GSSS BINCHAWA

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GSSS KATHOUTI

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GSSS BUROD

5. खनिज व शैल

    खनिज:- पृथ्वी से प्राप्त वे पदार्थ जिनकी एक विशेष परमाण्विक संरचना होती है तथा जिनके निश्चित रासायनिक और भौतिक गुण पाए जाते हैं, उन्हें खनिज कहते हैं।
    पृथ्वी के आंतरिक भाग में पाया जाने वाला मेग्मा सभी खनिजों का मूल स्रोत है
    विदलन -खनिजों की समतल सतह बनाने के लिए निश्चित दिशा में टूटने की प्रवृत्ति विदलन कहलाती है
    विभंजन- खनिजों के अनियमित रूप से टूटने की प्रवृित विभंजन कहलाती है
    पेट्रोलोजी - भूविज्ञान वह शाखा जिसमें शैलों के प्रकार, संरचना, व उत्पति का अध्ययन किया जाता है पेट्रोलोजी कहलाती है
    खनिजों का वर्गीकरण
    सामान्यता खनिज दो प्रकार के होते हैं
    1. धात्विक खनिज - वे खनिज जिनमें धात्विक अंश पाया जाता है धात्विक खनिज कहलाते हैं
    धात्विक खनिज तीन प्रकार के होते हैं
    लौहा धात्विक खनिज-लौहा, निकल, मैंगनीज
    अलौह धात्विक खनिज-तांबा, सीसा, जस्ता, एलुमिनियम
    बहुमूल्य धात्विक खनिज -सोना चांदी प्लैटिनम
    2. अधात्विक खनिज- वे खनिज जिनमें धात्विक अंश नहीं पाया जाता है अधात्विक खनिज कहलाते है जैसे गंधक, फास्फेट
    शैल (चट्टान) - एक या एक से अधिक खनिजों का मिश्रण जिनसे भू-पर्पटी का निर्माण हुआ है शैल या चट्टान कहलाता हैं
    शैल तीन प्रकार के होते हैं
    1. आग्नेय शैल [Igneous Rock]- (आग्नेय लैटिन भाषा के इग्निस (Igneous) शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है-अग्नि ) पृथ्वी के आंतरिक भाग के तप्त तरल मेग्मा व लावा के ठण्डा होकर जमने से निर्मित शैल को आग्नेय शैल कहा जाता है आग्नेय शैलों का निर्माण सबसे पहले होता है इसलिए इन्हें प्राथमिक शैल भी कहते हैं। आग्नेय शैलों का निर्माण मैग्मा के ठंडे होकर घनीभूत हो जाने पर होता है। जब ये शैल धरातल के नीचे मैग्मा के धीरे-धीरे ठंडा होकर जमने से बनती है तो इनके कण बड़े बनते हैं। और जब ये शैल धरातल के ऊपर लावा के आकस्मिक शीतलता के कारण बनती है तो इनके कण छोटे बनते है उदाहरण - बेसाल्ट, ग्रेनाइट तथा गेब्रो
    आग्नेय शैलों के लक्षण
    आग्नेय शैलों में रन्ध्र नहीं पाये जाते हैं।
    आग्नेय शैलें रवेदार होती हैं।
    आग्नेय शैलों में जीवाश्म नहीं पाये जाते हैं।
    आग्नेय शैलें अत्यधिाक कठोर होती हैं
    आग्नेय शैलों में धात्विक खनिज मिलते हैं।
    2. अवसादी शैल [Sedimentary Rock]- अवसादी अर्थात Sedimentary शब्द की व्युत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द सेडिमेंट्स से हुई है, जिसका अर्थ है-व्यवस्थित होना। अपक्षय व अपरदन के द्वारा आग्नेय, अवसादी व कायांतरित शैलें टूटकर उसी स्थान पर या अन्यत्र जमा होती जाती हैं। इन विभिन्न शैलों के द्वारा प्राप्त शैल चूर्ण, जीवाश्म एवं वनस्पतियों के एक के ऊपर एक परतों के रुप में जमा होने से निर्मित शैल को अवसादी शैल कहते हैं।
    अवसादी शैलो के लक्षण
    अवसादी शैलौं में परतें पाई जाती है
    अवसादी शैलौं में जीवाश्म पाए जाते हैं
    अवसादी शैले मुलायम होती है
    अवसादी शैलौं में रंध्र पाए जाते हैं
    अवसादी शैलौं जोङ पाये जाते है
    अवसादी शैलों का वर्गीकरण अवसादी शैले तीन प्रकार की होती है
