GSSS BINCHAWA

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10 मानव बस्ती

मानव बस्ती -  मानव द्वारा निर्मित एवं विकसित घरों का संगठित समूह जिनमे मनुष्य रहते है मानव बस्ती कहलाती है  आधारभूत कार्यों के आधार पर मानव बस्तियां  दो  प्रकार की होती  हैं।

1. ग्रामीण बस्तियाँ   2. नगरीय बस्तियाँ

1. ग्रामीण बस्तियाँ - ऐसी बस्तियाँ जिनमें निवास करने वाले लोग कृषि या प्राथमिक क्रियाकलापो में संलग्न रहते हैं ग्रामीण बस्तियाँ (गाँव) कहलाती हैं

ग्रामीण बस्तियाँ अपने जीवन का पोषण अथवा आधारभूत आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति भूमि आधारित प्राथमिक आर्थिक क्रियाओं से करती हैं अतः ग्रामीण लोगों का भूमि से निकट संबंध होता है

2. नगरीय बस्तियाँ - ऐसी बस्तियाँ जिनमें निवास करने वाले अधिकांश लोग द्वितीयक या तृतीयक व्यवसाय में संलग्न रहते हैं नगरीय बस्तियाँ कहलाती हैं नगरीय बस्तियाँ अपने जीवन का पोषण अथवा आधारभूत आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति द्वितीयक या तृतीयक आर्थिक क्रियाओं से करती हैं

ग्रामीण बस्तियों के प्रकार 

आकृति के आधार पर बस्तियों को मुख्यतया निम्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

1. संहत बस्ती: इन बस्तियां में मकान पास-पास पाये जाते है  इस तरह की बस्तयों का विकास नदी घाटियों के सहारे या उपजाऊ मैदानों में होता है। इन बस्तियों में निवास करने वाले व्यक्ति मिल-जुलकर रहते हैं तथा इनमें से अधिकांश व्यक्तियों के व्यवसाय समान होते हैं।

2. प्रकीर्ण बस्ती: इन बस्तियों में मकान दूर-दूर होते हैं तथा प्रायः खेतों के द्वारा एक दूसरे से अलग होते हैं। एक सांस्कृतिक आकृति जैसे पूजा-स्थल अथवा बाजार इन बस्तियों को एक साथ बाँधता है। 

ग्रामीण बस्तियों को प्रभावित करने वाले कारक 

1. जल आपूर्ति - साधरणतया ग्रामीण बस्तियाँ  नदियाँ, झीलें एवं झरनों इत्यादि के समीप स्थित होती हैं, जहाँ जल आसानी से उपलब्ध् हो जाता है। कभी-कभी पानी की आवश्यकता लोगों को अन्यथा असुविधाजनक स्थानों जैसे दलदल से घिरे द्वीपों अथवा नदी किनारों के निचले क्षेत्रों में बसने के लिए प्रेरित करते हैं।

2. भूमि - मनुष्य बसने के लिए उस स्थान का चयन करता है जहाँ की भूमि खेती के लिए उपयुक्त व उपजाऊ हो। किसी भी क्षेत्र में प्रारम्भिक अधिवासी उपजाऊ एवं समतल क्षेत्रों में ही बसते थे। यूरोप में दलदली क्षेत्र एवं निचले क्षेत्र में बस्तियाँ नहीं बसाई जाती हैं जबकि दक्षिणी पूर्वी एशिया में रहने वाले लोग नदी घाटियों के निम्न भाग एवं तटवर्ती मैदानों के निकट बस्तियाँ बसाते हैं जो कि उन्हें नम चावल की कृषि के लिए सहायक होते हैं। 

3. उच्च भूमि के क्षेत्र - मानव ने अपने अधिवास हेतु ऊँचे क्षेत्रों को इसलिए चुना कि वहाँ पर बाढ़ के समय होने वाली क्षति से बचा जा सके एवं मकान व जीवन सुरक्षित रह सके। नदी बेसिन के निम्न भाग में बस्तियाँ नदी वेदिकाओं एवं तटबंधें पर बसाई जाती हैं क्योंकि ये भाग ‘शुष्क बिंदु’ होते हैं। उष्ण कटिबंधीय देशों के दलदली क्षेत्रों के निकट लोग अपने मकान स्तंभों पर बनाते हैं जिससे कि बाढ़ एवं कीडे़-मकोड़ों से बचा जा सके।

4. गृह निर्माण सामग्री - मनुष्य अपनी बस्तियाँ वहाँ बसाता है जहाँ आसानी से लकड़ी, पत्थर आदि प्राप्त हो जाते हैं। प्राचीन गाँवों को वनों को काटकर बनाया गया था, क्योंकि वहाँ लकड़ी बहुतायत में थी। चीन के लोयस क्षेत्र में वहाँ के निवासी कंदराओं में मकान बनाते थे एवं अफ्रीका के सवाना प्रदेश में कच्ची ईंटों के मकान बनते थे जबकि ध्रुवीय क्षेत्र में एस्किमो हिम खंडों से अपने घर (इग्लू) का निर्माण करते हैं।

5. सुरक्षा- राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध या उपद्रव होने की स्थिति में गाँवों को सुरक्षात्मक पहाड़ियों एवं द्वीपों पर बसाया जाता था। नाइजीरिया में खडे़ इंसेलबर्ग अच्छी सुरक्षित स्थिति प्रदान करते हैं। भारत में अधिकतर दुर्ग उँचे स्थानों अथवा पहाड़ियों पर स्थित हैं।

नियोजित बस्तियाँ

सरकार द्वारा भूमि का अधिग्रहण कर एक कुशल योजना के माध्यम से सभी प्रकार कीं सुविधाएँ उपलब्ध कराकर विकसित की गई  बस्ती नियोजित बस्ती कहलाती है  सरकार द्वारा अधिगृहित की गई भूमि पर निवासियों को सभी प्रकार की सुविधाएँ जैसे आवास, पानी तथा अन्य अवसंरचना आदि उपलब्ध कराकर नियोजित बस्तियों को विकसित किया जाता हैं। इथोपिया में सरकार द्वारा ग्रामीणीकरण योजना एवं भारत में इंदिरा गांधी नहर के क्षेत्र में नहरी बस्तियों का विकास इसके अच्छे उदाहरण हैं। 

ग्रामीण बस्तियों के प्रतिरूप

ग्रामीण बस्तियों के बसाव की आकृति के आधार पर किए गए विभाजन को ग्रामीण बस्तियों का प्रतिरूप कहा जाता है  ग्रामीण बस्तियों का वर्गीकरण कई मापदंडों के आधार पर किया जा सकता है:

(i) विन्यास के आधार पर: 

1. मैदानी ग्राम 2. पठारी ग्राम  3. तटीय ग्राम 4.वन ग्राम 5.मरुस्थलीय ग्राम

(ii) कार्य के आधार पर: 

1.कृषि ग्राम  2.मछुवारों के ग्राम 3. लकड़हारों के ग्राम 4.पशुपालक 

(iii) बस्तियों की आकृति के आधार पर: 

(क) रैखिक प्रतिरूप: जब मकान या आवास सड़क मार्ग, रेल मार्ग, नहर, नदी या सागर तट पर पंक्तिबद्ध रूप से स्थित होते हैं तो ऐसे प्रतिरूप को रेखीय प्रतिरूप कहते हैं।

(ख) आयताकार प्रतिरूप: जब दो सड़के एक दूसरे को समकोण पर काटती है तो उनके मिलन स्थल पर दोनों सड़कों के किनारे लम्बवत गलियों का निर्माण होता है तो आयताकार प्रतिरूप का निर्माण होता है ग्रामीण बस्तियों का यह प्रतिरूप समतल क्षेत्रों अथवा चौड़ी अंतरा पर्वतीय घाटियों में पाया जाता है। 

(ग) वृत्ताकार प्रतिरूप: किसी झील, तालाब या चौपाल के चारों ओर मकान बनाने से निर्मित अधिवास वृत्ताकार प्रतिरूप कहलाता है 

(घ) तारा प्रतिरूप : जब अरीय प्रतिरूप में बाहर की ओर जाने वाली सड़कों के किनारे मकान बन जाते हैं तो तारा प्रतिरूप का निर्माण होता है: जहाँ कई मार्ग आकर एक स्थान पर मिलते हैं आरै उन मार्गों के सहारे मकान बन जाते हैं वहाँ तारे के आकार की बस्तियाँ विकसित होती हैं।

(ड) ‘टी’ आकार, ‘वाई’ आकार, क्रॉस आकार: टी के आकार की बस्तियाँ सड़क के तिराहे पर विकसित होती हैं। जबकि वाई आकार की बस्तियाँ उन क्षेत्रों में पाई जाती हैं जहाँ पर दो मार्ग आकर तीसरे मार्ग से मिलते हैं। क्रॉस आकार की बस्तियाँ चौराहों पर प्रारंभ होती हैं जहाँ चौराहे से चारों दिशा में बसाव आरंभ हो जाता है।

(च) दोहरे ग्राम: नदी पर पुल या फेरी के दोनों ओर इन बस्तियों का विस्तार होता है।

ग्रामीण बस्तियों की समस्याएँ

1. आवागमन के साधनों का अभाव- कच्ची सड़क एवं आधुनिक संचार के साधनों की कमी भी यहाँ की प्रमुख समस्या है। वर्षा ऋतु में इन क्षेत्रों का संपर्क आसपास के क्षेत्र से कट जाता है जिससे आपतकालीन सेवाएँ प्रदान करने में भी गंभीर कठिनाइयाँ उपलब्ध् हो जाती है।

2. जल की अपर्याप्त आपूर्ति - विकासशील देशों में ग्रामीण बस्तियों में जल की आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं है। पर्वतीय एवं शुष्क क्षेत्रों में निवासियों को पेय जल हेतु लंबी दूरियाँ तय करनी पड़ती हैं। जल जनित बीमारियाँ जैसे हैजा, पीलिया आदि सामान्य समस्या है। दक्षिणी एशिया के देश प्रायः बाढ़ एवं सूखे से ग्रस्त रहते हैं। सिंचाई सुविधएँ कम होने से कृषि कार्य पर भी प्रभाव पड़ता है।

3. स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं का अभाव- विशाल ग्रामीण जनसंख्या के लिए स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी पर्याप्त सुविधाएँ प्रदान करना ग्रामीण बस्तियों की सबसे बड़ी समस्या है। यह समस्या उस समय और विकट हो जाती है जब ग्रामीणीकरण उचित प्रकार से नहीं हुआ है और विशाल क्षेत्र में मकान दूर तक विकसित होते हैं।

