
प्रबल अम्ल 
वे अम्ल जो जलीय विलियन में पूर्णतया आयनित हो जाते हैं  प्रबल अम्ल कहलाते हैं 
या 
जलीय विलियन में अधिक संख्या में H + आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल प्रबल अम्ल कहलाते हैं
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) 
सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) 
नाइट्रिक अम्ल( HNO3)
दुर्बल अम्ल 
वे अम्ल जो जलीय विलियन में पूर्णतया आयनित नहीं होते हैं दुर्बल अम्ल कहलाते हैं 
या 
जलीय विलियन मेंकम H+  आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल दुर्बल अम्ल कहलाते हैं
जैसे एसिटिक अम्ल,  कार्बनिक अम्ल 
प्रबल क्षार 
वे क्षार जो जलीय विलियन में पूर्णतया आयनित हो जाते हैं प्रबल क्षार कहलाते हैं 
जैसे सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH), पोटेशियम हाइड्रोक्साइड (KOH)
दुर्बल क्षार 
वे क्षार जो जलीय विलियन में पूर्णतया आयनित नहीं होते हैं दुर्बल क्षार कहलाते हैं 
जैसे मैग्नीशियम हाइड्रोक्साइडकैल्शियम हाइड्रोक्साइड 
pH स्केल  
किसी विलियन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सांद्रता ज्ञात करने वाली स्केल pH स्केल कहलाती है pH स्केल का निर्माण सोरेनसन ने किया pH स्केल में p जर्मन शब्द पुसांस अर्थात शक्ति का सूचक तथा H हाइड्रोजन आयनो का सूचक है pH स्केल से अम्ल क्षार की सामर्थ्य ज्ञात की जाती है यह एक प्रकार का सार्वत्रिक सूचक होता है |

किसी भी उदासीन विलयन के pH का मान 7 होगा |
यदि pH स्केल में किसी विलयन का मान 7 से कम है तो यह अम्लीय होगा pH मान 7 से कम होने पर H+ आयन की सांद्रता बढती  है | अर्थात अम्ल की शक्ति बढ़ रही है |
यदि pH का मान 7 से अधिक है वह क्षार होगा pH  मान 7 से अधिक होने पर OH- की सांद्रता बढती है अर्थात क्षारक की शक्ति बढ़ रही है |  
विभिन्न पदार्थों  का pH मान 
जठर रस                      1.2
नींबू का रस                   2.2
शुद्ध जल                    7
रक्त                           7.4
मिल्क ऑफ मैग्नीशिया        10
NaOH विलयन                14
दैनिक जीवन में pH का महत्त्व
1. पौधे एवं पशुओं की  pH के प्रति संवेदनशील
हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के बीच कार्य करता है। जीवित प्राणी केवल संकीर्ण pH परास में ही जीवित रह सकते हैं। वर्षा के जल की pH मान जब 5.6 से कम हो जाती है तो वह अम्लीय वर्षा कहलाती है। अम्लीय वर्षा का जल जब नदी में प्रवाहित होता है तो नदी के जल के pH का मान कम हो जाता है। ऐसी नदी में जलीय जीवधारियों की उत्तरजीविता कठिन हो जाती है। शुक्र का वायुमंडल सल्फ्यूरिक अम्ल के मोटे श्वेत एवं पीले बादलों से बना है। अच्छी उपज के लिए पौधों को एक विशिष्ट pH परास की आवश्यकता होती है।
2. हमारे पाचन तंत्र का pH
हमारा उदर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल उत्पन्न करता है। यह उदर को हानि पहुँचाए बिना भोजन के पाचन में सहायक होता है। अपच की स्थिति में उदर अत्यधिक मात्र में अम्ल उत्पन्न करता है जिसके कारण उदर में दर्द एवं जलन का अनुभव होता है। इस दर्द से मुक्त होने के लिए ऐन्टैसिड जैसे क्षारकों का उपयोग किया जाता है। ऐन्टैसिड अम्ल की आधिक्य मात्र को उदासीन करता है। इसके लिए मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (मिल्क ऑपफ मैगनीशिया) जैसे दुर्बल क्षारक का उपयोग किया जाता है।
3. pH परिवर्तन के कारण दंत-क्षय
मुँह के pH का मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय प्रारंभ हो जाता है। दाँतों का इनैमल कैल्सियम हाइड्रोक्सीएपेटाइट से बना होता है जो कि शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है। यह जल में नहीं घुलता लेकिन मुँह की pH का मान 5.5 से कम होने पर यह संक्षारित हो जाता है। मुँह में उपस्थित बैक्टीरियाभोजन के पश्चात मुँह में अवशिष्ट शर्करा एवं खाद्य पदार्थों का निम्नीकरण करके अम्ल उत्पन्न करते हैं। भोजन के बाद मुँह साफ करने से इससे बचाव किया जा सकता है। मुँह की सफाई के लिए क्षारकीय दंत-मंजन का उपयोग करने से अम्ल की आधिक्य मात्रा को उदासीन किया जा सकता है जिसके परिणामस्वरूप दंत क्षय को रोका जा सकता है।
दंतक्षय क्या है समझाइए
भोजन के पश्चात मुख में उपस्थित जीवाणु दांतों पर लगे भोजन से क्रिया करके अम्ल उत्पन्न करते हैं जिससे मुख का pH 5.5 से कम हो जाता है और दांतों का इनैमल का क्षय होने लगता है अतः भोजन के पश्चात क्षारीय दंत समंजन का उपयोग करना चाहिए जो अम्ल को उदासीन कर देता है 
4. पशुओं एवं पौधों द्वारा उत्पन्न रसायनों से आत्मरक्षा
मधुमक्खी का डंक एक अम्ल छोड़ता है जिसके कारण दर्द एवं जलन का अनुभव होता है। डंक मारे गए अंग में बेंकिग सोडा जैसे दुर्बल क्षारक के उपयोग से आराम मिलता है। नेटल के डंक वाले बाल मेथैनॉइक अम्ल छोड़ते हैं जिनके कारण जलन वाले दर्द का अनुभव होता है।
प्रकृति उदासीनीकरण के विकल्प देती है
नेटल एक शाकीय पादप है जो जंगलों में पाया जाता है। इसके पत्तों में डंकनुमा बाल होते हैं जो अगर गलती से छू जाएँ तो डंक जैसा दर्द होता है। इन बालों से मेथैनॉइक अम्ल का स्राव होने के कारण दर्द होता है। पारंपरिक तौर पर इसका इलाज डंक वाले स्थान पर डॉक पौधे की पत्ती रगड़कर किया जाता है। ये पौधे अधिकतर नेटल के पास ही पैदा होते हैं।
विभिन्न प्राकृतिक पदार्थों में पाए जाने वाले अम्ल 
प्राकृतिक स्रोत     ⟹     अम्ल
सिरका                ऐसीटिक अम्ल  
खट्टा दूध (दही)        लैक्टिक अम्ल
संतरा                 सिट्रिक अम्ल
नींबू                   सिट्रिक अम्ल
इमली                 टार्टरिक अम्ल
चींटी का डंक          मेथैनॉइक अम्ल
टमाटर                ऑक्सैलिक अम्ल
नेटल का डंक          मेथैनॉइक अम्ल
लवण  
लवण अम्ल एवं क्षारक की  उदासीनीकरण अभिक्रिया से निर्मित आयनिक उत्पाद है |
अम्लीय लवण :-  अम्लीय लवण प्रबल अम्ल एवं दुर्बल क्षारक के आपसी अभिक्रिया के फलस्वरूप प्राप्त होता है इन लवणों का  pH मान 7 से कम होता है 
HCl    +  NH4OH    →  NH4Cl    H2O
प्रबल अम्ल  दुर्बल क्षारक       अम्लीय लवण 
उदासीन लवण :-  उदासीन लवण प्रबल अम्ल एवं दुर्बल क्षारक के आपसी अभिक्रिया से प्राप्त होता है |इन लवणों का  pH मान 7 होता है
HCl     +   NaOH         NaCl  +  H2O
प्रबल अम्ल      प्रबल क्षारक      उदासीन लवण 
क्षारकीय लवण :- क्षारकीय लवण प्रबल क्षारक एवं दुर्बल अम्ल की आपसी अभिक्रिया से प्राप्त  होता है |इन लवणों का  pH मान 7 से अधिक होता है
CH3COOH  + NaOH     CH3COONa +  H2O
दुर्बल अम्ल   प्रबल क्षारक        क्षारकीय लवण  
साधारण नमक से रसायन
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं सोडियम हाइड्रॉक्साइड के विलयन की अभिक्रिया से उत्पन्न लवण को सोडियम क्लोराइड कहते हैं। यह एक उदासीन लवण है।
विश्व के कई भागों में बड़े आकार के भूरे रंग के ठोस लवण का निक्षेप होता है। इसे खनिज नमक कहते हैं। 
इस प्रकार प्राप्त साधारण नमक हमारे दैनिक उपयोग के कई पदार्थों जैसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड,  बेंकिग सोडावाशिग सोडाविरंजक चूर्ण आदि के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा पदार्थ है।
सोडियम हाइड्रॉक्साइड [NaOH]
सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन से विद्युत प्रवाहित करने पर यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड उत्पन्न करता है। इस प्रक्रिया को क्लोर-क्षार प्रक्रिया कहते हैं क्योंकि इससे निर्मित उत्पाद - क्लोरीन (क्लोर) एवं सोडियम हाइड्रॉक्साइड (क्षार) होते हैं।
2NaCl + 2H2O  ⟶  2NaOH+ Cl2 + H2
क्लोरीन गैस ऐनोड पर मुक्त होती है एवं हाइड्रोजन गैस कैथोड पर कैथोड पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन का निर्माण भी होता है।
विरंजक चूर्ण [CaOCl2]
विरंजक चूर्ण का रासायनिक नाम कैल्शियम ऑक्सी क्लोराइड है विरंजक चूर्ण इसका सामान्य नाम है 
जब शुष्क बुझे हुए चूने की क्लोरीन से क्रिया कराई जाती है तो विरंजक चूर्ण का निर्माण होता है।
Ca(OH)2 + Cl2    →  CaOCl2 + H2O
शुष्क बुझा हुआ चूना
विरंचक चूर्ण का उपयोगः
1. वस्त्र व कागज उद्योग में विरंजक के रूप में
2. पीने वाले जल को जीवाणुओं से मुक्त करने के लिए।
3. रासायनिक उद्योगों में एक उपचायक के रूप में
बेकिंग सोडा [NaHCO3] 
इस यौगिक का रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट व सामान्य नाम बेकिंग सोडा है।
सोडियम क्लोराइड के जलीय विलियन की CO2  व अमोनिया से क्रिया करवाकर  बेकिंग सोडा  बनाया जाता है।
NaCl + H2O + CO2  + NH3   NaHCO3     +  NH4Cl 
बेकिंग सोडा का उपयोग
1. बेंकिग पाउडर [बेंकिग सोडा + टार्टरिक ] बनाने में
जब बेकिंग पाउडर को गर्म किया जाता है या जल मिलाया जाता है तो इस अभिक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड बनती है  कार्बन डाइऑक्साइड से पावरोटी या केक में खमीर उठता है इससे ये मुलायम एवं स्पंजी हो जाता है।
NaHCO3      Na2CO3+ H2+ CO2
2. सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट एक ऐन्टैसिड है। क्षारीय होने के कारण यह पेट में अम्ल की अधिकता को उदासीन करके राहत पहुँचाता है।
3. इसका उपयोग सोडा-अम्ल अग्निशामक में भी किया जाता है।
धोने का सोडा [Na2CO3.10H2O]
धोने के सोडे का रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट है 
सोडियम कार्बोनेट के पुनः क्रिस्टलीकरण से धोने का सोडा प्राप्त होता है।
Na 2CO3 + 10H2O        Na2CO3.10H2O
धोने के सोडे के उपयोग
सोडियम कार्बोनेट का उपयोग काँचसाबुन एवं कागज़ उद्योगों में होता है।
इसका उपयोग बोरेक्स जैसे सोडियम यौगिक के उत्पादन में होता है।
सोडियम कार्बोनेट का उपयोग घरों में साफ-सप़फाई के लिए होता है।
जल की स्थायी कठोरता को हटाने के लिए इसका उपयोग होता है।
प्लास्टर ऑफ पेरिस – 
जिप्सम को 373 पर गर्म करने पर यह जल के अणुओं का त्याग कर कैल्सियम सल्प़ेफट अर्धहाइड्रेट / हेमिहाइड्रेट बनाता है। इसे प्लास्टर ऑफ पेरिस कहते हैं। 
CaSO4.2H2   373   CaSO4.½H2O +1½H2
   जिप्सम                 प्लास्टर ऑफ पेरिस
प्लास्टर ऑफ पेरिस एक सफेद चूर्ण है जो जल मिलाने पर शीघ्र ही जमकर ठोस व कठोर हो जाता है एवं पुनः जिप्सम में बदल जाता है इसीलिए प्लास्टर ऑफ पेरिस को आर्द्रता रोधी बर्तनों में रखा जाता है  
CaSO4.½H2O +1½H2O      CuSO4.2H2O
प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग 
डॉक्टर टूटी हुई हड्डियों को सही जगह पर स्थिर रखने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग  करते हैं। 
प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग खिलौना बनाने में किया जाता है 
प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग सजावट का सामान एवं सतह को चिकना बनाने के लिए किया जाता है।
क्रिस्टलन का जल
लवण के इकाई सूत्र में उपस्थित जल के अणु की निश्चित संख्या क्रिस्टलन का जल कहलाती है
Example-
1. कॉपर सल्फेट [CuSO4.5H2O]
कॉपर सल्फेट में क्रिस्टलन के जल के पांच अणु होते है कॉपर सल्फेट क्रिस्टलन जल की उपस्थिति  के कारण रंगीन होता है जब कॉपर सल्फेट को गर्म करते हैं तो इसमें उपस्थित जल हट जाता है एवं लवण का रंग श्वेत हो जाता है।
2. धोने का सोडा [Na2CO3.10H2O]
धोने का सोडा में जल के दस अणु पाए जाते है