    यांत्रिकी रूप से निर्मित
    कार्बनिक रूप से निर्मित
    रासायनिक रूप से निर्मित
    शिलीभवन- आग्नेय, अवसादी व कायांतरित शैलौ का शैल चूर्ण व जीवाश्म जमकर सघनता के द्वारा अवसादी शैल में बदल जाते हैं यह प्रक्रिया शिलीभवन कहलाती है
    3. कायांतरित शैल [Metamorfic Rock]- कायांतरित शब्द का अर्थ है स्वरूप में परिवर्तन ताप, दाब व आयतन में परिवर्तन के द्वारा किसी मौलिक शैल में बिना विघटन व वियोजन के उसके संगठन व स्वरूप में परिवर्तन के फलस्वरुप बनी शैले कायान्तरित शैले कहलाती हैं जब ऊपरी शैलों के कारण निचली शैलों पर अत्यधिक दाब पड़ता है तो इनका संगठन व स्वरूप बदल जाता है जिससे कायांतरित शैलो का निर्माण होता है उदाहरण संगमरमर, हीरा, स्लेट, शिस्ट आदि
    कायांतरण निम्न प्रकार से हो सकता है
    1. गतिशील कायांतरण - बिना रसायनिक परिवर्तन के जब मूल शैलें टूटकर एवं पिसकर पुनः संगठित होती है तो यह गतिशील कायांतरण कहलाता है।
    2. ऊष्मीय कायांतरण - उच्च तापमान के कारण शैलौ में पुनः क्रिस्टलीकरण होना ऊष्मीय कायांतरण कहलाता है ऊष्मीय कायांतरण के दो प्रकार होते हैं -
    संपर्क कायांतरण- ज्वालामुखी उद्गार के समय जब शैलें ऊपर आते हुए मैग्मा एवं लावा के संपर्क में आती हैं तो उच्च तापमान के कारण शैल के पदार्थों का पुनः क्रिस्टलीकरण होता है। और नए पदार्थ उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार के कायांतरण को संपर्क कायांतरण कहते हैं
    प्रादेशिक कायांतरण - जब उच्च तापमान, दबाव अथवा इन दोनों के कारण एक बहुत बड़े क्षेत्र में शैलों में पुनः क्रिस्टलीकरण होता है। तो यह कायांतरण प्रादेशिक कायांतरण कहलाता है
    कायांतरित शैलों के प्रकार -कायांतरित शैले दो प्रकार की होती है
    1. पत्रित शैल- जब कायांतरण के दौरान चट्टानों में स्थित खनिज कण रेखाओं के रूप से व्यवस्थित हो जाते है तो उससे पत्रित चट्टानों का निर्माण होता है है
    2. अपत्रित चट्टानें- जब कायान्तरण के दौरान चट्टानों में स्थित खनिज कण रेखाओं के रूप से व्यवस्थित नही होते तो अपत्रित चट्टानों का निर्माण होता है
    कायांतरित शैलो के लक्षण
    कायांतरित शैलौं में बहुमूल्य खनिज पाये जाती है
    कायांतरित शैलौं में जीवाश्म नहीं पाए जाते हैं
    कायांतरित शैले कठोर होती है
    कायांतरित शैलौं में रंध्र नहीं पाए जाते हैं
    शैली चक्र - शैलें अपने मूल रूप में अधिक समय तक नहीं रहती हैं, बल्कि पुरानी शैलें परिवर्तित होकर नवीन शैल में बदल जाती है अर्थार्त एक प्रकार की शैल का दूसरे प्रकार की शैल में बदलने की क्रिया को शैली चक्र कहते है शैली चक्र एक सतत् प्रक्रिया है सबसे पहले आग्नेय शैलों का निर्माण होता है इन शैलों से अन्य शैलों (अवसादी व कायांतरित) का निर्माण होता है आग्नेय शालों के अपक्षय द्वारा निर्मित कण उसी स्थान या अन्यत्र जाकर जम जाते है जिससे अवसादी शैलों का निर्माण होता है अवसादी शैले भी विखंडित होकर पुनः अवसादी शैले बना सकती है आग्नेय व अवसादी शैले ताप व दाब में परिवर्तन के कारण कायांतरित सैलों में बदल जाती है इस प्रकार निर्मित ये शैले (आग्नेय ,अवसादी व कायांतरित शैले ) पृथ्वी के आंतरिक भाग में चली जाती है एवं उच्च तापमान के कारण पिघकर मेग्मा में बदल जाती है जो आग्नेय शैलों के मूल स्रोत हैं
  1. निम्न में से कौन ग्रेनाइट के दो प्रमुख घटक हैं ?