4. शौचघर एवं कूड़ा-कचरा निस्तारण का अभाव- ग्रामीण बस्तियों में  शौचघर एवं कूड़ा-कचरा निस्तारण की सुविधाएँ नगण्य हैं। जिससे इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएँ रहती हैं।

5. जीवन की निम्नतर दशाएं - ग्रामीण बस्तियों में मकान घटिया स्तर की निर्माण सामग्री से बने होते है उन्हे भारी वर्षा एवं बाढ़ के समय काफी नुकसान पहुँचता है मकानों में उपयुक्त संवातन नहीं होता है। एक ही मकान में मनुष्यों के साथ पशु भी रहते हैं।

6. रोजगार के अवसरों का अभाव - ग्रामीण बस्तियों में रोजगार के सिमित साधन होते है यहाँ मौसमी बेरोजगारी पाई जाती है

नगरीय बस्तियाँ

लंदन को विश्व की प्रथम नगरीय बस्ती होने का गौरव प्राप्त है 1982 में विश्व में करीब 175 नगर थे। वर्तमान समय में 48 प्रतिशत जनसंख्या नगरों में निवास करती है 

नगरीय बस्तियों का वर्गीकरण

नगरीय बस्तियों का वर्गीकरण सामान्य आधार जनसंख्या का आकार, मनुष्यों द्वारा किए जाने वाले व्यवसाय, प्रशासकीय ढाँचा एवं स्थिति  है।

1. जनसंख्या का आकार

नगरीय क्षेत्रों को परिभाषित करने के लिए अधिकतर देशों ने इसी मापदंड को अपनाया है। नगरीय क्षेत्र की श्रेणी में आने के लिए जनसंख्या के आकार की निचली सीमा कोलंबिया में 1500, अर्जेंटाइना एवं पुर्तगाल में 2000, संयुक्त राज्य अमेरिका एवं थाईलैंड में 2500, भारत में 5000 एवं जापान में 30,000 व्यक्ति हैं। भारत में जनसंख्या के अतिरिक्त जनसंख्या घनत्व भी 400 व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर होना चाहिए विभिन्न देशों में जनसंख्या घनत्व अधिक या कम होने की स्थिति में घनत्व वाला मापदंड उसी के अनुरूप बढ़ा या घटा दिया जाता है। डेनमार्वफ, स्वीडन एवं फिनलैंड में 250 व्यक्तियों की जनसख्ंया वाले सभी क्षत्र नगरीय क्षत्र कहलाते है 

2. व्यावसायिक संरचना

जनसंख्या के आकार के अतिरिक्त कुछ देशों में जैसे भारत में प्रमुख आर्थिक गतिविधियों को भी नगरीय बस्तियाँ निर्दिष्ट करने के लिए मापदंड माना जाता है। इसी प्रकार इटली में उस बस्ती को नगरीय कहा जाता है जिसकी आर्थिक रूप से उत्पादक जनसंख्या का 50 प्रतिशत गैर कृषि कार्यों में संलग्न हो। भारत में यह मापदंड 75 प्रतिशत का रखा गया है।

3. प्रशासन

कुछ देशों में किसी बस्ती को नगरीय बस्ती में वर्गीकृत करने हेतु प्रशासनिक ढाँचे को मापदंड माना जाता है। उदाहरण के लिए भारत में किसी भी आकार की बस्तियों को नगर के रूप में वर्गीकृत किया जाता है यदि वहाँ नगरपालिका, छावनी बोर्ड या अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति है। इसी प्रकार लैटिन अमेरिका के देश ब्राजील एवं बोलीविया में जनसंख्या आकार का ध्यान नहीं रखते हुए किसी भी प्रशासकीय केंद्र को नगरीय केद्र माना जाता है।

4. स्थिति

नगरीय केन्द्रों की स्थिति उनके द्वारा संपन्न कार्यों के आधार पर देखी जाती है।सामरिक नगरों की स्थिति ऐसी जगह हो जहाँ इसे प्राकृतिक सुरक्षा मिले। खनिज नगरों के लिए आर्थिक दृष्टिकोण से उपयोगी खनिजों का पाया जाना आवश्यक है औद्योगिक नगरों के लिए स्थानीय शक्ति के साधन एवं कच्चा माल, पर्यटन केंद्र के लिए आकर्षक दृश्य या सामुद्रिक तट, औषधीय जल वाला झरना या कोई ऐतिहासिक अवशेष तथा पत्तन के लिए पोताश्रय का होना।

उप नगरीकरण

यह नगरीकरण की एक नवीन प्रवृत्ति है जिसमें मानव बड़े शहर के सघन बसे क्षेत्रों में स्थित आवासों छोड़कर शहर से बाहर एक ऐसे खुले व स्वच्छ बातावरण में अपना आवास बनाकर रहने लगता है जहाँ रहन-सहन को उत्तम सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं। इस प्रक्रिया से बड़े शहरों के निकट ऐसे उपनगर विकसित हो जाते हैं, जहाँ प्रतिदन हजारों व्यक्ति बड़े शहरों में स्थित कार्य स्थलों पर आते-जाते हैं।

1991 की भारतीय जनगणना में नगरीय बस्ती को इस प्रकार परिभाषित किया है। ‘सभी स्थान जहाँ नगरपालिका, निगम, छावनी बोर्ड या अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति (नोटीफाइड टाउन एरिया कमेटी) हो एवं कम से कम 5000 व्यक्ति वहाँ निवास करते हों, 75 प्रतिशत पुरुष श्रमिक गैर कृषि कार्यों में संलग्न हों व जनसंख्या का घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर हो, ऐसे स्थान या क्षेत्र को नगरीय बस्ती कहते है

नगरीकरण - नगरीकरण से तात्पर्य एक देश की नगरीय क्षेत्र में निवास करने वाली जनसंख्या में अनुपातिक वृद्धि से है। नगरीकरण का प्रमुख कारण ग्रामों से नगरों की ओर प्रवास है। 

नगरों का प्रकार्यात्मक वर्गीकरण

विशेषीकृत प्रकार्यों के आधार पर नगरों को निम्नलिखित प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है 

1. प्रशासनिक  नगर

राष्ट्र की राजधनियाँ जहाँ पर केंद्रीय सरकार के प्रशासनिक कार्यालय होते हैं प्रशासनिक नगर कहलाते हैं। जैसे नयी दिल्ली, केनबेरा, बीजिंग, अदीस अबाबा, वाशिंगटन डी.सी. एवं लंदन इत्यादि प्रशासनिक नगर हैं। 

2. व्यापारिक एवं व्यावसायिक नगर

ऐसे नगर जिसके द्वारा किये जाने वाले केन्द्रीय कार्यों में व्यापार एवं व्यावसाय की प्रधानता होती है, व्यापारिक एवं व्यावसायिक नगर कहलाते हैं। जसे कृषि बाजार कस्बे जैसे विनिपेग एवं कंसास, बैंकिंग एवं वित्तीय कार्य करने वाले नगर जैसे फ्रेंकफर्ट एवं एमसटर्डम, विशाल अंतर्देशीय केंद्र जैसे मैनचेस्टर एवं सेंट लूइस एवं परिवहन केंद्र जैसे लाहौर, बगदाद एवं आगरा आदि 

3. धार्मिक और सांस्कृतिक नगर

धार्मिक अथवा सांस्कृतिक महत्व वाले नगर सांस्कृतिक नगर कहलाते है जैसे जैरूसलम, मक्का, जगन्नाथ पुरी एवं बनारस 

इनके अतिरिक्त अन्य नगरों में स्वास्थ्य एवं मनोरंजन नगर (मियामी एवं पणजी), औद्योगिक नगर  (पिट्सबर्ग एवं जमशेदपुर), खनन नगर (ब्रोकन हिल एवं धनबाद) एवं परिवहन नगर (सिंगापुर एवं मुगलसराय) आदि सम्मिलित हैं।

आकृति के आधार पर नगरों का वर्गीकरण 

एक नगरीय बस्ती रेखीय, वर्गाकार, तारा के आकार या अर्ध चंद्राकार (चापाकार) हो सकती है। वास्तव में किसी भी नगर की आकृति, वास्तुकला एवं भवनों की शैली वहाँ के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की देन होती है। विकसित देशों में अधिकतर नगर योजनाबद्ध तरीके से बसाये गए हैं जबकि विकासशील देशों में अधिकतर नगरों की उत्पत्ति ऐतिहासिक है तथा उनकी आकृति अनियमित है। उदाहरण के तौर पर चंडीगढ़ एवं केनबरा नियोजित नगर हैं जबकि भारत में छोटे कस्बे ऐतिहासिक रूप से परकोटे से बाहर की ओर बडे़ नगरीय फैलाव में गैर योजनाबद्ध तरीके से विकसित हुए हैं।

अदीस अबाबा (नवीन पुष्प)

अदीस अबाबा इथोपिया की राजधनी है यह इथोपिया के मध्य में स्थित है जैसा कि इसके नाम से विदित होता है (अदीस-नया, अबाबा-पुष्प) एक नया नगर है जिसकी स्थापना 1878 में हुई थी। संपूर्ण नगर पर्वतीय घाटी स्थलाकृति पर स्थित है राजकीय मुख्यालय प्याज्जा, अरात एवं आमिस्ट किलो से चारों ओर सड़कें जाती हैं। उत्तर में काहिरा एवं दक्षिण में जोहंसबर्ग के बीच मरकाटो में सबसे बड़ा बाजार है। अदीस अबाबा जहाँ एक बहु संकाय विश्वविद्यालय, चिकित्सा महाविद्यालय एवं कई अच्छे स्कूल होने की वजह से शिक्षा का भी एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है। जिबूती  अदीस अबाबा रेलमार्ग का अंतिम स्टेशन है। बोले हवाई अड्डा एक नया हवाई अड्डा है। 

केनबेरा

अमेरिकन वास्तुविद वाल्टर बरली ग्रिफिन ने 1912 में आस्ट्रेलिया की राजधनी के लिए इस नगर की योजना बनाई। भू-दृश्य की प्राकृतिक आकृतियों को ध्यान में रखते हुए लगभग 25,000 निवासियों के रहने के लिए इस उद्यान नगर की कल्पना की थी। इसमें पाँच मुख्य केंद्र थे, प्रत्येक के अलग-अलग कार्य थे। पिछले कुछ दशकों में कई उपनगर इसके समीप बन गए हैं यहाँ कई उद्यान तथा पार्क हैं।

नगरीय बस्तियों के प्रकार

नगरीय बस्ती अपने आकार, उपलब्ध् सुविधओं एवं उनके द्वारा संपन्न किए जाने वाले कार्यों के आधर पर कई नामों से पुकारी जाती हैं जैसे नगर, शहर, मिलियन सिटी, सन्नगर, विश्वनगरी। 