  1. दो संश्लेषित सूचकों के नाम लिखिए
    मैथिल ऑरेंज और फिनोफ्थलीन 
  2. चींटी के डंक में कौन सा अम्ल पाया जाता है
    फॉर्मिक अम्ल 
  3. लाइकेन से निष्कर्षित अम्ल क्षारक सूचक का नाम बताइए।
    लिटमस 
  4.  शुद्ध जल का ph मान क्या होता है?
    7
  5. किसी विलियन की उदासीन प्रकृति के लिए pH का मन कितना होताहै
  6. 7
  7. कठोर जल को मृदु जल में बदलने के लिए किसका उपयोग किया जाता है  
    धोने का सोडा [Na2CO3.10H2O]/ सोडियम कार्बोनेट 
  8. कोई विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है, इसका pH सम्भवतः क्या होगा?
    7 से अधिक 14 तक
  9. अपच का उपचार करने के लिए निम्न में से किस औषधि का उपयोग होता है ?
    ऐन्टैसिड (प्रतिअम्ल)
  10. कैल्सियम कार्बोनेट  [CaCO3के विविध रूपों के नाम लिखों ।
    चुना पत्थर , खडिया , संगमरमर 
  11. हमारे उदर में कौन सा अम्ल पाया जाता है
    हाइड्रोक्लोरिक अम्ल 
  12. बैंकिंग पाउडर के घटकों के नाम लिखिए 
    बेंकिग सोडा व टार्टरिक अम्ल 
  13. क्षार किसे कहते हैं ?
    जल में विलेय क्षारक क्षार कहलाते हैं। जैसे  NaOH
  14. दो प्राकृतिक संसूचकों के नाम लिखिए। 
    लिटमस पत्र  व  हल्दी
  15. मिल्क ऑफ मैग्नीशिया क्या है इसका क्या उपयोग है 
    मैग्नीशियम को मिल्क ऑफ़ मेग्निशिय्स कहते है इसका पेट की अम्लता दूर करने के लिए एन्टएसिड (प्रति अम्ल) के रूप में उपयोग किया जाता है 
  16. CaOCl₂ [ कैल्शियम ऑक्सी क्लोराइड] यौगिक का प्रचलित नाम क्या है 
    CaOCl [ कैल्शियम ऑक्सी क्लोराइड] का प्रचलित नाम    विरंजक चूर्ण [ ब्लीचिंग पाउडर ] है 
  17. pH किसे कहते हैं
    किसी विलियन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता[H+] का ऋणात्मक लघुगणक pH कहलाता है 
  18. दो सामान्य एण्टासिडों के नाम बताइए।
    1.मिल्क ऑफ़ मैगनीशिया Mg(OH)2
    2. बेकिंग सोडा [NaHCO3]