    (क) लौह एवं निकेल      (ख) सिलिका एवं एलूमिनियम
    (ग) लौह एवं चाँदी        (घ) लौह ऑक्साइड एवं पोटैशियम  (ख)
  2. निम्न में से कौन सा कायांतरित शैलों का प्रमुख लक्षण है ?
    (क) परिवर्तनीय           (ख) क्रिस्टलीय
    (ग) शांत                    (घ) पत्रण                                   (क)
  3. निम्न में से कौन सा एकमात्र तत्व वाला खनिज नहीं है ?
    (क) स्वर्ण                   (ख) माइका
    (ग) चाँदी                   (घ) ग्रेफाइट                               (ख)
  4. निम्न में से कौन सा कठोरतम खनिज है ?
    (क) टोपाज                 (ख) क्वार्ट्ज
    (ग) हीरा                     (घ) फेलसपार                            (ग)
  5. निम्न में से कौन सी शैल अवसादी नहीं है ?
    (क) टायलाइट              (ख) ब्रेशिया
    (ग) बोरैक्स                  (घ) संगमरमर                            (घ)
  6. आग्नेय शैलों के मूल स्रोत क्या  हैं
    मेग्मा

  7. आग्नेय शैलों के उदहारण दीजिए
    बेसाल्ट, ग्रेनाइट तथा गेब्रो 
  8. विभंजन   से क्या अभिप्राय है 
    खनिजों के अनियमित रूप से टूटने की प्रवृित विभंजन कहलाती है
  9. विदलन  से क्या अभिप्राय है 
    खनिजों की समतल सतह बनाने के लिए निश्चित दिशा में टूटने की प्रवृत्ति विदलन कहलाती है
  10. आग्नेय शैलों को  प्राथमिक शैल क्यों  कहते हैं।
    आग्नेय शैलों का निर्माण सबसे पहले होता है इसलिए इन्हें प्राथमिक शैल भी कहते हैं।
  11. पेट्रोलोजी किसे कहते है 
    भूविज्ञान वह शाखा जिसमें शैलों के प्रकार, संरचना, व उत्पति का अध्ययन किया जाता है पेट्रोलोजी कहलाती है 
  12. खनिजों का मूल स्रोत क्या  है
    पृथ्वी के आंतरिक भाग में पाया जाने वाला मेग्मा सभी खनिजों का मूल स्रोत है
  13. माइका नामक खनिज मुख्यतः किस उपयोग में आते है
    माइका का उपयोग मुख्यतः विद्युत उपकरणों में होता है
    1. शिली भवन की प्रक्रिया से क्या तात्पर्य है 
      आग्नेय, अवसादी व कायांतरित शैलौ का शैल चूर्ण व जीवाश्म जमकर सघनता के द्वारा अवसादी शैल में बदल जाते हैं यह प्रक्रिया शिलीभवन कहलाती है
    2. शैल से आप क्या समझते हैं ? शैल के तीन प्रमुख वर्गों के नाम बताएँ |
      एक या एक से अधिक खनिजों का मिश्रण जिनसे भूपर्पटी का निर्माण हुआ है शैल या चट्टान कहलाते हैं
      शैल तीन प्रकार के होते हैं:
      1. आग्नेय शैल 2.अवसादी शैल 3. कायांतरित शैल
    3. आग्नेय शैल क्या है? आग्नेय शैल के निर्माण की पद्धति एवं उनके लक्षण बताएँ|
      पृथ्वी के आंतरिक भाग के तप्त तरल मेग्मा व लावा के ठण्डा होकर जमने से निर्मित शैल को आग्नेय शैल कहा जाता है आग्नेय शब्द लैटिन भाषा के इग्निस (Igneous) शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है -अग्नि इन्हें प्राथमिक शैल भी कहते हैं। आग्नेय शैलों का निर्माण मैग्मा के ठंडे होकर घनीभूत होने से होता है। जब ये शैल धरातल के नीचे मैग्मा के धीरे-धीरे ठंडा होकर जमने से बनती है तो इनके कण बड़े बनते हैं। और जब ये शैल धरातल के ऊपर लावा के आकस्मिक शीतलता के कारण बनती है तो इनके कण छोटे बनते है बेसाल्ट, ग्रेनाइट तथा गेब्रो आग्नेय शैल के उदाहरण हैं।