1. नगर - एक लाख से अधिक किंतु 10 लाख से कम जनसंख्या वाले अधिवास नगर कहलाते हैं

2. शहर - शहर नगरों से बडे़ होते हैं यह अग्रणी नगर होता है। लेविस ममफोर्ड के शब्दों में, ‘वास्तव में शहर उच्च एवं अधिक जटिल प्रकार के सहचारी जीवन का भौतिक रूप हैं।’ 

3. मिलियन सिटी - जिन नगरों की जनसंख्या 10 लाख से अधिक होती है उन्हें मिलियन सिटी कहा जाता है। जैसे – लंदन, पेरिस, न्यूयार्क आदि  विश्व में 2005 तक 438 व 2016 तक 512 मिलियन सिटी थे 

4. सन्नगर - सन्नगर शब्द सर्वप्रथम प्रयोग पैट्रिक गिडिज(1915) ने किया था। मूलतः अलग-अलग नगरों या शहरों के आपस में मिल जाने से एक विशाल नगरीय विकास क्षेत्र बन जाता है। जिसे सन्नगर कहते हैं जैसे लंदन, टोक्यो, शिकांगो, दिल्ली-गुडगांव

5. विश्वनगरी - विश्वनगरी यूनानी शब्द ‘मेगालोपोलिस’ से बना है जिसका अर्थ होता है ‘विशाल नगर’। इसका प्रयोग 1957 में जीन गोटमेन ने किया। एक ऐसा बड़ा महानगर प्रदेश जिसमें कई सन्नगरों का समूह मिलाता है। विश्वनगरी कहलाता है  इनकी जनसंख्या 50 लाख से अधिक होती है विश्वनगरी का सबसे अच्छा उदाहरण संयुक्त राज्य अमेरिका में उत्तर में बोस्टन से दक्षिण में वाशिंगटन तक नगरीय भूदृश्य के रूप में दिखाई देता है।

6. मेगासिटी - ऐसे महानगर जिनकी जनसंख्या मुख्य नगर व उपनगरों को मिलाकर एक करोड़ से अधिक हो। मेगासिटी कहलाते है  विश्वि में वर्तमान में 25 मेगासिटी  है सबसे पहला मेगासिटी न्यूयार्क है इसके अलावा टोक्यो, मुंबई, दिल्ली, ओसाका, कोलकाता, काहिरा, ढाका अन्य मेगासिटी है 

नगरीय बस्तियों की समस्याएँ

रोजगार के अवसर एवं नागरिक सुविधाओं के लिए मानव शहरों की ओर आता है। परंतु विकासशील देशों में अधिकतर शहर अनियोजित हैं अतः आने वाले व्यक्ति अत्यंत भीड़ की स्थिति पैदा कर देते हैं विकासशील देशों के आधुनिक शहरों मे आवासों कमी, लम्बवत विस्तार (बहुमंजिला मकान) तथा गन्दी बस्तियों की वृद्धि प्रमुख विशेषताएँ हैं। अनेक शहरों में जनसंख्या का बढ़ता भाग निम्न स्तरीय आवासों जैसे गंदी बस्तियों, अनधिकृत बस्तियों में रहते हैं। 

1. आर्थिक समस्याएँ

विश्व के विकासशील देशों के ग्रामीण व छोटे नगरीय क्षेत्रों में रोजगार के घटते अवसरों के कारण जनसंख्या का शहरों की ओर पलायन हो रहा है। यह विशाल प्रवासी जनसंख्या नगरीय क्षेत्रों में अकुशल एवं अर्द्धकुशल श्रमिकों, की संख्या में अत्यधिक वृद्धि कर देती है 

2. सामाजिक-सांस्कृतिक समस्याएँ

विकासशील देशों के शहर विभिन्न प्रकार की सामाजिक बुराइयों से ग्रस्त हैं। अपर्याप्त वित्तीय संसाधनों के कारण नगरों की अधिकतर जनसंख्या की आधरभूत आवश्यकताएँ भी पूरी नहीं हो पाती हैं। उपलब्ध् स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी सुविधाएँ गरीब नगरवासियों की पँहुच से बाहर रहती हैं। बेरोजगारी एवं शिक्षा की कमी के कारण अपराध अधिक होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से स्थानांतरित जनसंख्या में पुरुषों की अधिकता के कारण इन नगरों में जनसंख्या का लिंग अनुपात असंतुलित हो जाता है।

3. पर्यावरण संबंधी समस्याएँ

विकासशील देशों में रहने वाली विशाल नगरीय जनसंख्या घरेलू एवं औद्योगिक कार्यों के लिए परंपरागत ईंधन के व्यापक उपयोग के कारण वायु प्रदूषित हो जाती है। एक अनुपयुक्त मल निस्तारण व्यवस्था अस्वास्थ्यकर दशाएँ पैदा करती हैं। घरेलू एवं औद्योगिक अपशिष्ट को सामान्य मल-व्यवस्था में डाल दिया जाता है या बिना किसी शोधन के अनिश्चित स्थानों में डाल दिया जाता है। जनसंख्या को आवास प्रदान करने के लिए विशाल कंकरीट ढाँचे बनाए जाते हैं जो नगरों में ‘उष्म द्वीप’ बनाने में सहायक भूमिका निभाते हैं। 

स्वस्थ शहर 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक स्वस्थ शहर में निम्न सुविधएँ अवश्य होनी चाहिए:

1. ‘स्वच्छ’ एवं ‘सुरक्षित’ वातावरण

2. सभी निवासियों की आधरभूत आवश्यकताओं की पूर्ति

3. स्थानीय सरकार में समुदाय की भागीदारी

4. सभी के लिए आसानी से उपलब्ध् स्वास्थ्य सुविधएँ

नगरीय रणनीति की योजना

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने ‘नगर रणनीति’ में निम्न प्राथमिकताएँ बताई हैंः

1.नगरीय निर्धनों के लिए ‘आश्रयस्थल’ में वृद्धि

2.आधरभूत  सुविधओं जैसे शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य, स्वच्छ जल और सफाई का प्रबंध आदि को उपलब्ध करवाना।

3.महिलाओं की ‘मूलभूत सेवाओं’ तथा राजकीय सुविधाओं तक पहुँच में सुधार

4. उर्जा उपयोग तथा वैकल्पिक परिवहन तंत्र को उन्नत बनाना।

5. वायु प्रदूषण को कम करना।


             वस्तुनिष्ठ प्रश्न   
  1. निम्नलिखित में से किस प्रकार की बस्ती सड़कों, नदियों या नहरों के दोनों ओर विकसित होती है?
    [अ] गोलाकार
    [ब] रैखिक
    [स] क्रॉस-आकार
    [द] वर्ग [ब] 
  2. निम्नलिखित में से किस प्रकार की आर्थिक गतिविधि सभी ग्रामीण बस्तियों में हावी है?
    [अ] प्राथमिक
    [ब] तृतीयक
    [स] माध्यमिक
    [द] चतुर्धातुक [अ]
  3. नगरीय संकुल का अर्थ है
    [अ] एक नगरीय क्षेत्र के चारों ओर नगरों की श्रंखला
    [ब] नगरों में संकुलन बढ़ना 
    [स] A तथा B दोनों 
    [द] इनमे से कोई नहीं [अ]
  4. कई बार बस्ती भौतिक रूप से एक दूसरे से पृथक हो जाती है किन्तु उन सब का नाम एक ही रहता है, ऐसी बस्ती कहलाती है: 
    [अ] गुच्छित बस्ती 
    [ब] अर्ध गुच्छित बस्ती 
    [स] पल्ली बस्ती 
    [द] इनमे से कोई नहीं [स]
  5. किसी भी प्रकार के घरों का संकुल जिसमे मनुष्य रहते हैं कहलाता है:
    [अ] मानव बस्ती 
    [ब] क़स्बा 
    [स] ग्राम 
    [द] नगर                            [अ]
  6. किसी झील के चारों ओर बसा अधिवास किस प्रतिरूप में आयेगा?
    [अ] आयताकार
    [ब] अरीय
    [स] वृत्ताकार
    [द] तारा                            [स]
  7. निम्नलिखित में कौन औद्योगिक नगर है?
    [अ] जमशेदपुर
    [ब] वाराणसी
    [स] केनबेरा
    [द] सिंगापुर                    [अ]
  8. निम्नलिखित में कौन सांस्कृतिक नगर है?
    [अ] केनबेरा
    [ब] लंदन
    [स] मक्का
    [द] ओसाका                [स]
  9. किसी बस्ती की कम-से-कम कितनी आबादी होने पर अमेरिका में शहर कहा जाता है?
    [अ] 2500
    [ब] 5000
    [स] 1000
    [द] 3000                  [अ]
  10. पर्वतों पर किस प्रकार का अधिवास पाया जाता है?
    [अ] रैखिक
    [ब] त्रिभुजाकार
    [स] आयताकार
    [द] सीढ़ीनुमा              [द]
  11. निम्नलिखित में से कौन इथोपिया की राजधानी हैं?
    [अ] केनबेरा
    [ब] लुशाका
    [स] अदीस अबाबा
    [द] नैरोबी                    [स]
  12. निम्नलिखित में कौन सांस्कृतिक नगर है?.
    [अ] जैरूसलम
    [ब] मैनचेस्टर
    [स] ओसाका
    [द] फ्रेंकफर्ट                [अ]
  13. इनमें कौन औद्योगिक नगर है?
    [अ] वाराणसी
    [ब] पटना
    [स] लाहौर
    [द] पिट्सबर्ग            [द]
  14. मुख्य नगर व उपनगर को मिलाकर एक करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले नगर के लिए प्रयुक्त शब्द-
    [अ] मेगा सिटी 
    [ब] सन्नगर
    [स] नगर 
    [द] मेगालोपोलिस        [अ]
  15. दस लाख से अधिक जनसंख्या वाला नगर कहलाता है-
    [अ] विश्व नगरी
    [ब] मिलियन सिटी
    [स] मेगासिटी 
    [द] महानगर                [ब]
  16. ध्रुवीय क्षेत्र में एस्किमों द्वारा हिम खण्डों से बनाये गये मकानों को क्या कहते हैं?
    [अ] इग्लू
    [ब] इन्सेलबर्ग
    [स] लोयस
    [द] पाल                    [अ]
  17. समकोण सड़कों पर बसी बस्ती के प्रतिरूप को क्या कहते हैं?
    [अ] तारा प्रतिरूप
    [ब] वृत्ताकार प्रतिरूप
    [स] आयताकार प्रतिरूप
    [द] रैखिक प्रतिरूप        [स]
  18. निम्न में से किस प्रदेश में प्रलेखित प्राचीनतम नगरीय बस्ती रही है ?
    [अ] ह्वांगहो की घाटी
    [ब] सिंधु घाटी
    [स] नील घाटी
    [द] मेसोपोटामिया       [ब]
  19. विकासशील देशों की जनसंख्या के सामाजिक ढाँचे के विकास एवं आवश्यकताओं की पूर्ति में कौन-से प्रकार के संसाधन सहायक हैं ?
    [अ] वित्तीय
    [ब] मानवीय
    [स] प्राकृतिक
    [द] सामाजिक              [अ]
  20. 2006 के प्रारंभ में भारत में कितने मिलियन सिटी थे ? [2011 में 53]
    [अ] 40
    [ब] 41
    [स] 42
    [द] 43                         [स]