  19. धातु व अधातु ऑक्साइड की प्रकृति बताइए
    1.धातु ऑक्साइड-क्षारीय 
    2.अधातु ऑक्साइड-अम्लीय 

  20. मधुमक्खी या चिंटी के काटने पर त्वचा पर जलन क्यों होती है
    मधुमक्खी या चिंटी के डंक में फॉर्मिक अम्ल पाया जाता है जिसके कारण हमारी त्वचा में जलन व दर्द होता है 
  21. पेट की अम्लता से राहत पाने के लिए दुर्बल क्षार का उपयोग क्यों किया जाता है 
    पेट में HCl की मात्र बढ़ने से अम्लता उत्पन्न होती है इससे राहत पाने के लिए दुर्बल क्षार जैसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह HCl को उदासीन कर देता है 
  22. दही अचार जैसे खट्टे पदार्थों को धातु के पात्र में क्यों नहीं रखना चाहिए
    क्यों कि दही तथा अन्य खट्टे पदार्थों में मौजूद अम्लधातु के बर्तन से किया कर हाइड्रोजन गैस व विषैले धातु यौगिक बनाते हैं।
  23. अम्ल का जलीय विलयन क्यों विद्युत का चालन करता है?
    म्ल जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन H+ उत्पन्न करते है इन H
    की उपस्थिति के कारण अम्ल का जलीय विलयन विद्युत का चालन करता है
  24. प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक नाम  व सूत्र लिखिए 
    कैल्सियम सल्फेट अर्धहाइड्रेट
    CaSO4.½H2O
  25. गंधीय सूचक किसे कहते हैं? दो गंधीय सूचकों के नाम लिखिए
  26. कुछ ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी गंध अम्लीय या क्षारकीय माध्यम में बदल जाती है। इन्हें गंधीय सूचक कहते हैं।
    Example -वैनिला, प्याज एवं लौंग के तेल
  27. अम्ल व क्षार में अंतर लिखिए
    1.अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं जबकि क्षार स्वाद में कड़वे होते हैं
    2.अम्ल नीले लिटमस को लाल करते हैं जबकि क्षार लाल लिटमस को नीला करते हैं
    3.अम्ल का pH मान 7 से कम होता है जबकि क्षार का pH मान 7 से अधिक व 14 तक होता है 

  28. दंतक्षय क्या है समझाइए
    भोजन के पश्चात मुख में उपस्थित जीवाणु दांतों पर लगे भोजन से क्रिया करके अम्ल उत्पन्न करते हैं जिससे मुख का pH 5.5 से कम हो जाता है और दांतों का इनैमल का क्षय होने लगता है अतः भोजन के पश्चात क्षारीय दंत समंजन का उपयोग करना चाहिए जो अम्ल को उदासीन कर देता है 
  29. प्लास्टर ऑफ पेरिस को आर्द्रता रोधी बर्तनों में क्यों रखा जाता है 
    या प्लास्टर ऑफ पेरिस की जल के साथ अभिक्रिया लिखिए
    प्लास्टर ऑफ पेरिस में जल मिलाने पर शीघ्र ही जमकर ठोस व कठोर हो जाता है एवं पुनः जिप्सम में बदल जाता है इसीलिए प्लास्टर ऑफ पेरिस को आर्द्रता रोधी बर्तनों में रखा जाता है 
    CaSO4.½H2O +1½H2O   CuSO4.2H2O
  30. बैंकिंग सोडे/खाने का सोडा का सूत्र व उपयोग लिखिए
    NaHCO3(सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट)
    बेकिंग सोडा का उपयोग
    1. बेंकिग पाउडर [बेंकिग सोडा + टार्टरिक ] बनाने में
    2. सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट एक ऐन्टैसिड है। क्षारीय होने के कारण यह पेट में अम्ल की अधिकता को उदासीन करके राहत पहुँचाता है।
    3. इसका उपयोग सोडा-अम्ल अग्निशामक में भी किया जाता है।

  31. धावन सोडे का सूत्र व उपयोग लिखिए
    Na2CO3.10H2O
    धोने के सोडे के उपयोग
    सोडियम कार्बोनेट का उपयोग काँचसाबुन एवं कागज़ उद्योगों में होता है।
    इसका उपयोग बोरेक्स जैसे सोडियम यौगिक के उत्पादन में होता है।
    सोडियम कार्बोनेट का उपयोग घरों में साफ-सप़फाई के लिए होता है।
     
  32. प्लास्टर ऑफ पेरिस के उपयोग लिखिए
    1. डॉक्टर टूटी हुई हड्डियों को सही जगह पर स्थिर रखने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग  करते हैं। 
    2. प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग खिलौना बनाने में किया जाता है 
    3. प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग सजावट का सामान एवं सतह को चिकना बनाने के लिए किया जाता है।
     
  33. क्लोर – क्षार अभिक्रिया किसे कहते है 

    सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन से विद्युत प्रवाहित करने पर यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड उत्पन्न करता है। इस प्रक्रिया को क्लोर-क्षार प्रक्रिया कहते हैं क्योंकि इससे निर्मित उत्पाद - क्लोरीन (क्लोर) एवं सोडियम हाइड्रॉक्साइड (क्षार) होते हैं।

    2NaCl + 2H2O  ⟶  2NaOH+ Cl2 + H2
  34. विरंजक चूर्ण का सूत्र व उपयोग लिखिए
    CaOCl(कैल्शियम ऑक्सी क्लोराइड)
    1. वस्त्र व कागज उद्योग में विरंजक के रूप में
    2. पीने वाले जल को जीवाणुओं से मुक्त करने के लिए।
    3. रासायनिक उद्योगों में एक उपचायक के रूप में

  35. प्रबल अम्ल व दुर्बल अम्ल क्या होते हैं उदाहरण दीजिए
    प्रबल अम्ल वे अम्ल जो जलीय विलियन में पूर्णतया आयनित हो जाते हैं प्रबल अम्ल कहलाते हैं हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) नाइट्रिक अम्ल( HNO3)
    दुर्बल अम्ल वे अम्ल जो जलीय विलियन में पूर्णतया आयनित नहीं होते हैं दुर्बल अम्ल कहलाते हैं जैसे एसिटिक अम्ल , कार्बनिक अम्ल 
  36. धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया से कौन – सी गैस निकलती है ? एक उदाहरण के द्वारा समझाइए। इस गैस की उपस्थिति की जाँच आप कैसे करेंगे ?
  37. धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया होने पर हाइड्रोजन (H2) गैस निकलती है।
    Example -
    जब हम जलती हुई तीली इस गैस के पास लाते हैं तो यह फट – फट की ध्वनि के साथ जलती है।
    जिंक सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके जिंक सल्फेट और हाइड्रोजन गैस बनाते है |

    H2 SO4  +  Zn       ZnSO4   +   H2  
  38. प्रबल क्षार व दुर्बल क्षार क्या होते हैं
    प्रबल क्षार -वे क्षार जो जलीय विलियन में पूर्णतया आयनित हो जाते हैं प्रबल क्षार कहलाते हैं  जैसे सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH), पोटेशियम हाइड्रोक्साइड (KOH)
    दुर्बल क्षार वे क्षार जो जलीय विलियन में पूर्णतया आयनित नहीं होते हैं दुर्बल क्षार कहलाते हैं जैसे मैग्नीशियम हाइड्रोक्साइडकैल्शियम हाइड्रोक्साइड 