      आग्नेय शैलों के लक्षण:
      आग्नेय शैलों में रन्ध्र नहीं पाये जाते हैं।
      आग्नेय शैलें रवेदार होती हैं।
      आग्नेय शैलों में जीवाश्म नहीं पाये जाते हैं।
      आग्नेय अत्यधिाक कठोर होती हैं
      आग्नेय शैलों में धात्विक खनिज मिलते हैं। 
    4. अवसादी शैल का क्या अर्थ है ? अवसादी शैल के निर्माण की पद्धति बताएँ।
      अवसादी अर्थात् Sedimentary शब्द की व्युत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द सेडिमेंट्स से हुई है, जिसका अर्थ है व्यवस्थित होना। अपक्षय व अपरदन के द्वारा आग्नेय, अवसादी व कायांतरित शैलें टूटकर उसी स्थान पर या अन्यत्र जमा होती जाती हैं। इन विभिन्न शैलों के द्वारा प्राप्त शैल चूर्ण, जीवाश्म एवं वनस्पतियों के एक के ऊपर एक परतों के रुप में जमा होने से निर्मित शैल को अवसादी शैल कहते हैं।
      अवसादी शैलो के लक्षण
      अवसादी शैलौं में परतें पाई जाती है
      अवसादी शैलौं में जीवाश्म पाए जाते हैं
      अवसादी शैले मुलायम होती है
      अवसादी शैलौं में रंध्र पाए जाते है
    5. शैली चक्र के अनुसार प्रमुख प्रकार की शैलों के मध्य क्या संबंध होता है?
      शैलें अपने मूल रूप में अधिक समय तक नहीं रहती हैं, बल्कि पुरानी शैलें परिवर्तित होकर नवीन शैल में बदल जाती है अर्थार्त एक प्रकार की शैल का दूसरे प्रकार की शैल में बदलने की क्रिया को शैली चक्र कहते है
      शैली चक्र एक सतत् प्रक्रिया है सबसे पहले आग्नेय शैलों का निर्माण होता है इन शैलों से अन्य शैलों (अवसादी व कायांतरित) का निर्माण होता है आग्नेय शालों के अपक्षय द्वारा निर्मित कण उसी स्थान या अन्यत्र जाकर जम जाते है जिससे अवसादी शैलों का निर्माण होता है अवसादी शैले भी विखंडित होकर पुनः अवसादी शैले बना सकती है आग्नेय व अवसादी शैले ताप व दाब में परिवर्तन के कारण कायांतरित सैलों में बदल जाती है इस प्रकार निर्मित ये शैले (आग्नेय ,अवसादी व कायांतरित शैले ) पृथ्वी के आंतरिक भाग में चली जाती है एवं उच्च तापमान के कारण पिघकर मेग्मा में बदल जाती है जो आग्नेय शैलों के मूल स्रोत हैं
    6. ‘खनिज’ शब्द को परिभाषित करें, एवं प्रमुख प्रकार के खनिजों के नाम लिखें।
      पृथ्वी से प्राप्त वे पदार्थ जिनकी एक विशेष परमाण्विक संरचना होती है तथा जिनके निश्चित रासायनिक और भौतिक गुण पाए जाते हैं, उन्हें खनिज कहते हैं।
      पृथ्वी के आंतरिक भाग में पाया जाने वाला मेग्मा सभी खनिजों का मूल स्रोत है
      खनिजों का वर्गीकरण
      सामान्यता खनिज दो प्रकार के होते हैं
      1.धात्विक खनिज - वे खनिज जिनमें धात्विक अंश पाया जाता है धात्विक खनिज कहलाते हैं
      धात्विक खनिज तीन प्रकार के होते हैं
      लौहा धात्विक खनिज-लौहा, निकल, मैंगनीज
      अलौह धात्विक खनिज-तांबा, सीसा, जस्ता, एलुमिनियम
      बहुमूल्य धात्विक खनिज -सोना चांदी प्लैटिनम
      2. अधात्विक खनिज- वे खनिज जिनमें धात्विक अंश नहीं पाया जाता है अधात्विक खनिज कहलाते है
      जैसे गंधक, फास्फेट
    7. कायांतरित शैल क्या हैं? इनके प्रकार एवं निर्माण की पद्धति का वर्णन करें।
      'कायांतरित ' का अर्थ है स्वरूप में परिवर्तन