  1. विश्व के सबसे पहले मेगासिटी होने का श्रेय किस नगर को है 
    न्यूयार्क 
  2. मेगालोपोलिस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया 
    1957 में जीन गोटमेन ने
  3. सन्नगर शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम कब व किसने किया 
    1915 में पेट्रिक गिडिज ने 
  4. किस महाद्वीप में  मिलियन सिटी की संख्या सर्वाधिक हैं 
    एशिया में
  5. 2001 ई. में विश्व में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत कितना था?
     48 प्रतिशत
  6. विश्व की प्रथम नगरीय बस्ती किस नगर को कहा गया है?
    लन्दन को
  7. विश्व के किन्हीं दो नियोजित नगरों के नाम लिखो।
    कैनबरा, अदीस अबाबा
  8. विश्वि में वर्तमान में कितने मेगासिटी  है
    विश्वि में वर्तमान में 25मेगासिटी  है
  9. नगरीकरण का प्रमुख कारण क्‍या है ? 
    नगरीकरण का प्रमुख कारण गांवों से नगरों की ओर प्रवास है।
  10. विश्व की सबसे पहली मिलियन सिटी कौन सी है?
    लंदन
  11. किस प्रकार की बस्ती प्रतिरूप झीलों व तालाबों के इर्द-गिर्द विकसित होती हैं
    वृताकार प्रतिरूप
  12. आधारभूत कार्यों के आधार पर मानव अधिवास कितने प्रकार के होते हैं।
    1. ग्रामीण अधिवास 2. नगरीय अधिवास
  13.  आकृति के आधार पर बस्तियों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है 
    आकृति के आधार पर बस्तियों को दो भागों में बाँटा जा सकता है (i) संहत बस्ती (ii) प्रकीर्ण बस्ती
  14. नगरीकरण से क्‍या तात्पर्य है ?
    नगरीकरण से तात्पर्य एक देश की नगरीय क्षेत्र में निवास करने वाली जनसंख्या में आनुपातिक वृद्धि से है
  15. ग्रामीण बस्तियों को प्रभावित करने वाले कोई चार कारक बताइए।
    (i) जल आपूर्ति (ii) भूमि (iii) सुरक्षा (iv) गृह निर्माण सामग्री।
  16. रैखिक प्रतिरूप की बस्तियों के अवलोकनार्थ आप कौन से भूदृश्यों का चयन करेंगे?
    मैदानी भागों के सड़क मार्ग, रेलमार्ग, नहर मार्ग।
  17. वृत्ताकार प्रतिरूप किस प्रकार विकसित होते हैं ?
    वृत्ताकार प्रतिरूप झील एवं तालाब आदि क्षेत्रों के चारों ओर बस्ती बस जाने से विकसित होता है।
  18. स्थान (साइट) एवं स्थिति (सिचुएसन) के मध्य अंतर लिखिए 
    स्थान से तात्पर्य उस वास्तविक भूमि से है जिस पर बस्ती बनी हुई है। जबकि बस्ती की स्थिति उसके आसपास के क्षेत्र के संबंध में उसकी अवस्थिति बताती है।
  19. मिलियन सिटी किसे कहते है
    जिन नगरों की जनसंख्या 10 लाख से अधिक होती है उन्हें मिलियन सिटी कहा जाता है। जैसे – लंदन, पेरिस, न्यूयार्क आदि 
  20. नगरीय बस्तियों की  प्रमुख पर्यावारणीय समस्याएं लिखिए।
    1. पर्यावरण प्रदूषण की समस्या
    2. नगरों में ‘उष्म द्वीप’ का निर्माण
  21. मानव बस्ती  किसे कहते हैं                       
    पृथ्वी के धरातल पर मानव द्वारा निर्मित एवं विकसित आवासों का संगठित समूह मानव अधिवास या मानव बस्ती कहलाती है
  22. सन्नगर किसे कहते हैं 
    मूलतः अलग-अलग नगरों या शहरों के आपस में मिल जाने से एक विशाल नगरीय विकास क्षेत्र बन जाता है। जिसे सन्नगर कहते हैं जैसे लंदन, टोक्यो, शिकांगो, दिल्ली-गुडगांव
  23. मेगासिटी किसे कहते है 
    ऐसे महानगर जिनकी जनसंख्या मुख्य नगर व उपनगरों को मिलाकर एक करोड़ से अधिक हो। मेगासिटी कहलाते है  सबसे पहला मेगासिटी न्यूयार्क है इसके अलावा टोक्यो, मुंबई, दिल्ली, ओसाका, कोलकाता, काहिरा, ढाका अन्य मेगासिटी है 
  24. विश्वनगरी क्या  है संक्षिप्त विवरण दीजिए
    विश्वनगरी यूनानी शब्द ‘मेगालोपोलिस’ से बना है जिसका अर्थ होता है ‘विशाल नगर’। इसका प्रयोग 1957 में जीन गोटमेन ने किया। एक ऐसा बड़ा महानगर प्रदेश जिसमें कई सन्नगरों का समूह मिलाता है। विश्वनगरी कहलाता है  इनकी जनसंख्या 50 लाख से अधिक होती है विश्वनगरी का सबसे अच्छा उदाहरण संयुक्त राज्य अमेरिका में उत्तर में बोस्टन से दक्षिण में वाशिंगटन तक नगरीय भूदृश्य के रूप में दिखाई देता है।
  25. उपनगरीकरण क्‍या है 
    यह नगरीकरण की एक नवीन प्रवृत्ति है जिसमें मानव बड़े शहर के सघन बसे क्षेत्रों में स्थित आवासों छोड़कर शहर से बाहर एक ऐसे खुले व स्वच्छ बातावरण में अपना आवास बनाकर रहने लगता है जहाँ रहन-सहन को उत्तम सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं। इस प्रक्रिया से बड़े शहरों के निकट ऐसे उपनगर विकसित हो जाते हैं, जहाँ प्रतिदन हजारों व्यक्ति बड़े शहरों में स्थित कार्य स्थलों पर आते-जाते हैं।
  26. सन्‌ 1991 में भारतीय जनगणना में नगरीय बस्ती के लिए निर्धारित मापदण्डों को लिखिए।
    (i) सभी स्थान जहाँ नगरपालिका, निगम, छावनी बोर्ड या अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति (नोटीफाइंड टाउन एरिया कमेटी) कार्यरत हों।
    (ii) ऐसी बस्ती जिसमें कम-से-कम 5 हजार व्यक्ति निवास करते हों।
    (iii) ऐसी बस्ती जिसमें निवास करने वाले 75 प्रतिशत पुरुष श्रमिक गैर-कृषि कार्यों में संलग्न हों।
    (iv) ऐसी बस्ती जिसमें जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. से अधिक हो।
  27.  नम बिंदु बस्तियाँ क्‍या हैं ? इनके प्राप्त लाभों को लिखिए।
    ग्रामीण बस्तियाँ जो जल स्रोतों जैसे-नदियों, झीलों एबं झरनों आदि के समीप स्थित होती हैं। इन्हें ही नम बिंदु बस्तियाँ कहते हैं।
    नम बिंदु बस्तियों से प्राप्त लाभ
    (i) नम बिंदु बस्तियों में पीने, खाना बनाने व वस्त्र धोने के लिए जल की आवश्यकता पूरी होती है।
    (ii) इन बस्तियों में नदियाँ व झीलें फसलों की सिंचाई हेतु जल प्रदान करती हैं।
    (iii) इन जलस्रोतों से मछलियाँ पालन किया जा सकता है 
    (iv) नाव चलाने योग्य नदियाँ एवं झीलें जल परिवहन की सुविधा प्रदान करती हैं।
  28. नियोजित बस्ती से क्या आशय है ? 
    सरकार द्वारा भूमि का अधिग्रहण कर एक कुशल योजना के माध्यम से सभी प्रकार कीं सुविधाएँ उपलब्ध कराकर विकसित की गई  बस्ती नियोजित बस्ती कहलाती है  सरकार द्वारा अधिगृहित की गई भूमि पर निवासियों को सभी प्रकार की सुविधाएँ जैसे आवास, पानी तथा अन्य अवसंरचना आदि उपलब्ध कराकर नियोजित बस्तियों को विकसित किया जाता हैं। इथोपिया में सरकार द्वारा ग्रामीणीकरण योजना एवं भारत में इंदिरा गांधी नहर के क्षेत्र में नहरी बस्तियों का विकास इसके अच्छे उदाहरण हैं। 
  29. एक स्वस्थ शहर कैसा होना चाहिए? स्पष्ट कीजिए।
    विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक स्वस्थ शहर में निम्नलिखित सुविधाएँ होनी चाहिए
    1. ‘स्वच्छ’ एवं ‘सुरक्षित’ वातावरण।
    2. सभी निवासियों की आधारभूत आवश्यकताओं को पूरा करना।
    3. स्थानीय प्रशासन में समुदाय की भागीदारी।
    4. सभी के लिए आसानी से उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाएँ।
  30. यू०एन०डी०पी० की नगर रणनीति की प्राथमिकताओं क्या है 
    यू०एन०डी०पी० की नगर रणनीति की प्राथमिकताएँ
    1. शहरी निर्धनों के लिए और अधिक मकानों का निर्माण किया जाए।
    2. शहरों में सभी को शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य, स्वच्छ जल एवं सफाई के प्रबन्ध जैसी सुविधाएँ प्रदान की जाएँ।
    3. बुनियादी सेवाओं और सरकारी सुविधाओं तक महिलाओं की पहुँच में सुधार किया जाए।
    4. ऊर्जा के उपयोग एवं परिवहन के वैकल्पिक तन्त्र को उन्नत किया जाए।
    5. वायु प्रदूषण को कम किया जाए।
  31. ग्रामीण  बस्ती किसे कहते हैं ग्रामीण बस्तियों  की विशेषताएं लिखिए
    ऐसे अधिवास जिनमें निवास करने वाले लोग प्राथमिक क्रियाकलापो में संलग्न रहते हैं ग्रामीण बस्ती कहलाती हैं
    1.लोगों में घनिष्ठ सामाजिक संबंध पाया जाता है
    2.ग्रामीण लोगों का भूमि से निकट संबंध होता है