  39. प्लास्टर ऑफ पेरिस किस प्रकार बनाया जाता है
    जिप्सम को 373 पर गर्म करने पर यह जल के अणुओं का त्याग कर कैल्सियम सल्प़ेफट अर्धहाइड्रेट / हेमिहाइड्रेट बनाता है। इसे प्लास्टर ऑफ पेरिस कहते हैं। 
    CaSO4.2H2O     373  ⇾ CaSO4.½H2O +1½H2
        जिप्सम                  प्लास्टर ऑफ पेरिस
  40. क्रिस्टलन का जल किसे कहते हैं दो उदहारण दीजिए 
    लवण के इकाई सूत्र में उपस्थित जल के अणु की निश्चित संख्या क्रिस्टलन का जल कहलाती है
    Example
    1. कॉपर सल्फेट  [CuSO4.5H2]
    कॉपर सल्फेट में क्रिस्टलन  जल के पांच अणु होते है 
    2. धोने का सोडा [Na2CO3.10H2O]
    धोने के सोडे में जल के 
    क्रिस्टलन दस अणु पाए जाते है
  41. निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए संतुलित समीकरण लिखिए –
    (a) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल दानेदार जिंक के साथ अभिक्रिया करता है।
    Zn + H2SO4  ZnSO + H2 
    (b) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मैग्नीशियम पट्टी के साथ अभिक्रिया करता है।
    Mg  + 2HCl   MgCl2 + H2 
    (c) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ अभिक्रिया करता है।
    2Al+ 3H2SO4  Al2(SO4)3 + 3H2 
    (d) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लोह के चूर्ण के साथ अभिक्रिया करता है।
    Fe + 2HCl   FeCl2 + H2 
  42. निम्न पदार्थों में कौन से अम्ल पाये जाते हैं
  43. सिरका          ⟹ ऐसीटिक अम्ल
    इमली            ⟹ टार्टरिक अम्ल
    जठर रस         ⟹ हाइड्रोकलोरिक अम्ल
    नींबू               ⟹ सिट्रिक अम्ल
    टमाटर            ⟹ आक्सैलिक अम्ल
    संतरा              ⟹ एस्कोरबिक अम्ल
    खट्टा दूध (दही)  ⟹ लैक्टिक अम्ल
    नेटल का डंक     ⟹ मेथैनॉइक अम्ल
  44. उदासीनीकरण अभिक्रिया किसे कहते हैं
    अम्ल व क्षार परस्पर क्रिया करके एक दूसरे के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं तथा लवण व जल बनाते हैं इसे उदासीनीकरण की अभिक्रिया कहते हैं यह ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया होती है
    अम्ल  + क्षारक             लवण   + जल
    Example-
    सोडियम हाइड्रोऑक्साइडहाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करके साधारण नमक और जल बनाता है
    NaOH + HCl  NaCl + H2O
    पोटेशियम हाइड्रोऑक्साइडसल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया करके पोटेशियम सल्फेट और जल बनाता है
    2KOH + H2SO4  K2SO4 + 2H2
  45. pH स्केल क्या है चित्र द्वारा समझाइए 
    किसी विलियन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सांद्रता ज्ञात करने वाली स्केल pH स्केल कहलाती है
    pH स्केल का निर्माण सोरेनसन ने किया pH स्केल में p जर्मन शब्द पुसांस अर्थात शक्ति का सूचक तथा H हाइड्रोजन आयनो का सूचक है pH स्केल से अम्ल क्षार की सामर्थ्य ज्ञात की जाती है
    pH का मान 0 से 14 तक होता है जिन विलियनो का pH मान 7 से कम है वे अम्लीय होते हैं जिन विलियनो का pH मान 7 से अधिक 14 तक होता है वे क्षारीय होते हैं और pH मान 7 वाले विलियन उदासीन होते हैं   
  46. दैनिक जीवन में pH का महत्त्व लिखिए 
    1. पौधे एवं पशुओं की  pH के प्रति संवेदनशील
    हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के बीच कार्य करता है। जीवित प्राणी केवल संकीर्ण pH परास में ही जीवित रह सकते हैं। वर्षा के जल की pH मान जब 5.6 से कम हो जाती है तो वह अम्लीय वर्षा कहलाती है। अम्लीय वर्षा का जल जब नदी में प्रवाहित होता है तो नदी के जल के pH का मान कम हो जाता है। ऐसी नदी में जलीय जीवधारियों की उत्तरजीविता कठिन हो जाती है। शुक्र का वायुमंडल सल्फ्यूरिक अम्ल के मोटे श्वेत एवं पीले बादलों से बना है। अच्छी उपज के लिए पौधों को एक विशिष्ट pH परास की आवश्यकता होती है।
    2. हमारे पाचन तंत्र का pH
    हमारा उदर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल उत्पन्न करता है। यह उदर को हानि पहुँचाए बिना भोजन के पाचन में सहायक होता है। अपच की स्थिति में उदर अत्यधिक मात्र में अम्ल उत्पन्न करता है जिसके कारण उदर में दर्द एवं जलन का अनुभव होता है। इस दर्द से मुक्त होने के लिए ऐन्टैसिड जैसे क्षारकों का उपयोग किया जाता है। ऐन्टैसिड अम्ल की आधिक्य मात्र को उदासीन करता है। इसके लिए मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (मिल्क ऑपफ मैगनीशिया) जैसे दुर्बल क्षारक का उपयोग किया जाता है।
    3. pH परिवर्तन के कारण दंत-क्षय
    मुँह के pH का मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय प्रारंभ हो जाता है। दाँतों का इनैमल कैल्सियम हाइड्रोक्सीएपेटाइट से बना होता है जो कि शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है। यह जल में नहीं घुलता लेकिन मुँह की pH का मान 5.5 से कम होने पर यह संक्षारित हो जाता है। मुँह में उपस्थित बैक्टीरियाभोजन के पश्चात मुँह में अवशिष्ट शर्करा एवं खाद्य पदार्थों का निम्नीकरण करके अम्ल उत्पन्न करते हैं। भोजन के बाद मुँह साफ करने से इससे बचाव किया जा सकता है। मुँह की सफाई के लिए क्षारकीय दंत-मंजन का उपयोग करने से अम्ल की आधिक्य मात्रा को उदासीन किया जा सकता है जिसके परिणामस्वरूप दंत क्षय को रोका जा सकता है।
    4. पशुओं एवं पौधों द्वारा उत्पन्न रसायनों से आत्मरक्षा
    मधुमक्खी का डंक एक अम्ल छोड़ता है जिसके कारण दर्द एवं जलन का अनुभव होता है। डंक मारे गए अंग में बेंकिग सोडा जैसे दुर्बल क्षारक के उपयोग से आराम मिलता है। नेटल के डंक वाले बाल मेथैनॉइक अम्ल छोड़ते हैं जिनके कारण जलन वाले दर्द का अनुभव होता है
 


1.रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

रासायनिक अभिक्रिया - किसी पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन होना रासायनिक अभिक्रिया कहलाता है वे पदार्थ जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं अभिकारक कहलाते हैं तथा वे पदार्थ जो रासायनिक अभिक्रिया में बनते है उत्पाद कहलाते हैं।जब मैग्नीशियम रिबन का दहन किया जाता है तो यह ऑक्सीजन से क्रिया करके मग्निशियम ऑक्साइड का श्वेत चूर्ण बनता है
मैग्नीशियम + ऑक्सीजन ⇒ मग्निशियम ऑक्साइड
          (अभिकारक )                      (उत्पाद)
रासायनिक अभिक्रिया में पदार्थों की -
⇛ अवस्था में परिवर्तन होता है
⇛ रंग बदलता है
⇛ गैस निकलती है
⇛ तापमान बदलता है
रासायनिक समीकरण- जब किसी रासायनिक अभिक्रिया में पदार्थों को प्रतीकों एवं अणुसूत्रों की सहायता से प्रदर्शित किया जाता है तो उसे रासायनिक समीकरण कहा जाता है।
2Mg + O₂ → 2MgO
ढांचा रासायनिक समीकरण /कंकाली रासायनिक समीकरण - यदि किसी रासायनिक समीकरण में अभिक्रिया के पहले एवं उसके पश्चात प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान नहीं होती है इस प्रकार की असन्तुलित रासायनिक अभिक्रिया को ढांचा रासायनिक समीकरण या कंकाली रासायनिक समीकरण कहते है
Example      Mg + O₂ → MgO
सन्तुलित रासायनिक समीकरण - द्रव्यमान संरक्षण के नियमानुसार "किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण होता है न ही विनाश" अतः किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारक का कुल द्रव्यमान व उत्पादों का कुल द्रव्यमान बराबर होता है। अर्थात रासायनिक अभिक्रिया के पहले एवं उसके पश्चात प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान रहती है इसलिए रासायनिक समीकरण को संतुलित करना आवश्यक है रासायनिक समीकरण को हिट एवं ट्रायल विधि से संतुलित करते है
चरण-1 : रासायनिक समीकरण को संतुलित करने के लिए सबसे पहले प्रत्येक सूत्र के चारों ओर एक बॉक्स बना लिया जाता है समीकरण को संतुलित करते समय बॉक्स के अंदर कुछ भी परिवर्तन नहीं करना है
Fe + H
O ➡ Fe₃O₄ + H₂