      ताप, दाब व आयतन में परिवर्तन के द्वारा किसी मौलिक शैल में बिना विघटन व वियोजन के उसके संगठन व स्वरूप में परिवर्तन के फलस्वरुप बनी शैले कायान्तरित शैले कहलाती हैं
      जब ऊपरी शैलों के कारण निचली शैलों पर अत्यधिक दाब पड़ता है तो इनका संगठन व स्वरूप बदल जाता है जिससे कायांतरित शैलो का निर्माण होता है
      जैसे संगमरमर, हीरा, स्लेट, शिस्ट आदि
      कायांतरित शैलो के लक्षण
      कायांतरित शैलौं में बहुमूल्य खनिज पाये जाती है
      कायांतरित शैलौं में जीवाश्म नहीं पाए जाते हैं
      कायांतरित शैले कठोर होती है
      कायांतरित शैलौं में रंध्र नहीं पाए जाते हैं
      कायांतरित शैलों के प्रकार
      कायांतरित शैले दो प्रकार की होती है
      1. पत्रित शैल- जब कायांतरण के दौरान चट्टानों में स्थित खनिज कण रेखाओं के रूप से व्यवस्थित हो जाते है तो उससे पत्रित चट्टानों का निर्माण होता है है
      2. अपत्रित चट्टानें- : जब कायान्तरण के दौरान चट्टानों में स्थित खनिज कण रेखाओं के रूप से व्यवस्थित नही होते तो अपत्रित चट्टानों का निर्माण होता है
      कायांतरण निम्न प्रकार से हो सकता है
      1. गतिशील कायांतरण - बिना रसायनिक परिवर्तन के जब मूल शैलें टूटकर एवं पिसकर पुनः संगठित होती है तो यह गतिशील कायांतरण कहलाता है।
      2. ऊष्मीय कायांतरण - उच्च तापमान के कारण शैलौ में पुनः क्रिस्टलीकरण होना ऊष्मीय कायांतरण कहलाता है
      ऊष्मीय कायांतरण के दो प्रकार होते हैं -
      (i) संपर्क कायांतरण- ज्वालामुखी उद्गार के समय जब शैलें ऊपर आते हुए मैग्मा एवं लावा के संपर्क में आती हैं तो उच्च तापमान के कारण शैल के पदार्थों का पुनः क्रिस्टलीकरण होता है। और नए पदार्थ उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार के कायांतरण को संपर्क कायांतरण कहते हैं
      (ii) प्रादेशिक कायांतरण - जब उच्च तापमान, दबाव अथवा इन दोनों के कारण एक बहुत बड़े क्षेत्र में शैलों में पुनः क्रिस्टलीकरण होता है। तो यह कायांतरण प्रादेशिक कायांतरण कहलाता है



    15. पृथ्वी पर जीवन

    1. निम्नलिखित में से कौन जैवमंडल में सम्मिलित हैं :
      (क) केवल पौधे                 (ख) केवल प्राणी
      (ग) सभी जैव व अजैव जीव     (घ) सभी जीवित जीव        (ग)
    2. उष्णकटिबंधीय घास के मैदान निम्न में से किस नाम से जाने जाते हैं?
      (क) प्रेयरी                      (ख) स्टैपी
      (ग) सवाना                    (घ) इनमें से कोई नहीं        (ग)
      चट्टानों में पाए जाने वाले लोहांश के साथ ऑक्सीजन मिलकर निम्नलिखित में से क्या बनाती है?
      (क) आयरन कार्बोनेट          (ख) आयरन ऑक्साइड
      (ग) आयरन नाइट्राइट          (घ) आयरन सल्फेट         (ख)
    3. प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रिया के दौरान, प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाईऑक्साइड जल के साथ मिलकर क्या बनाती है?
      (क) प्रोटीन                     (ख) कार्बोहाइड्रेट्स
      (ग) एमिनोएसिड                (घ) विटामिन            (ख)
    4. पारिस्थितिकी से आप क्या समझते हैं?