    3.गांव की अर्थव्यवस्था प्राथमिक व्यवसायो पर निर्भर रहती है
    4.ग्रामीण लोगों में गतिशीलता कम पाई जाती है
    5.गांवो में आधुनिकता का प्रभाव नगर नहीं होता है
    6.गांवो में मानवीय मूल्यों की प्रगाढ़ता पाई जाती है
  32. नगरीय बस्ती किसे कहते हैं इनकी विशेषताएं लिखिए
    ऐसी बस्ती जिनमें निवास करने वाले अधिकांश लोग द्वितीयक या तृतीयक व्यवसाय व में संलग्न रहते हैं नगरीय बस्ती कहलाती हैं
    1.लोगों में सामाजिक प्रगाढ़ता का अभाव पाया जाता है
    2. नगरों में उच्च शिक्षा एवं उत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होती है
    3. नगरों में उच्च जनसंख्या घनत्व पाया जाता है
    4. नगरीय जनसंख्या अधिक गतिशील होती है
    5. नगरों में तीव्र सामाजिक व आर्थिक अंतर पाया जाता है
    6. नगरों में रोजगार के अच्छे अवसर उपलब्ध होते हैं
    7. नगरों में 50% से अधिक जनसंख्या गैर कृषि कार्यों में संलग्न रहती है
  33. विकासशील देशों में ग्रामीण बस्तियों की समस्याओं की  विवेचना कीजिए 
    1. आवागमन के साधनों का अभाव- कच्ची सड़क एवं आधुनिक संचार के साधनों की कमी भी यहाँ की प्रमुख समस्या है। वर्षा ऋतु में इन क्षेत्रों का संपर्क आसपास के क्षेत्र से कट जाता है जिससे आपतकालीन सेवाएँ प्रदान करने में भी गंभीर कठिनाइयाँ उपलब्ध् हो जाती है।
    2. जल की अपर्याप्त आपूर्ति - विकासशील देशों में ग्रामीण बस्तियों में जल की आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं है। पर्वतीय एवं शुष्क क्षेत्रों में निवासियों को पेय जल हेतु लंबी दूरियाँ तय करनी पड़ती हैं। जल जनित बीमारियाँ जैसे हैजा, पीलिया आदि सामान्य समस्या है। दक्षिणी एशिया के देश प्रायः बाढ़ एवं सूखे से ग्रस्त रहते हैं। सिंचाई सुविधएँ कम होने से कृषि कार्य पर भी प्रभाव पड़ता है।
    3. स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं का अभाव- विशाल ग्रामीण जनसंख्या के लिए स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी पर्याप्त सुविधाएँ प्रदान करना ग्रामीण बस्तियों की सबसे बड़ी समस्या है। यह समस्या उस समय और विकट हो जाती है जब ग्रामीणीकरण उचित प्रकार से नहीं हुआ है और विशाल क्षेत्र में मकान दूर तक विकसित होते हैं।
    4. शौचघर एवं कूड़ा-कचरा निस्तारण का अभाव- ग्रामीण बस्तियों में  शौचघर एवं कूड़ा-कचरा निस्तारण की सुविधाएँ नगण्य हैं। जिससे इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएँ रहती हैं।
    5. जीवन की निम्नतर दशाएं - ग्रामीण बस्तियों में मकान घटिया स्तर की निर्माण सामग्री से बने होते है उन्हे भारी वर्षा एवं बाढ़ के समय काफी नुकसान पहुँचता है मकानों में उपयुक्त संवातन नहीं होता है। एक ही मकान में मनुष्यों के साथ पशु भी रहते हैं।
    6. रोजगार के अवसरों का अभाव - ग्रामीण बस्तियों में रोजगार के सिमित साधन होते है यहाँ मौसमी बेरोजगारी पाई जाती है
  34. विकासशील देशों में नगरीय बस्तियों की समस्याओं की विवेचना कीजिए 
    रोजगार के अवसर एवं नागरिक सुविधाओं के लिए मानव शहरों की ओर आता है। परंतु विकासशील देशों में अधिकतर शहर अनियोजित हैं अतः आने वाले व्यक्ति अत्यंत भीड़ की स्थिति पैदा कर देते हैं विकासशील देशों के आधुनिक शहरों मे आवासों कमी, लम्बवत विस्तार (बहुमंजिला मकान) तथा गन्दी बस्तियों की वृद्धि प्रमुख विशेषताएँ हैं। अनेक शहरों में जनसंख्या का बढ़ता भाग निम्न स्तरीय आवासों जैसे गंदी बस्तियों, अनधिकृत बस्तियों में रहते हैं। 
    1. आर्थिक समस्याएँ- विश्व के विकासशील देशों के ग्रामीण व छोटे नगरीय क्षेत्रों में रोजगार के घटते अवसरों के कारण जनसंख्या का शहरों की ओर पलायन हो रहा है। यह विशाल प्रवासी जनसंख्या नगरीय क्षेत्रों में अकुशल एवं अर्द्धकुशल श्रमिकों, की संख्या में अत्यधिक वृद्धि कर देती है 
    2. सामाजिक-सांस्कृतिक समस्याएँ- विकासशील देशों के शहर विभिन्न प्रकार की सामाजिक बुराइयों से ग्रस्त हैं। अपर्याप्त वित्तीय संसाधनों के कारण नगरों की अधिकतर जनसंख्या की आधरभूत आवश्यकताएँ भी पूरी नहीं हो पाती हैं। उपलब्ध् स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी सुविधाएँ गरीब नगरवासियों की पँहुच से बाहर रहती हैं। बेरोजगारी एवं शिक्षा की कमी के कारण अपराध अधिक होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से स्थानांतरित जनसंख्या में पुरुषों की अधिकता के कारण इन नगरों में जनसंख्या का लिंग अनुपात असंतुलित हो जाता है।
    3. पर्यावरण संबंधी समस्याएँ- विकासशील देशों में रहने वाली विशाल नगरीय जनसंख्या घरेलू एवं औद्योगिक कार्यों के लिए परंपरागत ईंधन के व्यापक उपयोग के कारण वायु प्रदूषित हो जाती है। एक अनुपयुक्त मल निस्तारण व्यवस्था अस्वास्थ्यकर दशाएँ पैदा करती हैं। घरेलू एवं औद्योगिक अपशिष्ट को सामान्य मल-व्यवस्था में डाल दिया जाता है या बिना किसी शोधन के अनिश्चित स्थानों में डाल दिया जाता है। जनसंख्या को आवास प्रदान करने के लिए विशाल कंकरीट ढाँचे बनाए जाते हैं जो नगरों में ‘उष्म द्वीप’ बनाने में सहायक भूमिका निभाते हैं। 
  35. ग्रामीण बस्तियों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों की व्याख्या कीजिए।
    1. जल आपूर्ति - साधरणतया ग्रामीण बस्तियाँ  नदियाँ, झीलें एवं झरनों इत्यादि के समीप स्थित होती हैं, जहाँ जल आसानी से उपलब्ध् हो जाता है। कभी-कभी पानी की आवश्यकता लोगों को अन्यथा असुविधाजनक स्थानों जैसे दलदल से घिरे द्वीपों अथवा नदी किनारों के निचले क्षेत्रों में बसने के लिए प्रेरित करते हैं।
    2. भूमि - मनुष्य बसने के लिए उस स्थान का चयन करता है जहाँ की भूमि खेती के लिए उपयुक्त व उपजाऊ हो। किसी भी क्षेत्र में प्रारम्भिक अधिवासी उपजाऊ एवं समतल क्षेत्रों में ही बसते थे। यूरोप में दलदली क्षेत्र एवं निचले क्षेत्र में बस्तियाँ नहीं बसाई जाती हैं जबकि दक्षिणी पूर्वी एशिया में रहने वाले लोग नदी घाटियों के निम्न भाग एवं तटवर्ती मैदानों के निकट बस्तियाँ बसाते हैं जो कि उन्हें नम चावल की कृषि के लिए सहायक होते हैं। 
    3. उच्च भूमि के क्षेत्र - मानव ने अपने अधिवास हेतु ऊँचे क्षेत्रों को इसलिए चुना कि वहाँ पर बाढ़ के समय होने वाली क्षति से बचा जा सके एवं मकान व जीवन सुरक्षित रह सके। नदी बेसिन के निम्न भाग में बस्तियाँ नदी वेदिकाओं एवं तटबंधें पर बसाई जाती हैं क्योंकि ये भाग ‘शुष्क बिंदु’ होते हैं। उष्ण कटिबंधीय देशों के दलदली क्षेत्रों के निकट लोग अपने मकान स्तंभों पर बनाते हैं जिससे कि बाढ़ एवं कीडे़-मकोड़ों से बचा जा सके।
    4. गृह निर्माण सामग्री - मनुष्य अपनी बस्तियाँ वहाँ बसाता है जहाँ आसानी से लकड़ी, पत्थर आदि प्राप्त हो जाते हैं। प्राचीन गाँवों को वनों को काटकर बनाया गया था, क्योंकि वहाँ लकड़ी बहुतायत में थी। चीन के लोयस क्षेत्र में वहाँ के निवासी कंदराओं में मकान बनाते थे एवं अफ्रीका के सवाना प्रदेश में कच्ची ईंटों के मकान बनते थे जबकि ध्रुवीय क्षेत्र में एस्किमो हिम खंडों से अपने घर (इग्लू) का निर्माण करते हैं।
    5. सुरक्षा- राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध या उपद्रव होने की स्थिति में गाँवों को सुरक्षात्मक पहाड़ियों एवं द्वीपों पर बसाया जाता था। नाइजीरिया में खडे़ इंसेलबर्ग अच्छी सुरक्षित स्थिति प्रदान करते हैं। भारत में अधिकतर दुर्ग उँचे स्थानों अथवा पहाड़ियों पर स्थित हैं।
  36. आकृति के आधार पर ग्रामीण बस्तियों के प्रतिरूपों का वर्णन कीजिए 
    आकृति के आधार पर ग्रामीण बस्तियों के प्रतिरूप
    (क) रैखिक प्रतिरूप: जब मकान या आवास सड़क मार्ग, रेल मार्ग, नहर, नदी या सागर तट पर पंक्तिबद्ध रूप से स्थित होते हैं तो ऐसे प्रतिरूप को रेखीय प्रतिरूप कहते हैं।