चरण -2 : असंतुलित समीकरण में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की संख्या ज्ञात कर ली जाती है
तत्व  अभिकारकों में           उत्पादों में
       परमाणुओं की संख्या   परमाणुओं की संख्या
Fe              1                     3
H             2                      2
O             1                       4
चरण-3 : सबसे पहले सबसे अधिक परमाणु वाले यौगिक (अभिकारक या उत्पाद ) के परमाणुओं को पहले संतुलित किया जाता है इसके लिए अभिकारक या उत्पाद को उचित संख्या से गुणा करते है यहाँ सबसे अधिक परमाणु Fe₃O₄ में है Fe₃O₄ में ऑक्सीजन परमाणु सर्वाधिक है यहाँ अभिकारकों की तरफ ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या एक तथा उत्पादों की तरफ ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या 4 है अतः दोनों तरफ ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या को बराबर करने के लिए H₂O को 4 से गुणा करते है
O परमाणु           अभिकारकों में   उत्पादों में
प्रारंभ में                  1 (H₂O में)   4(Fe₃O₄ में)
संतुलित करने पर      1×4          4
आंशिक रूप से संतुलित समीकरण इस प्रकार होगा
Fe + 4H₂O ➡ Fe₃O₄ + H₂
Fe तथा H परमाणु अब भी संतुलित नहीं हैं। अब हम आंशिक रूप से संतुलित समीकरण में हाइड्रोजन परमाणु को संतुलित करते हैं अभिकारकों की तरफ हाइड्रोजन परमाणु की संख्या 8 हो गई जबकि उत्पादों की तरफ हाइड्रोजन परमाणु की संख्या 2 है हाइड्रोजन परमाणु को बराबर करने के लिए दाईं ओर (उत्पादों की तरफ ) हाइड्रोजन अणु की संख्या को ‘4’ से गुणा कर देते हैं।
H परमाणु           अभिकारकों में   उत्पादों में
प्रारंभ में                 8 (H₂O में)    2(H₂O में)
संतुलित करने पर     8                 2× 4
इसी प्रकार अभिकारकों की तरफ Fe परमाणु की संख्या एक है जबकि उत्पादों की तरफ Fe परमाणु की संख्या 3 है Fe परमाणु को बराबर करने के लिए उत्पादों की तरफ Fe अणु की संख्या को ‘3’ से गुणा कर देते हैं।
Fe परमाणु         अभिकारकों में    उत्पादों में
प्रारंभ में             1 (Fe में )         3(Fe₃O₄ में)
संतुलन करने पर  1×3                3
चरण-4 : अंत में, इस संतुलित समीकरण की जाँच के लिए हम समीकरण में दोनों ओर के तत्वों के परमाणुओं की संख्याओं का परिकलन करते हैं।
3Fe + 4H₂O ➡ Fe₃O₄ + 4H₂
तत्व   अभिकारकों में           उत्पादों में परमाणुओं
       परमाणुओं की संख्या    की संख्या
Fe             3                     3
H             8                      8
O             4                     4
उक्त समीकरण में दोनों ओर के तत्वों के परमाणुओं की संख्या बराबर है। अतः यह समीकरण अब संतुलित है।
चरण-5: भौतिक अवस्थाओं के संकेत लिखनाः ऊपर लिखे संतुलित रासायनिक समीकरण को अधिक सूचनापूर्ण बनाने के लिए अभिकारकों तथा उत्पादों के रासायनिक सूत्र के साथ उनकी भौतिक अवस्था को भी दर्शाया जाता है। अभिकारकों तथा उत्पादों के गैस, द्रव, जलीय तथा ठोस अवस्थाओं को क्रमशः (g),
(l), (aq) तथा (s) से दर्शाया जाता है।
3Fe(s) + 4H₂O(g) ➡ Fe₃O₄(s) + 4H₂(g)
रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार
1. संयोजन अभिक्रिया - वह अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक आपस में संयोग करके एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं संयुग्मन या संयोजन अभिक्रिया कहलाती है
A + B → AB
Example
(i) बिना बुझे चुने की जल के साथ अभिक्रिया
CaO + H
O ➡ Ca(OH) + ऊष्मा
इस अभिक्रिया में निर्मित बुझे हुए चूने के विलयन का उपयोग दीवारों पर सफेदी करने के लिए किया जाता है। जब दीवारों पर सफेदी की जाती है तो कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (सफेदी) वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड के साथ धीमी गति से अभिक्रिया करके दीवारों पर कैल्सियम कार्बोनेट की एक पतली परत बना देता है। इससे दीवारों पर चमक आ जाती है।
Ca(OH)
 + CO₂ ➡ CaCO₃  + HO
(कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) (कैल्सियम कार्बोनेट)
(ii) कोयले का दहन
C + O
 → CO + ऊष्मा
(ii) जल का निर्माण
H
 + O ➡ HO
ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएं - वे अभिक्रियाएं जिनमें ऊष्मा निकलती है ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहलाती है। सभी दहन अभिक्रियाएं ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया होती है। 
Example
(1) प्राकृतिक गैस का दहन
CH₄
 + O → CO + HO + ऊष्मा
(2) श्वसन - हमें जीवित रहने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है । यह ऊर्जा हमें भोजन से मिलती है भोजन से प्राप्त ग्लूकोस हमारे शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन से संयोग कर हमें ऊर्जा प्रदान करता हैं। यह ऑक्सीजन श्वसन से प्राप्त होती है अतः श्वसन एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है
C
H₁₂O₆ + 60 → 6CO + 6HO + ऊर्जा
(3) शाक सब्जियों के
विघटन से कम्पोस्ट निर्माण -शाक सब्जियों का विघटित होकर कम्पोस्ट बनाना उश्मक्षेपी  का उदाहरहण है 
2. वियोजन (अपघटन) अभिक्रिया- वह अभिक्रिया जिसमें एकल अभिकारक टूट कर दो या दो से अधिक उत्पाद बनाता है अपघटन या वियोजन अभिक्रिया कहलाती है
AB ➡ A + B
अपघटन तीन प्रकार का होता है
(I) विद्युत वियोजन - जब किसी यौगिक के विलियन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो वह अपघटित हो जाता है इसे विद्युत अपघटन कहते है
जल का विद्युत अपघटन

H
O   ➡विधुत धारा→ H + O
(II) ऊष्मीय वियोजन / ताप अपघटन -
जब किसी यौगिक को गर्म किया जाता है तो उसका अपघटन हो जाता है इसे ऊष्मीय विघटन कहते है जैसे चूने का निर्माण
कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) का उष्मीय वियोजन -
CaCO₃
→ गर्म  →  CaO + CO
कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर)
(III) प्रकाशीय वियोजन-
जब किसी यौगिक का प्रकाश की उपस्थिति मे अपघटन होता है। तो उसे प्रकाशीय अपघटन कहते है
सिलवर ब्रोमाइड का प्रकाश अपघटन
2 AgBr  
  सूर्य का प्रकाश → 2Ag + Br
इस अभिक्रिया का उपयोग श्याम श्वेत फोटोग्राफी में किया जाता है
सिल्वर क्लोराइड प्रकाश अपघटन
2AgCl  ➡सूर्य का प्रकाश➡  2Ag + Cl