      जीव विज्ञान की वह शाखा जिसमें जीवों और उनके पर्यावरण के बीच अन्तर्सम्बम्धों का अध्ययन किया जाता है। पारिस्थितिकी कहलाती है पारिस्थितिकी शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम सन् 1869 में हैकल ने किया
      पारिस्थितिकी (Ecology) शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों Oikos और logos से मिलकर बना है। Oikos का अर्थ है घर या निवास तथा logos का अर्थ 
      है  अध्ययन 
    5. पारितंत्र (Ecological system) क्या है? संसार के प्रमुख पारितंत्र प्रकारों को बताएं|
      पर्यावरण के समस्त जैविक और अजैविक कारको के बीच ऐसा अर्तंसंबंध जिसमें ऊर्जा प्रवाह व पोषण श्रृंखलाएं स्पष्ट रूप से समायोजित हों पारिस्थितिक तंत्र कहलाता है। पारिस्थितिकी तंत्र या पारितंत्र शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1935 में ए.जी. टोसले द्वारा किया गया था।
      पारितंत्र दो प्रकार के हैं :
      • स्थलीय पारितंत्र
      • जलीय पारितंत्र
    6. खाद्य श्रृंखला क्या है? चराई खाद्य श्रृंखला का एक उदाहरण देते हुए इसके अनेक स्तर बताएं|
      पारिस्थितिकी तंत्र में सभी जीवों की व्यवस्थित श्रंृखला जिसके द्वारा खाद्य पदार्थों व ऊर्जा का एक स्तर से दूसरे स्तर पर स्थानान्तरण होता है, खाद्य श्रृंखला कहलाती है।
      जैसे घास → टिड्डा → मेंढक → साँप
      चराई खाद्य शृंखला उत्पादक(हरे पौधो) से आरंभ होकर तृतीयक उपभोक्ता( माँसाहारी )जीवों पर समाप्त होती है, इसमें शाकाहारी मघ्यम स्तर होता हैं। खाद्य शृंखला में तीन से पाँच स्तर होते हैं और हर स्तर पर ऊर्जा कम होती जाती है।
      उदाहरण के लिए- पौधे पर जीवित रहने वाला एक कीड़ा (Bettle) एक मेंढक का भोजन है, जो मेंढक साँप का भोजन है और साँप एक बाज़ द्वारा खा लिया जाता है|
    7. खाद्य जाल (Food web) से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित बताएं|
      पारिस्थितिकी तंत्र में खाद्य शृंखलाएं विलगित अवस्था में क्रियाशील नहीं होती वरन एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। खाद्य शृंखलाओं के विभिन्न पोषक स्तरों पर परस्पर जुडा यह जाल खाद्य जाल कहलाता है
      उदाहरणार्थ- एक चूहा, जो अन्न पर निर्भर है वह अनेक द्वितीयक उपभोक्ताओं का भोजन है और तृतीयक माँसाहारी अनेक द्वितीयक जीवों से अपने भोजन की पूर्ति करते हैं|
    8. बायोम (Biome) क्या है?
      पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीव जंतु तथा पेड़ पौधों को सम्मिलित रूप से बायोम कहते हैं।
      संसार के पाँच प्रमुख बायोम इस प्रकार हैं:
      अ. वन बायोम              ब. मरुस्थलीय बायोम
      स. घासभूमि बायोम         द. जलीय बायोम
      य. उच्च प्रदेशीय बायोम
    9. संसार के विभिन्न वन बायोम (Forest biomes) की महत्वपूर्ण विशेषताओं का वर्णन करे|
      संसार के विभिन्न वन बायोम को तीन उपभागों में वर्गीकृत किया गया है :
      1-उष्ण कटिबंधीय :-
      (क) भूमध्य रेखीय- यहाँ तापमान 20° से 25° से. होता है जिसका लगभग एक समान वितरण होता है| यहाँ की मृदा में अम्लीयता तथा पोषक तत्त्वों की कमी पायी जाती है| असंख वृक्षों के झुंड, लंबे तथा घने वृक्ष पाए जाते हैं|
      (ख) पर्णपाती- यहाँ का तापमान 25° से 30° से. तथा एक ऋतु में 1,000 मि.मी. वार्षिक औसत वर्षा होती है| मृदा पोषक तत्त्वों में धनी होती है| कम घने, मध्यम ऊँचाई के वृक्ष तथा अधिक प्रजाति एक साथ पाई जाती है| दोनों में कीट पतंगें, चमगादड़, पक्षी व स्तनधारी जंतु पाए जाते हैं|
      2-शीतोष्ण कटिबंधीय :-
      तापमान 20° से 30° से. तथा वर्षा 750 से 1,500 मि.मी. तक होती है| मृदा उपजाऊ, अवघटक जीवों से भरपूर होती है| मध्यम घने चौड़े पत्ते वाले वृक्ष पाए जाते हैं| पौधों की प्रजातियों में कम विविधता जैसे- ओक, बीच, मेप्प्ल आदि हैं| जंतुओं में गिलहरी, खरगोश, पक्षी, काले भालू, पहाड़ी शेर व स्कंक आदि पाए जाते हैं|
      3- बोरियल :-
      छोटी आर्द्र ऋतु व मध्यम रूप से गर्म ग्रीष्म ऋतु तथा लंबी (वर्षा रहित) शीत ऋतु पाई जाती है| यहाँ मुख्यत: हिमपात के रूप में 400 से 1,000 मि.मी. वर्षा होती है| यहाँ की मृदा में अम्लीयता तथा पोषक तत्त्वों की कमी पायी जाती है| मिट्टी की परत अपेक्षाकृत पतली होती है| सदाबहार कोणधारी वन जैसे- पाइन, फर व स्प्रूस आदि पाए जाते हैं| कठफोड़ा, चील, भालू, हिरन, खरगोश, भेड़िये व चमगादड़ आदि मुख्य प्राणी हैं|
    10. जैव भू-रासायनिक चक्र (Biogeochemical balance) क्या है? वायुमंडल में नाइट्रोजन का यौगिकीकरण (Fixation) कैसे होता है? वर्णन करें|
      प्रकृति में सजीव व भौतिक पर्यावरण के मध्य रासायनिक तत्त्वों के चक्रीय प्रवाह को जैव भू-रासायनिक चक्र कहते हैं।
      जैव भू-रासायनिक चक्र दो प्रकार के हैं - एक गैसीय और दूसरा तलछटी चक्र
      गैसीय चक्र - गैसीय चक्र में चक्रीकरण करने वाले पदार्थे का मुख्य स्रोत वायुमंडल व महासागर हैं। जिसमें पदार्थे का चक्रीकरण मुख्यतः गैस के रूप में होता है तलछटी चक्र- तलछटी चक्र में चक्रीकरण करने वाले पदार्थे का मुख्य स्रोत पृथ्वी की भूपर्पटी पर पाई जाने वाली मिट्टी , तलछट व अन्य चट्टानें होती है हैं।
      नाइट्रोजन यौगिकीरण -वायुमंडल में उपस्थित नाइट्रोजन अन्य तत्वों के साथ क्रिया कर नाइट्रोजन के यौगिक बना लेती है इस क्रिया को नाइट्रोजन यौगिकीरण कहते हैं ये क्रिया दो प्रकार से होती है। तडित विसर्जन द्वारा नाइट्रोजन के ऑक्साइड में परिवर्तित होकर मृदा में मिल जाती है। और नाइट्रेट में बदल जाती है फलीदार पौधों की जड़ों में पाये जाने वाले राइजोबियम जैसे नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणु नाइट्रोजन को नाइट्रेट में बदल देते हैं।
    11. पारिस्थितिकी संतुलन (Ecological balance) क्या है? इसके असंतुलन को रोकने के महत्वपूर्ण उपायों की चर्चा करें|
      किसी पारितंत्र या आवास में जीवों के समुदाय में परस्पर गतिक साम्यता की अवस्था ही पारिस्थितिक संतुलन है| यह तभी संभव है जब जीवधारियों की विविधता अपेक्षाकृत स्थायी रहे|
      पारिस्थितिक असंतुलन के कारण- नईं प्रजातियों का आगमन, प्राकृतिक विपदाएँ और मानव जनित कारक हैं|
      इसके असंतुलन को रोकने के महत्वपूर्ण उपाय निम्नलिखित हैं :
      • प्रकृति में हस्तक्षेप न करके|
      • जनसंख्या पर नियंत्रण|
      • वस्तुओं का पुनः उपयोग और पुनःचक्रण|
      • प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग|
      • वनीकरण को प्रोत्साहन|