    (ख) आयताकार प्रतिरूप: जब दो सड़के एक दूसरे को समकोण पर काटती है तो उनके मिलन स्थल पर दोनों सड़कों के किनारे लम्बवत गलियों का निर्माण होता है तो आयताकार प्रतिरूप का निर्माण होता है ग्रामीण बस्तियों का यह प्रतिरूप समतल क्षेत्रों अथवा चौड़ी अंतरा पर्वतीय घाटियों में पाया जाता है। 

    (ग) वृत्ताकार प्रतिरूप: किसी झील, तालाब या चौपाल के चारों ओर मकान बनाने से निर्मित अधिवास वृत्ताकार प्रतिरूप कहलाता है 

    (घ) तारा प्रतिरूप : जब अरीय प्रतिरूप में बाहर की ओर जाने वाली सड़कों के किनारे मकान बन जाते हैं तो तारा प्रतिरूप का निर्माण होता है: जहाँ कई मार्ग आकर एक स्थान पर मिलते हैं आरै उन मार्गों के सहारे मकान बन जाते हैं वहाँ तारे के आकार की बस्तियाँ विकसित होती हैं।

    (ड) ‘टी’ आकार, ‘वाई’ आकार, क्रॉस आकार: टी के आकार की बस्तियाँ सड़क के तिराहे पर विकसित होती हैं। जबकि वाई आकार की बस्तियाँ उन क्षेत्रों में पाई जाती हैं जहाँ पर दो मार्ग आकर तीसरे मार्ग से मिलते हैं। क्रॉस आकार की बस्तियाँ चौराहों पर प्रारंभ होती हैं जहाँ चौराहे से चारों दिशा में बसाव आरंभ हो जाता है।

    (च) दोहरे ग्राम: नदी पर पुल या फेरी के दोनों ओर इन बस्तियों का विस्तार होता है।



पुनरावृति नोटस 


5. खनिज व शैल

    खनिज:- पृथ्वी से प्राप्त वे पदार्थ जिनकी एक विशेष परमाण्विक संरचना होती है तथा जिनके निश्चित रासायनिक और भौतिक गुण पाए जाते हैं, उन्हें खनिज कहते हैं।
    पृथ्वी के आंतरिक भाग में पाया जाने वाला मेग्मा सभी खनिजों का मूल स्रोत है
    विदलन -खनिजों की समतल सतह बनाने के लिए निश्चित दिशा में टूटने की प्रवृत्ति विदलन कहलाती है
    विभंजन- खनिजों के अनियमित रूप से टूटने की प्रवृित विभंजन कहलाती है
    पेट्रोलोजी - भूविज्ञान वह शाखा जिसमें शैलों के प्रकार, संरचना, व उत्पति का अध्ययन किया जाता है पेट्रोलोजी कहलाती है
    खनिजों का वर्गीकरण
    सामान्यता खनिज दो प्रकार के होते हैं
    1. धात्विक खनिज - वे खनिज जिनमें धात्विक अंश पाया जाता है धात्विक खनिज कहलाते हैं
    धात्विक खनिज तीन प्रकार के होते हैं
    लौहा धात्विक खनिज-लौहा, निकल, मैंगनीज
    अलौह धात्विक खनिज-तांबा, सीसा, जस्ता, एलुमिनियम
    बहुमूल्य धात्विक खनिज -सोना चांदी प्लैटिनम
    2. अधात्विक खनिज- वे खनिज जिनमें धात्विक अंश नहीं पाया जाता है अधात्विक खनिज कहलाते है जैसे गंधक, फास्फेट
    शैल (चट्टान) - एक या एक से अधिक खनिजों का मिश्रण जिनसे भू-पर्पटी का निर्माण हुआ है शैल या चट्टान कहलाता हैं
    शैल तीन प्रकार के होते हैं
    1. आग्नेय शैल [Igneous Rock]- (आग्नेय लैटिन भाषा के इग्निस (Igneous) शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है-अग्नि ) पृथ्वी के आंतरिक भाग के तप्त तरल मेग्मा व लावा के ठण्डा होकर जमने से निर्मित शैल को आग्नेय शैल कहा जाता है आग्नेय शैलों का निर्माण सबसे पहले होता है इसलिए इन्हें प्राथमिक शैल भी कहते हैं। आग्नेय शैलों का निर्माण मैग्मा के ठंडे होकर घनीभूत हो जाने पर होता है। जब ये शैल धरातल के नीचे मैग्मा के धीरे-धीरे ठंडा होकर जमने से बनती है तो इनके कण बड़े बनते हैं। और जब ये शैल धरातल के ऊपर लावा के आकस्मिक शीतलता के कारण बनती है तो इनके कण छोटे बनते है उदाहरण - बेसाल्ट, ग्रेनाइट तथा गेब्रो
    आग्नेय शैलों के लक्षण
    आग्नेय शैलों में रन्ध्र नहीं पाये जाते हैं।
    आग्नेय शैलें रवेदार होती हैं।
    आग्नेय शैलों में जीवाश्म नहीं पाये जाते हैं।
    आग्नेय शैलें अत्यधिाक कठोर होती हैं
    आग्नेय शैलों में धात्विक खनिज मिलते हैं।
    2. अवसादी शैल [Sedimentary Rock]- अवसादी अर्थात Sedimentary शब्द की व्युत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द सेडिमेंट्स से हुई है, जिसका अर्थ है-व्यवस्थित होना। अपक्षय व अपरदन के द्वारा आग्नेय, अवसादी व कायांतरित शैलें टूटकर उसी स्थान पर या अन्यत्र जमा होती जाती हैं। इन विभिन्न शैलों के द्वारा प्राप्त शैल चूर्ण, जीवाश्म एवं वनस्पतियों के एक के ऊपर एक परतों के रुप में जमा होने से निर्मित शैल को अवसादी शैल कहते हैं।
    अवसादी शैलो के लक्षण
    अवसादी शैलौं में परतें पाई जाती है
    अवसादी शैलौं में जीवाश्म पाए जाते हैं
    अवसादी शैले मुलायम होती है
    अवसादी शैलौं में रंध्र पाए जाते हैं
    अवसादी शैलौं जोङ पाये जाते है
    अवसादी शैलों का वर्गीकरण अवसादी शैले तीन प्रकार की होती है
    यांत्रिकी रूप से निर्मित
    कार्बनिक रूप से निर्मित
    रासायनिक रूप से निर्मित
    शिलीभवन- आग्नेय, अवसादी व कायांतरित शैलौ का शैल चूर्ण व जीवाश्म जमकर सघनता के द्वारा अवसादी शैल में बदल जाते हैं यह प्रक्रिया शिलीभवन कहलाती है
    3. कायांतरित शैल [Metamorfic Rock]- कायांतरित शब्द का अर्थ है स्वरूप में परिवर्तन ताप, दाब व आयतन में परिवर्तन के द्वारा किसी मौलिक शैल में बिना विघटन व वियोजन के उसके संगठन व स्वरूप में परिवर्तन के फलस्वरुप बनी शैले कायान्तरित शैले कहलाती हैं जब ऊपरी शैलों के कारण निचली शैलों पर अत्यधिक दाब पड़ता है तो इनका संगठन व स्वरूप बदल जाता है जिससे कायांतरित शैलो का निर्माण होता है उदाहरण संगमरमर, हीरा, स्लेट, शिस्ट आदि
    कायांतरण निम्न प्रकार से हो सकता है
    1. गतिशील कायांतरण - बिना रसायनिक परिवर्तन के जब मूल शैलें टूटकर एवं पिसकर पुनः संगठित होती है तो यह गतिशील कायांतरण कहलाता है।
    2. ऊष्मीय कायांतरण - उच्च तापमान के कारण शैलौ में पुनः क्रिस्टलीकरण होना ऊष्मीय कायांतरण कहलाता है ऊष्मीय कायांतरण के दो प्रकार होते हैं -
    संपर्क कायांतरण- ज्वालामुखी उद्गार के समय जब शैलें ऊपर आते हुए मैग्मा एवं लावा के संपर्क में आती हैं तो उच्च तापमान के कारण शैल के पदार्थों का पुनः क्रिस्टलीकरण होता है। और नए पदार्थ उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार के कायांतरण को संपर्क कायांतरण कहते हैं
    प्रादेशिक कायांतरण - जब उच्च तापमान, दबाव अथवा इन दोनों के कारण एक बहुत बड़े क्षेत्र में शैलों में पुनः क्रिस्टलीकरण होता है। तो यह कायांतरण प्रादेशिक कायांतरण कहलाता है
    कायांतरित शैलों के प्रकार -कायांतरित शैले दो प्रकार की होती है
    1. पत्रित शैल- जब कायांतरण के दौरान चट्टानों में स्थित खनिज कण रेखाओं के रूप से व्यवस्थित हो जाते है तो उससे पत्रित चट्टानों का निर्माण होता है है
    2. अपत्रित चट्टानें- जब कायान्तरण के दौरान चट्टानों में स्थित खनिज कण रेखाओं के रूप से व्यवस्थित नही होते तो अपत्रित चट्टानों का निर्माण होता है
    कायांतरित शैलो के लक्षण
    कायांतरित शैलौं में बहुमूल्य खनिज पाये जाती है
    कायांतरित शैलौं में जीवाश्म नहीं पाए जाते हैं
    कायांतरित शैले कठोर होती है
    कायांतरित शैलौं में रंध्र नहीं पाए जाते हैं
    शैली चक्र - शैलें अपने मूल रूप में अधिक समय तक नहीं रहती हैं, बल्कि पुरानी शैलें परिवर्तित होकर नवीन शैल में बदल जाती है अर्थार्त एक प्रकार की शैल का दूसरे प्रकार की शैल में बदलने की क्रिया को शैली चक्र कहते है शैली चक्र एक सतत् प्रक्रिया है सबसे पहले आग्नेय शैलों का निर्माण होता है इन शैलों से अन्य शैलों (अवसादी व कायांतरित) का निर्माण होता है आग्नेय शालों के अपक्षय द्वारा निर्मित कण उसी स्थान या अन्यत्र जाकर जम जाते है जिससे अवसादी शैलों का निर्माण होता है अवसादी शैले भी विखंडित होकर पुनः अवसादी शैले बना सकती है आग्नेय व अवसादी शैले ताप व दाब में परिवर्तन के कारण कायांतरित सैलों में बदल जाती है इस प्रकार निर्मित ये शैले (आग्नेय ,अवसादी व कायांतरित शैले ) पृथ्वी के आंतरिक भाग में चली जाती है एवं उच्च तापमान के कारण पिघकर मेग्मा में बदल जाती है जो आग्नेय शैलों के मूल स्रोत हैं
  1. निम्न में से कौन ग्रेनाइट के दो प्रमुख घटक हैं ?
    (क) लौह एवं निकेल      (ख) सिलिका एवं एलूमिनियम
    (ग) लौह एवं चाँदी        (घ) लौह ऑक्साइड एवं पोटैशियम  (ख)
  2. निम्न में से कौन सा कायांतरित शैलों का प्रमुख लक्षण है ?
    (क) परिवर्तनीय           (ख) क्रिस्टलीय
    (ग) शांत                    (घ) पत्रण                                   (क)
  3. निम्न में से कौन सा एकमात्र तत्व वाला खनिज नहीं है ?
    (क) स्वर्ण                   (ख) माइका
    (ग) चाँदी                   (घ) ग्रेफाइट                               (ख)
  4. निम्न में से कौन सा कठोरतम खनिज है ?
    (क) टोपाज                 (ख) क्वार्ट्ज
    (ग) हीरा                     (घ) फेलसपार                            (ग)
  5. निम्न में से कौन सी शैल अवसादी नहीं है ?
    (क) टायलाइट              (ख) ब्रेशिया
    (ग) बोरैक्स                  (घ) संगमरमर                            (घ)
  6. आग्नेय शैलों के मूल स्रोत क्या  हैं
    मेग्मा