ऊष्माशोषी अभिक्रियाएं - वे अभिक्रियाएं जिनमें ऊष्मा का अवशोषण होता है ऊष्माशोषी अभिक्रियाएं कहलाती हैं। सभी अपघटन अपघटन अभिक्रियाएं ऊष्माशोषी अभिक्रिया होती है।
कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) का उष्मीय वियोजन -
CaCO₃
 →गर्म → CaO + CO
3. विस्थापन अभिक्रिया -
वह अभिक्रिया जिसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व अपने से कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक में से विस्थापित कर देता है विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है
AB + C → AC + B
(i) जिंक की कॉपर सल्फेट के साथ अभिक्रिया
Zn + CuSO₄
 → ZnSO + Cu
उपरोक्त अभिक्रिया में अधिक क्रियाशील Zn कम क्रियाशील Cu को उसके यौगिक में से विस्थापित कर देता है
(ii) लोहे की कॉपर सल्फेट के साथ अभिक्रिया
जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोया जाता है तो लोहा कॉपर सल्फेट में से कॉपर को विस्थापित कर देता है और फेरस सल्फेट का निर्माण होता है इस कारण विलियन व कील का रंग बदल जाता है
Fe + CuSO
 → FeSO + Cu
उपरोक्त अभिक्रिया में अधिक क्रियाशील Fe कम क्रियाशील Cu को उसके यौगिक में से विस्थापित कर देता है
4. द्विविस्थापन अभिक्रिया -
वह अभिक्रिया जिसमें दो अभीकारकों के बीच परमाणु या परमाणु के समूह का आदान-प्रदान होता है द्विविस्थापन अभिक्रिया कहलाती है
AB + CD → AD + BC
Example
जब सोडियम सल्फेट की अभिक्रिया बेरियम क्लोराइड के साथ करवाई जाती है तो बेरियम सल्फेट का श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है इस अभिक्रिया में अवक्षेप का निर्माण होता इसलिए इस अभिक्रिया को अवक्षेपण अभिक्रिया कहते है
Na
SO + BaCl → BaSo ⬇ + 2NaCl
5. उपचयन व अपचयन अभिक्रिया -
वे रासायनिक अभिक्रियांए जिनमे किसी पदार्थ से आक्सीजन जुङती है या हाइड्रोजन हटती है उपचयन (ऑक्सीकरण) अभिक्रियांए कहलाती है
2Cu + O
 → 2 CuO
( यंहा Cu का CuO में उपचयन हो रहा है)
वे रासायनिक अभिक्रियांए जिनमे किसी पदार्थ से आक्सीजन हटती है इड्रोजन जुङती है अपचयन अभिक्रियांए कहलाती है
CuO + H
 → Cu + HO
(यंहा CuO का Cu में अपचयन हो रहा है)
6. रेडॉक्स अभिक्रिया - 
वह अभिक्रिया जिसमें एक पदार्थ का उपचयन/ऑक्सीकरण व दूसरे पदार्थ का अपचयन होता है रेडॉक्स अभिक्रिया कहलाती है
Example-1
CuO + H
    →तापन Cu + HO
इस अभिक्रिया मे CuO का Cu में अपचयन हो रहा है तथा H
 का HO में उपचयन हो रहा है
Example-2
ZnO + C ➡ Zn + CO
इस अभिक्रिया मे ZnO का Zn में अपचयन हो रहा है तथा C का CO में उपचयन हो रहा है
संक्षारण - जब कोई धातु अपने आस-पास अम्ल, आर्द्रता आदि के सम्पर्क में आती है तो धातुएं उपचयित होकर संक्षारित (खराब) हो जाती है इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं।
Example
लोहे पर जंग लगना
चांदी का काला पड़ना
ताम्बे की चमक खत्म होना
विकृतगंधिता - वसायुक्त या तैलीय खाद्य पदार्थ वातावरण में उपस्थित ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर उपचयित हो जाते है जिसके कारण इन खाद्य पदार्थों का स्वाद एवं गंध बदल जाती है इसे विकृतगंधिता कहते है
विकृतगंधिता से बचाव
1. तैलीय तथा वसायुक्त खाद्य सामग्रियों में उपचयन रोकने वाले पदार्थ (प्रति-ऑक्सीकारक) मिलाए जाते हैं।
2.तैलीय तथा वसायुक्त खाद्य सामग्रियों को वायुरोधी बर्तनों में रखने से उपचयन की गति धीमी हो जाती है।
3. चिप्स बनाने वाले चिप्स की थैली में से ऑक्सीजन हटाकर उसमें नाइट्रोजन जैसी कम सक्रिय गैस भरी जाती हैं ताकि चिप्स का उपचयन न हो सके और चिप्स ख़राब न हो ।