  7. आग्नेय शैलों के उदहारण दीजिए
    बेसाल्ट, ग्रेनाइट तथा गेब्रो 
  8. विभंजन   से क्या अभिप्राय है 
    खनिजों के अनियमित रूप से टूटने की प्रवृित विभंजन कहलाती है
  9. विदलन  से क्या अभिप्राय है 
    खनिजों की समतल सतह बनाने के लिए निश्चित दिशा में टूटने की प्रवृत्ति विदलन कहलाती है
  10. आग्नेय शैलों को  प्राथमिक शैल क्यों  कहते हैं।
    आग्नेय शैलों का निर्माण सबसे पहले होता है इसलिए इन्हें प्राथमिक शैल भी कहते हैं।
  11. पेट्रोलोजी किसे कहते है 
    भूविज्ञान वह शाखा जिसमें शैलों के प्रकार, संरचना, व उत्पति का अध्ययन किया जाता है पेट्रोलोजी कहलाती है 
  12. खनिजों का मूल स्रोत क्या  है
    पृथ्वी के आंतरिक भाग में पाया जाने वाला मेग्मा सभी खनिजों का मूल स्रोत है
  13. माइका नामक खनिज मुख्यतः किस उपयोग में आते है
    माइका का उपयोग मुख्यतः विद्युत उपकरणों में होता है
    1. शिली भवन की प्रक्रिया से क्या तात्पर्य है 
      आग्नेय, अवसादी व कायांतरित शैलौ का शैल चूर्ण व जीवाश्म जमकर सघनता के द्वारा अवसादी शैल में बदल जाते हैं यह प्रक्रिया शिलीभवन कहलाती है
    2. शैल से आप क्या समझते हैं ? शैल के तीन प्रमुख वर्गों के नाम बताएँ |
      एक या एक से अधिक खनिजों का मिश्रण जिनसे भूपर्पटी का निर्माण हुआ है शैल या चट्टान कहलाते हैं
      शैल तीन प्रकार के होते हैं:
      1. आग्नेय शैल 2.अवसादी शैल 3. कायांतरित शैल
    3. आग्नेय शैल क्या है? आग्नेय शैल के निर्माण की पद्धति एवं उनके लक्षण बताएँ|
      पृथ्वी के आंतरिक भाग के तप्त तरल मेग्मा व लावा के ठण्डा होकर जमने से निर्मित शैल को आग्नेय शैल कहा जाता है आग्नेय शब्द लैटिन भाषा के इग्निस (Igneous) शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है -अग्नि इन्हें प्राथमिक शैल भी कहते हैं। आग्नेय शैलों का निर्माण मैग्मा के ठंडे होकर घनीभूत होने से होता है। जब ये शैल धरातल के नीचे मैग्मा के धीरे-धीरे ठंडा होकर जमने से बनती है तो इनके कण बड़े बनते हैं। और जब ये शैल धरातल के ऊपर लावा के आकस्मिक शीतलता के कारण बनती है तो इनके कण छोटे बनते है बेसाल्ट, ग्रेनाइट तथा गेब्रो आग्नेय शैल के उदाहरण हैं।
      आग्नेय शैलों के लक्षण:
      आग्नेय शैलों में रन्ध्र नहीं पाये जाते हैं।
      आग्नेय शैलें रवेदार होती हैं।
      आग्नेय शैलों में जीवाश्म नहीं पाये जाते हैं।
      आग्नेय अत्यधिाक कठोर होती हैं
      आग्नेय शैलों में धात्विक खनिज मिलते हैं। 
    4. अवसादी शैल का क्या अर्थ है ? अवसादी शैल के निर्माण की पद्धति बताएँ।
      अवसादी अर्थात् Sedimentary शब्द की व्युत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द सेडिमेंट्स से हुई है, जिसका अर्थ है व्यवस्थित होना। अपक्षय व अपरदन के द्वारा आग्नेय, अवसादी व कायांतरित शैलें टूटकर उसी स्थान पर या अन्यत्र जमा होती जाती हैं। इन विभिन्न शैलों के द्वारा प्राप्त शैल चूर्ण, जीवाश्म एवं वनस्पतियों के एक के ऊपर एक परतों के रुप में जमा होने से निर्मित शैल को अवसादी शैल कहते हैं।
      अवसादी शैलो के लक्षण
      अवसादी शैलौं में परतें पाई जाती है
      अवसादी शैलौं में जीवाश्म पाए जाते हैं
      अवसादी शैले मुलायम होती है
      अवसादी शैलौं में रंध्र पाए जाते है
    5. शैली चक्र के अनुसार प्रमुख प्रकार की शैलों के मध्य क्या संबंध होता है?
      शैलें अपने मूल रूप में अधिक समय तक नहीं रहती हैं, बल्कि पुरानी शैलें परिवर्तित होकर नवीन शैल में बदल जाती है अर्थार्त एक प्रकार की शैल का दूसरे प्रकार की शैल में बदलने की क्रिया को शैली चक्र कहते है
      शैली चक्र एक सतत् प्रक्रिया है सबसे पहले आग्नेय शैलों का निर्माण होता है इन शैलों से अन्य शैलों (अवसादी व कायांतरित) का निर्माण होता है आग्नेय शालों के अपक्षय द्वारा निर्मित कण उसी स्थान या अन्यत्र जाकर जम जाते है जिससे अवसादी शैलों का निर्माण होता है अवसादी शैले भी विखंडित होकर पुनः अवसादी शैले बना सकती है आग्नेय व अवसादी शैले ताप व दाब में परिवर्तन के कारण कायांतरित सैलों में बदल जाती है इस प्रकार निर्मित ये शैले (आग्नेय ,अवसादी व कायांतरित शैले ) पृथ्वी के आंतरिक भाग में चली जाती है एवं उच्च तापमान के कारण पिघकर मेग्मा में बदल जाती है जो आग्नेय शैलों के मूल स्रोत हैं
    6. ‘खनिज’ शब्द को परिभाषित करें, एवं प्रमुख प्रकार के खनिजों के नाम लिखें।
      पृथ्वी से प्राप्त वे पदार्थ जिनकी एक विशेष परमाण्विक संरचना होती है तथा जिनके निश्चित रासायनिक और भौतिक गुण पाए जाते हैं, उन्हें खनिज कहते हैं।
      पृथ्वी के आंतरिक भाग में पाया जाने वाला मेग्मा सभी खनिजों का मूल स्रोत है
      खनिजों का वर्गीकरण
      सामान्यता खनिज दो प्रकार के होते हैं
      1.धात्विक खनिज - वे खनिज जिनमें धात्विक अंश पाया जाता है धात्विक खनिज कहलाते हैं
      धात्विक खनिज तीन प्रकार के होते हैं
      लौहा धात्विक खनिज-लौहा, निकल, मैंगनीज
      अलौह धात्विक खनिज-तांबा, सीसा, जस्ता, एलुमिनियम
      बहुमूल्य धात्विक खनिज -सोना चांदी प्लैटिनम
      2. अधात्विक खनिज- वे खनिज जिनमें धात्विक अंश नहीं पाया जाता है अधात्विक खनिज कहलाते है
      जैसे गंधक, फास्फेट
    7. कायांतरित शैल क्या हैं? इनके प्रकार एवं निर्माण की पद्धति का वर्णन करें।
      'कायांतरित ' का अर्थ है स्वरूप में परिवर्तन
      ताप, दाब व आयतन में परिवर्तन के द्वारा किसी मौलिक शैल में बिना विघटन व वियोजन के उसके संगठन व स्वरूप में परिवर्तन के फलस्वरुप बनी शैले कायान्तरित शैले कहलाती हैं
      जब ऊपरी शैलों के कारण निचली शैलों पर अत्यधिक दाब पड़ता है तो इनका संगठन व स्वरूप बदल जाता है जिससे कायांतरित शैलो का निर्माण होता है
      जैसे संगमरमर, हीरा, स्लेट, शिस्ट आदि
      कायांतरित शैलो के लक्षण
      कायांतरित शैलौं में बहुमूल्य खनिज पाये जाती है
      कायांतरित शैलौं में जीवाश्म नहीं पाए जाते हैं
      कायांतरित शैले कठोर होती है
      कायांतरित शैलौं में रंध्र नहीं पाए जाते हैं
      कायांतरित शैलों के प्रकार
      कायांतरित शैले दो प्रकार की होती है
      1. पत्रित शैल- जब कायांतरण के दौरान चट्टानों में स्थित खनिज कण रेखाओं के रूप से व्यवस्थित हो जाते है तो उससे पत्रित चट्टानों का निर्माण होता है है
      2. अपत्रित चट्टानें- : जब कायान्तरण के दौरान चट्टानों में स्थित खनिज कण रेखाओं के रूप से व्यवस्थित नही होते तो अपत्रित चट्टानों का निर्माण होता है
      कायांतरण निम्न प्रकार से हो सकता है
      1. गतिशील कायांतरण - बिना रसायनिक परिवर्तन के जब मूल शैलें टूटकर एवं पिसकर पुनः संगठित होती है तो यह गतिशील कायांतरण कहलाता है।
      2. ऊष्मीय कायांतरण - उच्च तापमान के कारण शैलौ में पुनः क्रिस्टलीकरण होना ऊष्मीय कायांतरण कहलाता है
      ऊष्मीय कायांतरण के दो प्रकार होते हैं -
      (i) संपर्क कायांतरण- ज्वालामुखी उद्गार के समय जब शैलें ऊपर आते हुए मैग्मा एवं लावा के संपर्क में आती हैं तो उच्च तापमान के कारण शैल के पदार्थों का पुनः क्रिस्टलीकरण होता है। और नए पदार्थ उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार के कायांतरण को संपर्क कायांतरण कहते हैं
      (ii) प्रादेशिक कायांतरण - जब उच्च तापमान, दबाव अथवा इन दोनों के कारण एक बहुत बड़े क्षेत्र में शैलों में पुनः क्रिस्टलीकरण होता है। तो यह कायांतरण प्रादेशिक कायांतरण कहलाता है