  1. सिल्वर के शोधन में, सिल्वर नाइट्रेट के विलयन से सिल्वर प्राप्त करने के लिए कॉपर धातु द्वारा विस्थापन किया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए अभिक्रिया लिखिए।
    2AgNO₃ + Cu ⟶ Cu[NO₃]₂ + 2Ag
  2. मीथेन के दहन की संतुलित समीकरण लिखिए
    CH₄  +  O₂  ➡  CO₂  +  2H₂O  + ऊष्मा
  3. किसी पदार्थ ‘X’ के विलयन का उपयोग सफेदी करने के लिए होता है  पदार्थ ‘X’ का नाम तथा इसका सूत्र लिखिए।
    कैल्शिय ऑक्साइड (CaO)  के जलीय विलियन का उपयोग सफेदी करने के लिए ककिया जाता है।अतः पदार्थ X का रासायनिक नाम कैल्शिय ऑक्साइड तथा सूत्र CaO है।
  4. निम्नलिखित अभिक्रिया में A को पहचानिए
    Na₂SO₄ + BaCl₂    ➡    A  + 2NaCl
    Zn  + CuSO4      ➡  A   +  Cu
  5. किस अभिक्रिया का उपयोग श्याम श्वेत फोटोग्राफी में किया जाता है
    हाइड्रोजन ब्रोमाइड के  प्रकाश अपघटन का उपयोग श्याम श्वेत फोटोग्राफी में किया जाता है
    2 HBr     ⟶सूर्य का प्रकाश⟶   H₂ +  Br₂
  6. वायु में जलाने से पहले मैग्नीशियम रिबन को साफ क्यों किया जाता है ?
    मैग्नीशियम रिबन नम वायु से क्रिया कर अपने ऊपर मैग्नीशियम ऑक्साइड की सफेद पर्त बना लेता है, यह पर्त मैग्नीशियम के जलने में अवरोध पैदा करती है। इसलिए मैग्नीशियम रिबन को पहले रेगमाल से साफ किया जाता है।
  7. कॉपर सल्फेट के विलयन में जिंक के टुकङे डालने पर उसका नीला रंग क्यों उङ हो जात है ?
    कॉपर सल्फेट के विलयन में जिंक के टुकङे डालने पर कॉपर सल्फेट में उपस्थित कॉपर का अधिक क्रियाशील जिंक धातु द्वारा विस्थापन हो जाता है और जिंक सल्फेट बनता है जिसके कारण कॉपर सल्फेट का नीला रंग विलुप्त हो जाता है
    CuSO₄  +  Zn  ➡  ZnSO₄ + Cu
  8. जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन डुबोया जाता है तो विलयन का रंग क्यों बदल जाता है ?
    जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोया जाता है तो लोहा कॉपर सल्फेट में से कॉपर को विस्थापित कर देता है और फेरस सल्फेट का निर्माण होता है इस कारण विलियन का रंग बदल जाता है
    Fe +  CuSO₄ ➡  FeSO₄ +Cu
  9. निम्न अभिक्रियाओं में उपचयित तथा अपचयित पदार्थों की पहचान कीजिए
    (i) 4Na  + O₂  ⟶  2Na₂O    (ii) CuO + H₂ ⟶  Cu + H₂O
     (i) 4Na + O₂  ⟶   2Na₂O
    इस अभिक्रिया मे सोडियम का उपचयन (ऑक्सीकरण) व ऑक्सीजन का अपचयन हो रहा है
    (ii) CuO + H₂ ⟶   Cu + H₂O
    इस अभिक्रिया मे हाइड्रोजन का उपचयन (ऑक्सीकरण) व CuO का अपचयन हो रहा है
  10. एक भूरे रंग का चमकदार तत्व X को वायु की उपस्थिति में गर्म करने पर वह काले रंग का हो जाता है  इस तत्व X व उस काले रंग के योगिक का नाम  बताइए
    कॉपर भूरे रंग का चमकदार तत्व है इसको वायु की उपस्थिति में गर्म करने पर कॉपर की सतह पर कॉपर ऑक्साइड की काली परत चढ़ जाती है 
    2Cu + O₂     ➡     2 CuO
    (X= कॉपर)       (काले रंग की परत)
  11. अभिक्रिया  CuO + H₂   तापन  → Cu +  H₂O में किस पदार्थ का ऑक्सीकरण (उपचयन) व किस पदार्थ का अपचयन हो रहा है  इस प्रकार की एक अन्य अभिक्रिया का उदहारण दीजिए
    इस अभिक्रिया मे  H₂  उपचयन (ऑक्सीकरण)  व CuO का अपचयन हो रहा है
    ZnO  +  C     ➡    Zn    +   CO
    इस अभिक्रिया मे C  उपचयन (ऑक्सीकरण)  व ZnO का अपचयन हो रहा है
  12. रासायनिक अभिक्रिया किसे कहते हैं  ?
    किसी पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन होना रासायनिक अभिक्रिया कहलाता है वे पदार्थ जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं अभिकारक कहलाते हैं तथा वे पदार्थ जो रासायनिक अभिक्रिया में बनते है उत्पाद कहलाते हैं ।
    2Mg + O₂     ➡  2MgO
  13. संक्षारण किसे कहते है उदहारण दीजिए
    जब कोई धातु अपने आस-पास अम्ल, आर्द्रता आदि के सम्पर्क में आती है तो धातुएं उपचयित होकर संक्षारित (खराब) हो जाती है इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं।
    Example
    लोहे पर जंग लगना
    चांदी का काला पड़ना
    ताम्बे की चमक खत्म होना
  14. लोहे की वस्तओं को हम क्यों पेंट करते हैं ?
    लोहा वायु में उपस्थित नमी से क्रिया करके अपने ऊपर फेरस ऑक्साइड की परत बना लेता है जिसके कारन लोहे पर जंग लग जाता है लोहे की वस्तओं को हम पेंट करने पर यह वायु के साथ सीधे संपर्क में नहीं आता है जिसके कारण उसमें जंग नहीं लगता है इसलिए पेंट करने से हम लोहे को जंग लगने से बचा सकते हैं।
  15. तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थों को नाइट्रोजन से प्रभावित क्यों किया जाता है ?
    तेल एवं वसायुक्त पदार्थ वायु में उपस्थित ऑक्सीजन से क्रिया कर उपचयित हो जाते है और विकृतगंधी हो जाते है जिससे उनका स्वाद व गंध बदल जाती है नाइट्रोजन अक्रिय गैस होने के कारण नाइट्रोजन की उपस्थिति में तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थों का उपचयन नहीं होता है इसलिए तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थों को नाइट्रोजन से प्रभावित किया जाता है
  16. श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहते हैं ? वर्णन कीजिए।
    हमें जीवित रहने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है । यह ऊर्जा हमें भोजन से मिलती है भोजन से प्राप्त ग्लूकोस हमारे शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन से संयोग कर हमें ऊर्जा प्रदान करता हैं।यह ऑक्सीजन श्वसन से प्राप्त होती है अतः श्वसन एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है
    C₆H₁₂O₆ + 60₂ → 6CO₂ + 6H₂O + ऊर्जा
  17. संयोजन अभिक्रिया किसे कहते हैं उदाहरण लिखिए
    वह अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक आपस में संयोग करके एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं संयुग्मन या संयोजन अभिक्रिया कहलाती है
    A + B ➡ AB
    Example
    बिना बुझे चुने की जल के साथ अभिक्रिया
    CaO + H₂O ➡ Ca(OH)₂ + ऊष्मा
  18. जल के विद्युत अपघटन का नामांकित चित्र बनाइए
  19. वियोजन (अपघटन) अभिक्रिया किसे कहते हैं ? समझाइए ।
    वह अभिक्रिया जिसमें एकल अभिकारक टूट कर दो या दो से अधिक उत्पाद बनाता है अपघटन या वियोजन अभिक्रिया कहलाती है
    AB        ➡    A    +    B
    Example
    कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) का उष्मीय वियोजन -
    CaCO₃      ➡गर्म➡  CaO   +  CO₂
    कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर)
  20. बुझे हुए चूने के विलयन का उपयोग दीवारों की सफेदी करने में क्यों किया जाता है ?
    या
    दीवारों पर सफेदी करने के दो- तीन दिन बाद दीवारों पर चमक क्यों आ जाती है ?
    बुझे हुए चूने के विलयन का उपयोग दीवारों पर सफेदी करने के लिए किया जाता है। जब दीवारों पर सफेदी की जाती है तो कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (सफेदी) वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड के साथ धीमी गति से अभिक्रिया करके दीवारों पर कैल्सियम कार्बोनेट की एक पतली परत बना देता है। इससे दीवारों पर चमक आ जाती है।
    Ca(OH)₂  + CO₂      ➡ CaCO₃  +  H₂O
    (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड)   (कैल्सियम कार्बोनेट)
  21. विस्थापन अभिक्रिया किसे कहते हैं ? उदाहरण लिखिए ।
    वह अभिक्रिया जिसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व अपने से कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक में से विस्थापित कर देता है विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है
    AB + C ➡  AC + B
    जिंक की कॉपर सल्फेट के साथ अभिक्रिया
    Zn  + CuSO₄   ➡  ZnSO₄ + Cu
    उपरोक्त अभिक्रिया में अधिक क्रियाशील Zn कम क्रियाशील Cu को उसके यौगिक में से विस्थापित कर देता है
  22. अवक्षेपण अभिकिया किसे कहते है उदहारण देकर समझाईए
    वह अभिक्रिया जिसमे जिनमे उत्पाद के रूप में अविलेय अवक्षेप का निर्माण होता है अवक्षेपण अभिक्रिया कहलाती है
    Example
    जब सोडियम सल्फेट की अभिक्रिया बेरियम क्लोराइड के साथ करवाई जाती है तो बेरियम सल्फेट का श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है इस अभिक्रिया में अवक्षेप का निर्माण होता इसलिए इस अभिक्रिया को अवक्षेपण अभिक्रिया कहते है
    Na₂SO₄ + BaCl₂  ➡ BaSo₄ ⬇ + 2NaCl
  23. रासायनिक समीकरण किसे कहते है ? रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?
    जब किसी रासायनिक अभिक्रिया में पदार्थों को प्रतीकों एवं अणुसूत्रों की सहायता से प्रदर्शित किया जाता है तो उसे रासायनिक समीकरण कहा जाता है। द्रव्यमान संरक्षण के नियमानुसार "किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण होता है न ही विनाश" अतः किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारक का कुल द्रव्यमान व उत्पादों का कुल द्रव्यमान बराबर होता है।अर्थात रासायनिक अभिक्रिया के पहले एवं उसके पश्चात प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान रहती है इसलिए रासायनिक समीकरण को संतुलित करना आवश्यक है
  24. ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रिया का क्या अर्थ है ?
    ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएं :- वे अभिक्रियाएं जिनमें ऊष्मा निकलती है ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहलाती है।सभी दहन अभिक्रियाएं ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया होती है। संयुग्मन या संयोजन अभिक्रिया कहलाती है
    प्राकृतिक गैस का दहन
    CH₄ + O₂ ➡  CO₂ + H₂O + ऊष्मा
    ऊष्माशोषी अभिक्रियाएं :- वे अभिक्रियाएं जिनमें ऊष्मा का अवशोषण होता है ऊष्माशोषी अभिक्रियाएं कहलाती हैं। सभी अपघटन अपघटन अभिक्रियाएं ऊष्माशोषी अभिक्रिया होती है।
    कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) का उष्मीय वियोजन
    CaCO₃   ➡ गर्म ➡ CaO   +  CO₂
  25. द्विविस्थापन अभिक्रिया किसे कहते हैं ? उदाहरण लिखिए ।
    वह अभिक्रिया जिसमें दो अभीकारकों के बीच परमाणु या परमाणु के समूह का आदान-प्रदान होता है द्विविस्थापन अभिक्रिया कहलाती है
    AB + CD ➡  AD + BC
    Example
    जब सोडियम सल्फेट की अभिक्रिया बेरियम क्लोराइड के साथ करवाई जाती है तो बेरियम सल्फेट का श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है इस अभिक्रिया में अवक्षेप का निर्माण होता इसलिए इस अभिक्रिया को अवक्षेपण अभिक्रिया कहते है
    Na₂SO₄ + BaCl₂ ➡  BaSo₄ ⬇ + 2NaCl
  26. विकृतगंधिता से क्या अभिप्राय है वसायुक्त या तैलीय खाद्य पदार्थ को ख़राब होने (विकृतगंधिता) से बचने के लिए क्या उपाय किये जाते है
    वसायुक्त या तैलीय खाद्य पदार्थ वातावरण में उपस्थित ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर उपचयित हो जाते है जिसके कारण इन खाद्य पदार्थों का स्वाद एवं गंध बदल जाती है इसे विकृतगंधिता कहते है
    विकृतगंधिता से बचाव
    तैलीय तथा वसायुक्त खाद्य सामग्रियों में उपचयन रोकने वाले पदार्थ (प्रति ऑक्सीकारक) मिलाए जाते हैं।
    तैलीय तथा वसायुक्त खाद्य सामग्रियों को वायुरोधी बर्तनों में रखने से उपचयन की गति धीमी हो जाती है।
    चिप्स बनाने वाले चिप्स की थैली में से ऑक्सीजन हटाकर उसमें नाइट्रोजन जैसे कम सक्रिय गैस भरी जाती हैं ताकि चिप्स का उपचयन न हो सके और चिप्स ख़राब न हो
  27. वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत क्यों कहा जाता है ? इन अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए
    वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत कहा जाता है क्योंकि वियोजन अभिक्रिया में एकल अभिकारक टूट कर दो या दो से अधिक उत्पाद बनाता है जबकि संयोजन अभिक्रिया में दो या दो से अधिक अभिकारक आपस में संयोग करके एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं
    Example
    संयोजन अभिक्रिया
    बिना बुझे चुने की जल के साथ अभिक्रिया
    CaO + H₂O  ➡   Ca(OH) ₂ + ऊष्मा
    वियोजन अभिक्रिया
    कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) का उष्मीय वियोजन -
    CaCO₃      गर्म  → CaO  +  CO₂
  28. रेडॉक्स अभिक्रिया से क्या अभिप्राय है ? उदाहरण दीजिए ।
    वह अभिक्रिया जिसमें एक पदार्थ का उपचयन/ऑक्सीकरण व दूसरे पदार्थ का अपचयन होता है रेडॉक्स अभिक्रिया कहलाती है
    Example-1
    CuO  + H₂  तापन   → Cu  +  H₂O
  29. ZnO + C ➡ Zn  + CO अभिक्रिया में किस पदार्थ का उपचयन व किस पदार्थ का अपचयन हो रहा है
    ZnO  +  C  ➡   Zn  + CO
    इस अभिक्रिया मे ZnO  का Zn में अपचयन हो रहा है तथा C का CO में उपचयन हो रहा है
  30. उन वियोजन अभिक्रियाओं के एक-एक समीकरण लिखिए जिनमें ऊष्मा, प्रकाश एवं विद्युत के रूप में ऊर्जा प्रदान की जाती है।
    (I) ऊष्मीय वियोजन / ताप अपघटन- जब किसी यौगिक को गर्म किया जाता है तो उसका अपघटन हो जाता है इसे ऊष्मीय विघटन कहते है
    कैल्शियम कार्बोनेट का उष्मीय वियोजन (चूने का निर्माण)
    CaCO₃     ➡गर्म ➡   CaO  +  CO₂
    कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर)
    (II) प्रकाशीय वियोजन- जब किसी यौगिक का प्रकाश की उपस्थिति मे अपघटन होता है। तो उसे प्रकाशीय अपघटन कहते है
    हाइड्रोजन ब्रोमाइड का प्रकाश अपघटन
    2 HBr  ➝सूर्य का प्रकाश →  H₂   +   Br₂
    (III)  विद्युत वियोजन - जब किसी यौगिक के विलियन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो वह अपघटित हो जाता है इसे विद्युत अपघटन कहते है
    जल का विद्युत अपघटन
    H₂O    → विधुत धारा→   H₂    +   O₂
  31. आक्सीजन के योग और ह्रास के आधार पर निम्न पदों की व्याख्या कीजिए प्रत्येक के दो-दो उदहारण दीजिए
    (अ) उपचयन            (ब) अपचयन
    (अ) उपचयन - वे रासायनिक अभिक्रियांए जिनमे किसी पदार्थ से आक्सीजन जुङती है या हाइड्रोजन हटती है उपचयन (ऑक्सीकरण) अभिक्रियांए कहलाती है
    (i) 2Cu + O₂ ➡ 2 CuO 
    ( यंहा Cu का CuO में उपचयन हो रहा है)
    (ii) 2Mg + O₂  ➡  2MgO 
    ( यंहा Mg का MgO में उपचयन हो रहा है)
    (ब) अपचयन - वे रासायनिक अभिक्रियांए जिनमे किसी पदार्थ से आक्सीजन हटती है इड्रोजन जुङती है अपचयन अभिक्रियांए कहलाती है
    (i) CuO + H₂ ➡  Cu + H₂O 
    ( यंहा CuO का Cu में अपचयन हो रहा है)
    (ii) ZnO  + C ➡ Zn + CO  
    (यंहा ZnO का Zn में अपचयन हो रहा है)
  32. निम्न अभिक्रियाए किस प्रकार की अभिक्रियाएँ है 
    (i) C  +  O₂   →   CO₂   +  ऊष्मा 
        संयोजन अभिक्रिया/ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया
    (ii) Na₂SO₄ + BaCl₂ → BaSo₄ ⬇ + 2NaCl
         द्विविस्थापन अभिक्रिया/अवक्षेपण अभिक्रिया
    (iii) 2 HBr  ➝सूर्य का प्रकाश →  H₂   +   Br₂
        वियोजन (अपघटन) अभिक्रिया
    (iv) CuO + H₂ ➡  Cu + H₂O 
        रेडॉक्स अभिक्रिया / अपचयन- उपचयन
  33. निम्न अभिक्रियाए किस प्रकार की अभिक्रियाएँ है 
    (i) CaO   + H₂O  ➡   Ca(OH)₂   + ऊष्मा 
        संयोजन अभिक्रिया/ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया
    (ii) Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu
        विस्थापन अभिक्रिया
    (iii) 2AgCl  ➡सूर्य का प्रकाश➡  2Ag + Cl₂
        वियोजन (अपघटन) अभिक्रिया
    (iv) 2Cu + O₂ ➡ 2 CuO 
        उपचयन (ऑक्सीकरण)
  34. निम्न अभिक्रियाए किस प्रकार की अभिक्रियाएँ है 
    (i) H₂    +  O₂   ➡    H₂O
        संयोजन अभिक्रिया
    (ii) CH₄ + O₂ → CO₂ + H₂O + ऊष्मा
        ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया
    (iii) CaCO₃ →गर्म → CaO + CO₂
        वियोजन (अपघटन) अभिक्रिया
    (iv) ZnO  +  C  ➡   Zn  + CO
        रेडॉक्स अभिक्रिया / अपचयन- उपचयन 
  35. निम्न अभिक्रियाए किस प्रकार की अभिक्रियाएँ है 
    (i) C₆H₁₂O₆ + 60₂ → 6CO₂ + 6H₂O + ऊर्जा
        ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया
    (ii) H₂O   ➡विधुत धारा→ H₂ + O₂
        वियोजन (अपघटन) अभिक्रिया
    (iii) CuO  + H₂  →तापन→ Cu  +  H₂O
        रेडॉक्स अभिक्रिया / अपचयन- उपचयन
    (iv) 2AgNO₃ + Cu ⟶ Cu[NO₃]₂ + 2Ag
        विस्थापन अभिक्रिया
  36. निम्न अभिक्रियाए किस प्रकार की अभिक्रियाएँ है 
    (i) Zn + CuSO₂ → ZnSO₄ + Cu
        विस्थापन अभिक्रिया
    (ii) 4Na + O₂  ⟶   2Na₂O
        रेडॉक्स अभिक्रिया / अपचयन- उपचयन 
    (iii) 2Mg + O₂  ➡  2MgO 
         उपचयन 
    (iv) CaCO₃ →गर्म → CaO + CO₂
        ऊष्माशोषी अभिक्रियाएं
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