    15. पृथ्वी पर जीवन

    1. निम्नलिखित में से कौन जैवमंडल में सम्मिलित हैं :
      (क) केवल पौधे                 (ख) केवल प्राणी
      (ग) सभी जैव व अजैव जीव     (घ) सभी जीवित जीव        (ग)
    2. उष्णकटिबंधीय घास के मैदान निम्न में से किस नाम से जाने जाते हैं?
      (क) प्रेयरी                      (ख) स्टैपी
      (ग) सवाना                    (घ) इनमें से कोई नहीं        (ग)
      चट्टानों में पाए जाने वाले लोहांश के साथ ऑक्सीजन मिलकर निम्नलिखित में से क्या बनाती है?
      (क) आयरन कार्बोनेट          (ख) आयरन ऑक्साइड
      (ग) आयरन नाइट्राइट          (घ) आयरन सल्फेट         (ख)
    3. प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रिया के दौरान, प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाईऑक्साइड जल के साथ मिलकर क्या बनाती है?
      (क) प्रोटीन                     (ख) कार्बोहाइड्रेट्स
      (ग) एमिनोएसिड                (घ) विटामिन            (ख)
    4. पारिस्थितिकी से आप क्या समझते हैं?
      जीव विज्ञान की वह शाखा जिसमें जीवों और उनके पर्यावरण के बीच अन्तर्सम्बम्धों का अध्ययन किया जाता है। पारिस्थितिकी कहलाती है पारिस्थितिकी शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम सन् 1869 में हैकल ने किया
      पारिस्थितिकी (Ecology) शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों Oikos और logos से मिलकर बना है। Oikos का अर्थ है घर या निवास तथा logos का अर्थ 
      है  अध्ययन 
    5. पारितंत्र (Ecological system) क्या है? संसार के प्रमुख पारितंत्र प्रकारों को बताएं|
      पर्यावरण के समस्त जैविक और अजैविक कारको के बीच ऐसा अर्तंसंबंध जिसमें ऊर्जा प्रवाह व पोषण श्रृंखलाएं स्पष्ट रूप से समायोजित हों पारिस्थितिक तंत्र कहलाता है। पारिस्थितिकी तंत्र या पारितंत्र शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1935 में ए.जी. टोसले द्वारा किया गया था।
      पारितंत्र दो प्रकार के हैं :
      • स्थलीय पारितंत्र
      • जलीय पारितंत्र
    6. खाद्य श्रृंखला क्या है? चराई खाद्य श्रृंखला का एक उदाहरण देते हुए इसके अनेक स्तर बताएं|
      पारिस्थितिकी तंत्र में सभी जीवों की व्यवस्थित श्रंृखला जिसके द्वारा खाद्य पदार्थों व ऊर्जा का एक स्तर से दूसरे स्तर पर स्थानान्तरण होता है, खाद्य श्रृंखला कहलाती है।
      जैसे घास → टिड्डा → मेंढक → साँप
      चराई खाद्य शृंखला उत्पादक(हरे पौधो) से आरंभ होकर तृतीयक उपभोक्ता( माँसाहारी )जीवों पर समाप्त होती है, इसमें शाकाहारी मघ्यम स्तर होता हैं। खाद्य शृंखला में तीन से पाँच स्तर होते हैं और हर स्तर पर ऊर्जा कम होती जाती है।
      उदाहरण के लिए- पौधे पर जीवित रहने वाला एक कीड़ा (Bettle) एक मेंढक का भोजन है, जो मेंढक साँप का भोजन है और साँप एक बाज़ द्वारा खा लिया जाता है|
    7. खाद्य जाल (Food web) से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित बताएं|
      पारिस्थितिकी तंत्र में खाद्य शृंखलाएं विलगित अवस्था में क्रियाशील नहीं होती वरन एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। खाद्य शृंखलाओं के विभिन्न पोषक स्तरों पर परस्पर जुडा यह जाल खाद्य जाल कहलाता है
      उदाहरणार्थ- एक चूहा, जो अन्न पर निर्भर है वह अनेक द्वितीयक उपभोक्ताओं का भोजन है और तृतीयक माँसाहारी अनेक द्वितीयक जीवों से अपने भोजन की पूर्ति करते हैं|
    8. बायोम (Biome) क्या है?
      पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीव जंतु तथा पेड़ पौधों को सम्मिलित रूप से बायोम कहते हैं।
      संसार के पाँच प्रमुख बायोम इस प्रकार हैं:
      अ. वन बायोम              ब. मरुस्थलीय बायोम
      स. घासभूमि बायोम         द. जलीय बायोम
      य. उच्च प्रदेशीय बायोम
    9. संसार के विभिन्न वन बायोम (Forest biomes) की महत्वपूर्ण विशेषताओं का वर्णन करे|
      संसार के विभिन्न वन बायोम को तीन उपभागों में वर्गीकृत किया गया है :
      1-उष्ण कटिबंधीय :-
      (क) भूमध्य रेखीय- यहाँ तापमान 20° से 25° से. होता है जिसका लगभग एक समान वितरण होता है| यहाँ की मृदा में अम्लीयता तथा पोषक तत्त्वों की कमी पायी जाती है| असंख वृक्षों के झुंड, लंबे तथा घने वृक्ष पाए जाते हैं|
      (ख) पर्णपाती- यहाँ का तापमान 25° से 30° से. तथा एक ऋतु में 1,000 मि.मी. वार्षिक औसत वर्षा होती है| मृदा पोषक तत्त्वों में धनी होती है| कम घने, मध्यम ऊँचाई के वृक्ष तथा अधिक प्रजाति एक साथ पाई जाती है| दोनों में कीट पतंगें, चमगादड़, पक्षी व स्तनधारी जंतु पाए जाते हैं|
      2-शीतोष्ण कटिबंधीय :-
      तापमान 20° से 30° से. तथा वर्षा 750 से 1,500 मि.मी. तक होती है| मृदा उपजाऊ, अवघटक जीवों से भरपूर होती है| मध्यम घने चौड़े पत्ते वाले वृक्ष पाए जाते हैं| पौधों की प्रजातियों में कम विविधता जैसे- ओक, बीच, मेप्प्ल आदि हैं| जंतुओं में गिलहरी, खरगोश, पक्षी, काले भालू, पहाड़ी शेर व स्कंक आदि पाए जाते हैं|
      3- बोरियल :-
      छोटी आर्द्र ऋतु व मध्यम रूप से गर्म ग्रीष्म ऋतु तथा लंबी (वर्षा रहित) शीत ऋतु पाई जाती है| यहाँ मुख्यत: हिमपात के रूप में 400 से 1,000 मि.मी. वर्षा होती है| यहाँ की मृदा में अम्लीयता तथा पोषक तत्त्वों की कमी पायी जाती है| मिट्टी की परत अपेक्षाकृत पतली होती है| सदाबहार कोणधारी वन जैसे- पाइन, फर व स्प्रूस आदि पाए जाते हैं| कठफोड़ा, चील, भालू, हिरन, खरगोश, भेड़िये व चमगादड़ आदि मुख्य प्राणी हैं|
    10. जैव भू-रासायनिक चक्र (Biogeochemical balance) क्या है? वायुमंडल में नाइट्रोजन का यौगिकीकरण (Fixation) कैसे होता है? वर्णन करें|
      प्रकृति में सजीव व भौतिक पर्यावरण के मध्य रासायनिक तत्त्वों के चक्रीय प्रवाह को जैव भू-रासायनिक चक्र कहते हैं।
      जैव भू-रासायनिक चक्र दो प्रकार के हैं - एक गैसीय और दूसरा तलछटी चक्र
      गैसीय चक्र - गैसीय चक्र में चक्रीकरण करने वाले पदार्थे का मुख्य स्रोत वायुमंडल व महासागर हैं। जिसमें पदार्थे का चक्रीकरण मुख्यतः गैस के रूप में होता है तलछटी चक्र- तलछटी चक्र में चक्रीकरण करने वाले पदार्थे का मुख्य स्रोत पृथ्वी की भूपर्पटी पर पाई जाने वाली मिट्टी , तलछट व अन्य चट्टानें होती है हैं।
      नाइट्रोजन यौगिकीरण -वायुमंडल में उपस्थित नाइट्रोजन अन्य तत्वों के साथ क्रिया कर नाइट्रोजन के यौगिक बना लेती है इस क्रिया को नाइट्रोजन यौगिकीरण कहते हैं ये क्रिया दो प्रकार से होती है। तडित विसर्जन द्वारा नाइट्रोजन के ऑक्साइड में परिवर्तित होकर मृदा में मिल जाती है। और नाइट्रेट में बदल जाती है फलीदार पौधों की जड़ों में पाये जाने वाले राइजोबियम जैसे नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणु नाइट्रोजन को नाइट्रेट में बदल देते हैं।
    11. पारिस्थितिकी संतुलन (Ecological balance) क्या है? इसके असंतुलन को रोकने के महत्वपूर्ण उपायों की चर्चा करें|
      किसी पारितंत्र या आवास में जीवों के समुदाय में परस्पर गतिक साम्यता की अवस्था ही पारिस्थितिक संतुलन है| यह तभी संभव है जब जीवधारियों की विविधता अपेक्षाकृत स्थायी रहे|
      पारिस्थितिक असंतुलन के कारण- नईं प्रजातियों का आगमन, प्राकृतिक विपदाएँ और मानव जनित कारक हैं|
      इसके असंतुलन को रोकने के महत्वपूर्ण उपाय निम्नलिखित हैं :
      • प्रकृति में हस्तक्षेप न करके|
      • जनसंख्या पर नियंत्रण|
      • वस्तुओं का पुनः उपयोग और पुनःचक्रण|
      • प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग|
      • वनीकरण को प्रोत्साहन|